मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक सहायता प्रदान कर मनोरोगों को रोकें

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 10 अक्टूबर 2016, 3:58 PM (IST)

जयपुर । चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि परेशानी के वक्त तुरंत मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक सहायता प्रदान कर प्रारम्भिक अवस्था में ही मनोरोगों की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मनोरोगों को रोकने के लिये मानसिक शान्ति सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। राठौड़ सोमवार को सवाईमानसिंह चिकित्सालय के आडिटोरियम में मनोचिकित्सा विभाग के तत्वावधान में आयोजित विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मन के निरोग रहने में ही जीवन का आनन्द समाहित है। उन्होंने कहा कि मानसिक विकार से व्यक्ति असामान्य मानसिक व्यवहार करने लगता है। इनका संबंध व्यक्तित्व, मनोदशा और तात्कालिक चिंता या भय से हो सकता है।

मनारोगों को चिकित्सक की निगरानी में दवाईयां लेकर ठीक किया जा सकता है। भूतप्रेत, बुरी आत्माओं का प्रवेश, पूर्व जन्म के पाप, ग्रह नक्षत्रों की हेरफेर आदि चलते झाड़फूक आदि चक्कर में पड़कर मनोरोग के ईलाज की बजाय जंजीरों से बांधकर अंधेरे कमरो में पटक दिया जाता है। राठौड़ ने कहा कि सर्वेक्षणों के अनुसार 30 से 40 प्रतिशत जीवन के किसी ने किसी चरण में मन की रूग्णता के शिकार जरूर बनते हैं। इस मौके पर एसएमएस मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. यू.एस. अग्रवाल ने बताया कि कालेज की स्थापना के 7वें दशक के अवसर पर वर्ष पर्यन्त विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। समारोह में अधीक्षक डा. मानप्रकाश शर्मा, अतिरिक्त प्राचार्य डा. आई.डी. गुप्ता, एसएमएस अस्पताल के मनोरोग विभागाध्यक्ष डा. संजय जैन, मनोरोग चिकित्सालय अध्यक्ष डा. प्रदीप शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किये। आयोजन अध्यक्ष डा. आर. के. सोलंकी ने अतिथियों का स्वागत किया।