खाली कुर्सियां भी बहुत कुछ कहती हैं साहब...

www.khaskhabar.com | Published : मंगलवार, 31 जनवरी 2017, 8:02 PM (IST)

इलाहाबाद। अति-आत्मविश्वास से लबरेज भारतीय जनता पार्टी की टिकट वितरण नीति में इलाहाबाद से दलबदलुओं को टिकट देने का दांव सही होगा य उल्टा, यह तो वक्त बतायेगा। लेकिन इलाहाबाद के फाफामऊ विधानसभा में मगलवार को बुलाए गए कार्यकर्ता सम्मेलन में खाली पड़ी कुर्सियां कुछ और ही कहानी कह रही है।

बगावत का सुर तो नहीं
भाजपा व अपना दल के गठबंधन के बीच प्रत्याशी घोषित होकर चुनाव मैदान में उतरे पूर्व मंत्री विक्रमाजीत मौर्य के समर्थन में बुलाये गये कार्यकर्ता सम्मेलन में आज सुबह से ही वह देखने को मिला। जिसकी अभी तक दबे जुबान से बात की जा रही थी । यानी बगावत का वह सुर जो टिकट बंटवारे के बाद प्रदर्शन, नारेबाजी व पुतला दहन के बाद शांत माना जा रहा था। वह आज साफ तौर पर देखने को मिला। कार्यकर्ताओ ने उत्साह नहीं दिखाया और दावेदार के साथ उनके समर्थकों ने इस सम्मेलन से दूरी बनाये रखी। सुबह 10 बजे शुरू हुये सम्मेलन का समापन होने तक आधे से ज्यादा कुर्सियां खाली रही।

19 प्रबल दावेदार थे टिकट के
मालूम हो कि फाफामऊ विधानसभा इलाहाबाद की ऐसी सीट है। जहां से भाजपा और अपना दल के अलग अलग 19 प्रबल दावेदार थे। जो न सिर्फ चुनाव प्रचार प्रसार कर रहे थे। बल्कि बड़े बड़े नेताओ से अपनी पहुंच साधकर टिकट के जुगाड़ में लगे हुये थे। यहां तक कि टीवी सीरियल सीआईडी के पात्र अभय भी अमित शाह के सहारे महीनों से मैदान में डटे हुये थे। जबकि अनिल केसरवानी, सुधीर मौर्य, प्रवीण, कन्हैयालाल, रामानुज, शिवप्रसाद, प्रशांत, प्रेम मिश्र समेत 19 प्रत्याशियों के बीच बड़ी ही खामोशी से विक्रमाजीत ने टिकट हासिल कर लिया।

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खुला विरोध

टिकट की घोषणा में जब किसी दावेदार को टिकट नहीं मिला और पार्टी ने विक्रमाजीत पर भरोसा जताया तो स्थानीय दावेदारों ने खुल्लमखुल्ला विरोध कर दिया। हालांकि जिला संगठन व ऊपर लिये कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया गया तो कार्यक्रम में चंद कार्यकर्ता ही पहुंचे। जिसे देखकर सियासी खेमे में सवाल उठने लगे कि यह बगावत पूर्व मंत्री विक्रमाजीत को ले न डूबे।

फिलहाल इस सीट पर भाजपा के लिये पहले अपनो से लड़ना होगा। क्योंकि मैदान में प्रतिद्वंदी के रूप बसपा प्रत्याशी मनोज पाण्डेय कहीं अधिक मौजूद हैं। जबकि सपा विधायक अंसार अहमद कड़ी टक्कर देंगे। ऐसे में भाजपा के अपने बागियों को मनाना होगा। वरना भाजपा की टिकट वितरण नीति उसे ही ले डूबेगी।

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