फिल्म समीक्षा: बेफिक्रे : परिवार नहीं, बेफिक्र होकर देखें युवा

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 09 दिसम्बर 2016, 1:26 PM (IST)

आदित्य चोपडा के निर्देशन में बनी ‘बेफिक्रे’ रणवीर सिंह को बॉलीवुड में एक पायदान और चढाने में कामयाब होगी इसमें कोई दोराय नहीं रही है। इस फिल्म में जिस अंदाज और ऊर्जा से रणवीर सिंह ने अपनी भूमिका को जिया, वह तारीफ-ए-काबिल है। उन्होंने हर दृश्य को निर्देशक से बढकर किया है। वहीं वाणी कपूर ने भी शानदार काम किया है।

दोनों की एनर्जी और केमिस्ट्री फिल्म की सबसे बडी यूएसपी है। आदित्य चोपडा ने वक्त को देखते हुए प्रेम और रिश्ते को नए एंगल से पेश किया है। रणवीर सिंह का लुक फिल्म में उनकी पहली फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ की याद आती है। हालांकि बेफिक्रे उससे इतर अलग ट्रैक पर है। फिल्म के गीतों को विशाल शेखर ने संगीतबद्ध किया है।

कुल 7 गाने हैं जिनमें से दो गीत ‘नशे सी चढ गई ओए कुडी नशे सी चढ गई’, ‘लबों का कारोबार...’ फिल्मांकन और मौसुकी के कारण अच्छे बन पडे हैं। इन गीतों को दर्शक फिल्म देखने के बाद भी गुनगुनाता नजर आता है। कैमरामैन ने पेरिस की खूबसूरती को पूरी तरह से उभारा है। फिल्म की कहानी युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

उसे उसी के नजरिए से पेश भी किया गया है। कहानी में कोई खराबी नहीं है लेकिन फिल्म में हर चार मिनट बाद आने वाले चुंबन दृश्यों के कारण इसे परिवार के साथ बैठ कर नहीं देखा जा सकता। वैसे भी इस तरह की फिल्मों को युवा अपने हमउम्र के साथ ही देखना पंसद करते हैं। फिल्म में प्यार है मौज मस्ती है जो सिर्फ युवाओं को पसन्द आएगी।