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ड्रग माफिया के मकडजाल में कुल्लू घाटी, यहां आते हैं हर साल डेढ लाख विदेशी

Mkdjal drug mafia in the Kullu Valley, come here every year, half a million foreign - Kullu News in Hindi

कुल्लू(धर्मचंद यादव)। सेब की लाली व प्राकृतिक सौंदर्य के प्रसिद्ध कुल्लू घाटी लगतार नशे की दलदल में धंसती जा रही है। विदेशों में तो कुल्लू घाटी एक अंतरराष्ट्रीय चरस मंडी के तौर विख्यात हो चुकी है और यही वजह है कि जहां विदेशी पहले यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने आते थे अब चरस की अंतरराष्ट्रीय मंडी बनने के बाद तो यहां पर विदेशी सैलानियों की भरमार होने लगी है। उल्लेखनीय है कि कुल्लू घाटी विदेशों में चरस के लिये कुख्यात होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हो चुकी है। यहां पर विदेशी चरस पीने की चाह में खींचे चले आ रहे हैं हालांकि यहां पर विदेशियों की आवाजाही नई नहीं है लेकिन कुछ सालों से विदेशियों का आवागमन ज्यादा होता जा रहा है।
जानकारों की माने तो चरस की अंतरराष्ट्रीय मंडी के तौर नई पहचान बनाने वाली कुल्लू घाटी में अब विदेशी चरस पीने व उसका कारोबार करने की चाह में ज्यादा आ रहे हैं। वैसे तो मनाली प्रारम्भ से ही विदेशियों की पहली पसंद रहा है लेकिन जब से कुल्लू घाटी में चरस का कारोबार फलने फूलने लगा तब से विदेशियों के अड्डे भी बदल गये। कुल्लू घाटी में चरस के लिये पार्वती घाटी तो विदेशों में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हो चुकी है। पार्वती घाटी में स्थित कसोल व मलाणा तो चरस मंडी के तौर पर ही पहचाने जाते है। इसके अलावा मनाली में ओल्ड मनाली भी चरस के लिये विदेशियों की खास पसंद है। जहां पर विदेशियों को चरस आसानी से मुहैया हो जाती है।
हर साल आते हैं डेढ लाख विदेशी
पर्यटन विभाग के आकलन के मुताबिक कुल्लू घाटी में हर साल लगभग डेढ लाख विदेशी सैलानी आते हैं और उनमें से ज्यादातर की पहली पसंद पार्वती घाटी ही होती है। विदेशी सैलानी ज्यादातर जून से अक्तूबर माह के बीच में यहां ज्यादा आते हैं क्योंकि इस दौरान यहां पर चरस का सीजन चरम पर होता है। अधिकतर सैलानी होटलों मे रूकने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के घरों में कमरे किराये पर लेकर या फिर गेस्ट हाउसों रहना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में एक तो उनको चरस आसानी से उपलब्ध हो जाती है और दूसरे वहां पर वह पुलिस व अन्य जांच एजैंसियों की नजरों से भी दूर रहते हैं।
गांव के लोग रोकते हैं विदेशियों के कदम
जानकारों की माने तो ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग विदेशियों को चरस मुहैया करवा कर उन्हें वहां पर ज्यादा दिन रूकने के लिये विवश कर देते हैं। ताकि चरस की बिक्री के साथ-साथ उन्हें उनके कमरों का भी भरपूर किराया मिलता रहे। जानकारी के मुताबिक ग्राहण, रसोल, तोष, पुलगा, तुलगा व खीर गंगा आदि ऐसे स्थान हैं जहां पर पुलिस भी जाने से कतराती है। यही वजह है कि ज्यादातर विदेशी इन्हीं स्थानों को अपने रहने के लिये चुनते हैं। इन स्थानों पर चरस का खुला व्यापार होता है क्योंकि यहां की चरस को बेहद ही उत्तम क्वालिटी का माना जाता है और विदेशी यहां पर चरस की मुह मांगी कीमत अदा करने को तैयार रहते हैं।
ट्रैकिंग के बहाने घुमते हैं गांव में
विदेशियों के सम्पर्क में रहने वाले जानकारों की माने तो चरस के आदी विदेशी सैलानी ट्रैकिंग के बहाने एक दूसरे गांव में घुमते रहते हैं और अलग-अलग गांव में रह कर वहां पर चरस का आनंद लेते हैं। गांववासी भी इन विदेशियों की आवाभगत में कोई कमी नहीं रखते हैं क्योंकि इन्ही विदेशी सैलानियों महंगे दाम पर चरस बेच कर ग्रामीण खूब कमाई करते हैं। इसलिए विदेशी सैलानी इनके लिये वीआईपी अतिथि से कम नहीं होते हैं।

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Web Title-Mkdjal drug mafia in the Kullu Valley, come here every year, half a million foreign
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