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सत्य निकेतन हादसे के बाद सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल, बोले- लोगों को कर दिया बेबस

Saurabh Bhardwaj Raises Questions After Satya Niketan Incident; Says People Were Left Helpless - News in Hindi

नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि हादसे वाली जगह पर मोबाइल जैमर लगाए जाने के कारण लोगों के लिए मदद मांगना मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा कि जब मलबे के नीचे दबे लोग अपने मोबाइल फोन से परिजनों या राहत एजेंसियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे होंगे, उस समय मोबाइल सिग्नल बाधित होने से उनकी परेशानी और दहशत और बढ़ गई होगी। सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सरकार से पूछा कि सत्य निकेतन में मोबाइल जैमर लगाने का आदेश किसने दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हादसे के बाद प्रशासन की पहली प्राथमिकता मोबाइल नेटवर्क को बंद करना थी। उनका कहना है कि बिल्डिंग हादसे जैसी आपदा की स्थिति में मलबे में फंसे लोग अक्सर मोबाइल फोन के माध्यम से अपनी लोकेशन बताते हैं और मदद मांगते हैं। ऐसे में मोबाइल सिग्नल को बाधित करने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि जैमर लगे होने के कारण स्थानीय लोग भी एंबुलेंस या अन्य सहायता के लिए फोन नहीं कर सके। वहीं, यदि मलबे के अंदर कोई व्यक्ति जीवित था और उसने अपने मोबाइल से किसी रिश्तेदार या परिचित को कॉल करने का प्रयास किया होगा तो नेटवर्क बाधित होने की वजह से वह संपर्क नहीं कर पाया होगा। भारद्वाज ने कहा कि यह स्थिति किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद भयावह हो सकती है।
आप नेता ने राहत और बचाव कार्य में कथित देरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि राजधानी दिल्ली के बीचोंबीच हुए इस हादसे में एनडीआरएफ की टीम को मौके तक पहुंचने में दो से ढाई या तीन घंटे क्यों लगे। उन्होंने सरकारी एंबुलेंस के भी करीब दो घंटे की देरी से पहुंचने का आरोप लगाया। भारद्वाज के मुताबिक, हादसे के बाद सबसे पहले ब्लिंकिट की एक निजी एंबुलेंस मौके पर पहुंची, जबकि सरकारी एंबुलेंस बाद में पहुंची।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राहत और बचाव का काम भी करीब दो से ढाई घंटे की देरी से शुरू हुआ और एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे लग गए। उन्होंने कहा कि यह हादसा देश की राजधानी के बेहद महत्वपूर्ण इलाके में हुआ, जो लुटियंस दिल्ली के बिल्कुल नजदीक है और प्रधानमंत्री आवास से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने हादसे के बाद मलबा हटाने में लगे समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 100 गज की एक छोटी सी बिल्डिंग का मलबा हटाने में 24 घंटे से अधिक समय लगना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि आखिर राहत एवं बचाव कार्य में इतनी देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि घटनास्थल पर मोबाइल जैमर लगाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था और किस अधिकारी या विभाग ने इसके आदेश दिए थे।
उनका कहना है कि हादसे के दौरान राहत कार्य में तेजी लाने के बजाय संचार व्यवस्था बाधित करना गंभीर विषय है। भारद्वाज ने कहा कि सत्य निकेतन हादसे की घटनाओं को केवल एक स्थानीय हादसे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे राजधानी की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक स्थिति सामने आती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए कि राहत दल और एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंचीं और मोबाइल नेटवर्क को बाधित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
आप नेता ने केंद्र और दिल्ली सरकार की विकास संबंधी दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में एक हादसे के दौरान राहत और बचाव व्यवस्था में इतनी देरी हो तथा लोगों के संपर्क के साधन तक बाधित हो जाएं, तो 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने और 7.8 प्रतिशत जीडीपी जैसी बातों का जमीनी वास्तविकता से कोई मेल नहीं बैठता। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े दावों के बजाय जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
--आईएएनएस

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Web Title-Saurabh Bhardwaj Raises Questions After Satya Niketan Incident; Says People Were Left Helpless
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