नप. चुनाव सम्पन्न, 75 प्रतिशत हुई पोलिंग, कईयों के सूचियों से नाम रहे गायब

www.khaskhabar.com | Published : रविवार, 29 जनवरी 2017, 7:13 PM (IST)

नेरचौक(कपिल सेन)। नेरचौक नगर परिषद के सात वार्ड़ों में हुए चुनावों में 75 प्रतिशत पोलिंग हुई। सुबह साढ़े सात बजे से ही मतदाताओं ने आना शुरू कर दिया था। जनता की चुनावों में भारी भागीदारी से नगर परिषद को स्वीकृति समझा जा सकता है। कंसा चौक वार्ड 9 में मतदाता सुबह से लाईनों में लगे रहे और दोपहर तक लाईने लंबी होती गई। लगभग दो सौ महिलाओं की लाईन का लगना सभी को हैरान कर रहा था। वहीं पुरूष भी बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। वार्ड 10 डडौर में सुबह के समय थोड़े कम संख्या में मतदाता आए मगर दोपहर तक यहां भी मतदान करने वालों की लंबी लाईन देखी गई।
स्योहली वार्ड 11 जिसमें पिछली मर्तवा किसी भी मतदाता ने अपने मत का प्रयोग न कर विरोध जताया था ने अबकि बार पूरे जोश के साथ मतदान करने आए। वार्ड 2 ढांगु, वार्ड 3 धड़वाहन में भी चुनाव को लेकर सभी में उत्साह दिखाई दिया। हालांकि वार्ड 7 नागचला में भी मतदान अच्छा हुआ लोग लंबी कतारों में मतदान करने के लिए खड़े रहे वहीं बजुर्ग वर्ग में भी मतदान को लेकर खासा उत्साह दिखा। वार्ड 8 में भी दोपहर तक मतदाताओं की भीड़ लगी रही। नगर परिषद के चुनाव शांतिपूर्ण रहे और सभी वर्ग के मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। कंसा चौक में बहुत से मतदाताओं को सूचि में नाम न मिलने पर निराश होकर ही लौटना पड़ा। कंसा वार्ड में लगभग 50 से 60 व्यक्तियों के मतदाता सूची में नाम ही नहीं मिल पाया। जिससे लोग प्रशासन से खफा दिखे।
टांवा के गोंबिंद, प्रकाश चंद, नरेश कुमार ने बताया कि हम वोट डालने के लिए आए थे। मगर हमार मतदाता सूची में नाम ही नहीं मिल पाया। वहीं कुछ एक के तो पूरे परिवार के ही वोट नहीं बन पाए थे। वहीं चमन लाल का कहना हैं कि हमारे परिवार में छः मतदाता हैं, मगर एक का भी नाम सूची में नहीं आया है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन वर्ष पहले जिन मतदाताओं का देहांत हो गया है उनका नाम सूची में है। कुछ मतदाताओं के तो दो-दो बार नाम सूची में शामिल किए गए हैं। जिस वजह से मतदाओं को परेशान होना पड़ा। दीप कुमार, हरदेव, गुरूदेव, शशी कुमार आदि ने आरोप लगाया कि जिनको सूचियां बनाने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने लोगों के घर जाने के बजाए अपने घर बैठकर ही चार वर्ष पुरानी मतदाता सूचियों के आधार पर सूचियां बना दी है। यह कर्मचारियों की कामचोरी का नतीजा है कि मतदाता अपने मौलिक अधिकार से वंचित रह गए।

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