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मुख्यमंत्री पर सीबीआई जांच पर विपक्ष का जोरदार हंगामा

Vigorous opposition to the commotion of the CBI - Kangra News in Hindi

धर्मशाला। तपोवन में चल रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने जमकर हंगामा किया जिसके कारण विधानसभा की कार्रवाई दो बार के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने प्रश्नकाल आरंभ होते ही विधानसभा में प्रदेश सरकार पर मुख्यमंत्री वीरभद्र के खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपति मामले में सीबीआई जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए चर्चा की मांग की। विपक्ष ने नियम 67 के तहत भ्रष्टाचार और मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल को स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था। जिसे अध्यक्ष ने यह कहकर अस्वीकार कर दिया की मुख्यमंत्री के खिलाफ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं इसलिए इन पर चर्चा नही हो सकती। इसके तुरंत बाद नाराज विपक्ष अपनी सीटों पर खड़े हो गए और बाद में विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास जाकर नारेबाजी करने लगे। करीब 15 मिनट के शोर शराबे के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। विपक्ष के हो-हल्ले के बीच विधानसभा के दूसरे दिन की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इससे पहले विपक्ष ने मांग की कि राज्य सरकार वीरभद्र सिंह के खिलाफ हो रही सीबीआई जांच को प्रभावित कर रही है, जिस पर सदन में चर्चा की जाए जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की इस मांग को यह कह ठुकरा दिया कि जो मामला कोर्ट में लंबित हो, उस पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती। विपक्ष ने नोटबंदी पर प्राईवेट मेंबर-डे में विधायक महेंद्र सिंह की जगह उसी चर्चा को आज सत्तापक्ष की और से करवाने का भी सवाल सदन में उठाया। इस दौरान भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि, डा. राजीव बिंदल और सुरेश भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रहे सम्पति से अधिक आय के मामले में तीन जजों की बेंच ने निर्णय सुनाया है ऐसे में यह मामला न्यायालय में लंबित कैसे हो सकता है। सदन में नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि विपक्ष की मांग को विधानसभा अध्यक्ष ने न्यायालय में विचाराधीन होकर नकार दिया। जबकि नोटबंदी का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। उन्होंने अध्यक्ष से सवाल किया कि क्या वे सर्वोच्च न्यायालय को कोर्ट नहीं मानते। नेता विपक्ष ने कहा कि नोटबंदी पर भाजपा विधायक की चर्चा को अध्यक्ष ने आज सत्तापक्ष की ओर से करवाने की अनुमति दी है। जबकि नियम 119 में यह प्रावधान है कि जो चर्चा एक बार सदन में हो जाए उस पर वर्तमान सत्र में फिर से चर्चा नहीं हो सकती।
करीब सवा बारह बजे दोबारा जब विधानसभा की कार्रवाई शुरू हुई तो भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सदन में उन्हें पकड़ा और धमकाने के लहजे में कुछ कहा जोकि उन्हें सुनाई नहीं दिया। इस पर नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने इसे मुख्यमंत्री का तानाशाही रवैया करार देते हुए विधानसभा सदस्य से माफी मांगने की मांग की। धूमल के ऐसा कहते ही एक बार फिर विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए और मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी तथा एक बार फिर विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा करवाने को लेकर अपनी मांग पर अडिंग रहा। भाजपा विधायक एक बार फिर अध्यक्ष के आसन को घेरकर नारेबाजी करने लगे। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के रवैये को देखते हुए सदन की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।

[@ बार-बार बदले नियम, अब नोट जमा कराए तो पूछेंगे- कहां थे अब तक]

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Web Title-Vigorous opposition to the commotion of the CBI
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