अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर हाईकोर्ट का कड़ा रूख, दिए कई फैसले

www.khaskhabar.com | Published : शनिवार, 24 दिसम्बर 2016, 11:02 AM (IST)

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्ववित्त पोषित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर कड़ा रूख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने इन संस्थानों पर नकेल कसते हुए कई दिशा निर्देश जारी किये हैं साथ ही लाखों का हर्जाना भी ठोका है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि स्ववित्त पोषित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान अपने कोटे से अल्पसंख्यक समुदाय से 50 प्रतिशत सीटें ही भर सकेंगे। बाकी 50 प्रतिशत सीटें सम्बंधित यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग से भरे जायेंगे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को बीटीसी के समकक्ष कोर्सेज चलाने का अधिकार नहीं है । [@ अमेरिका के 911 की तर्ज पर बना डायल 100 कैसे काम करेगा...जानिए इसकी टेक्नोलॉजी]

इसलिए ऐसे कोर्सेज इन संस्थानों की तरफ से न चलाये जायें। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बातें भी सामने आई कि की अल्पसंख्यक संस्थानों ने बी-एड के लिये 2014-16 और 2015-17 के सत्र में खुद ही 100 फीसदी सीटों पर दाखिला ले लिया था। बाद इन कालेजों के छात्र छात्राओ का भविष्य अधर में लटक गया ।

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सम्बंधित विश्वविद्यालयों ने 50 प्रतिशत छात्रों की परीक्षा लेने से इनकार कर दिया था। जिसके चलते दर्जनों अल्पसंख्यक संस्थानों के हज़ारों बच्चो का भविष्य खराब हो गया है। न्यायालय ने इसे गंभीर विषय मानते हुये संबंधित अल्पसंख्यक संस्थानों पर हर्जाना लगाया है । कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन छात्र-छात्राओ का भविष्य संस्थान के इस प्रक्रिया के चलते खराब हुआ और परीक्षा लेने से विश्वविद्यालय ने इनकार किया है। उन्हे 3 -3 लाख रूपये का हर्जाना दिया जाये । अपने आदेश में न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा कि अगर 90 दिनों में छात्र छात्राओ को हर्जाना का पैसा नहीं दिया जाता तो विश्वविद्यालय संस्थान की मान्यता रद्द कर दे। हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले में अब यह तय हो गया है कि राज्य की कोई भी यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थानो को सौ फीसदी छात्र देने को बाध्य नहीं है ।

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मालूम हो कि एक संस्थान की मनमर्जी के बाद मेरठ विश्वविद्यालय ने यह कदम उठाया था । विश्वविद्यालय ने 50 प्रतिशत के ऊपर के अल्पसंख्यक संस्थानों के दाखिले की परीक्षा लेने से इन्कार कर दिया था और आदेश दिया था कि संस्थान 50 प्रतिशत सीट ही अपने से भरे। बाकी के लिये काउंसलिंग प्रक्रिया ही लागू होगी।

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विश्वविद्यालय के इस आदेश के बाद गाज़ियाबाद के संकल्प इंस्टिट्यूट ऑफ़ एजुकेशन ने हाईकोर्ट में मेरठ विश्वविद्यालय की इसी आदेश को चुनौती दी थी। 3 महीने से मामले सुनवाई जस्टिस सुनीत कुमार की एकल पीठ कर रही थी। जिसमे आज फैसला सुनाया गया। हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश को डबल बेंच में ले जाने की बात कही जा रही है।

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