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पाली के सागदड़ा में ग्रेनाइट माइंस का तांडव : सुकड़ी नदी में घोला जहर, किसानों की उपजाऊ जमीन हो रही बंजर

Granite mines wreak havoc in Sagadra, Pali: Poison in the Sukdi River, rendering farmers fertile land barren - Pali News in Hindi

खास खबर। पाली राजस्थान के अरावली क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के दावों की धज्जियां उड़ाने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। पाली जिले के सागदड़ा गांव में ग्रेनाइट खदान संचालकों की मनमानी और दादागिरी के कारण सुकड़ी-कुलथाना नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। पर्यावरण नियमों को दरकिनार कर माइंस मालिक राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और खतरनाक केमिकल युक्त प्रदूषित पानी को अवैध पाइप लाइनों के जरिए सीधे नदी में बहा रहे हैं। बताया जा रहा है कि खान औऱ प्रदूषण मंडल का कार्यभार एक ही अधिकारी के पास होने से यह समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
स्थानीय किसानों का दर्द अब गुस्से में बदल चुका है। ग्रेनाइट खदानों से निकलने वाले इस जहरीले पानी के कारण नदी किनारे स्थित खेतों की फसलें पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी हैं। जो जमीन कभी सोना उगलती थी, वह आज बंजर रेगिस्तान में तब्दील हो गई है। पिछले 30 वर्षों से लगातार हो रहे इस प्रदूषण के कारण सुकड़ी-कुलथाना नदी का भूजल स्तर पूरी तरह खारा हो चुका है, जिसका असर स्थानीय बांध तक फैल गया है। सिंचाई तो दूर, अब मवेशियों को पानी पिलाना भी जानलेवा साबित हो रहा है।
RSPCB के 'तीन दिन' के खेल पर उठे सवालः
इस गंभीर पर्यावरणीय अपराध को लेकर जब राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) के क्षेत्रीय अधिकारी अमित सोनी को सूचित किया गया, तो उनका रवैया बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय 'तीन दिन' का समय मांगा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या तीन दिन का समय देकर अवैध तरीके से नदी में बिछाई गई पाइप लाइनों को हटाने और सबूत मिटाने का मौका दिया जा रहा है? तत्काल निरीक्षण न होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
जीरो डिस्चार्ज नियमों का खुला उल्लंघनः
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और RSPCB के कड़े नियम कहते हैं कि ग्रेनाइट माइंस से निकलने वाला पानी "जीरो डिस्चार्ज" होना चाहिए, यानी पानी को ट्रीटमेंट के बाद री-सर्कुलेट करना अनिवार्य है। नदी-नालों में सीधा डिस्चार्ज करना जल संरक्षण अधिनियम 1974 के तहत एक दंडनीय अपराध है। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक बामणिया ने इस गंभीर मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट की SIT कमेटी के सदस्यों के संज्ञान में डाला है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर पर्यावरणीय अपराध पर प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। इसके खिलाफ अब सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
पीड़ित किसानों की हुंकार:
इधऱ, इस मामले को लेकर स्थानीय किसानों में खदान मालिकों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अफसरों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश पनप रहा है। उनकी मांग है कि माइंस से प्रदूषित और जहरीले पानी का डिस्चार्ज तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। RSPCB और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम बनाकर निष्पक्ष जांच हो और दोषी माइंस मालिकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। सालों से बर्बाद हो रही जमीन और फसलों का किसानों को तुरंत उचित मुआवजा दिया जाए।

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Web Title-Granite mines wreak havoc in Sagadra, Pali: Poison in the Sukdi River, rendering farmers fertile land barren
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