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गोबिंद सागर झील में जलमग्न हुए ऐतिहासिक मंदिर बाहर निकलेंगे

Gobind Sagar lake, the historic temple submerged exit - Himachal Bilaspur News in Hindi

बिलासपुर। भाखड़ा बांध का निर्माण होने पर गोबिंद सागर झील में जलमग्न हुए ऐतिहासिक मंदिर बाहर निकलेंगे। ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन धरोहरों को संजोने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। धरोहरों की पुन: स्थापना के लिए बिलासपुर शहर के निकट काला बाबा आश्रम के पास जगह देखी गई है। हालांकि अभी तक इस पर पूरी तरह से अंतिम मुहर नहीं लगी है। जमीन का कुछ हिस्सा काला बाबा ट्रस्ट व बिजली बोर्ड के अधीन आता है। प्रशासन ने औपचारिकता पूरी कर भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है।
हर साल जल समाधि लेते हैं पुराने मंदिरों के अवशेष
बिलासपुर में आज भी पुराने मंदिरों के अवशेष हर साल जल समाधि लेते हैं और पानी उतरने पर फिर बाहर निकल आते हैं। इन मंदिरों में मुख्यत: रंगनाथ मंदिर, खनेश्वर व नर्वदेश्वर मंदिर प्रमुख हैं। इनके अलावा सांडू मैदान में 28 अन्य मंदिर भी हैं लेकिन गोबिंद सागर झील में बढ़ रही गाद की मात्रा बढ़ने के कारण अधिकांश छोटे बड़े मंदिर अब पूरी तरह गाद में समा चुके हैं। शिल्पकला के अद्भुत नमूने रंगनाथ मंदिर, गोपाल मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, बाह का ठाकुरद्वारा, खनमुखेश्वर, रघुनाथ मंदिर और रंग महल पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। 1960 में भाखड़ा बांध बनने से पहले इन मंदिरों का अपना ही महत्व था।
उत्तर भारत में ये सबसे अलग ही मंदिर
कहा जाता है कि उत्तर भारत में ये सबसे अलग ही मंदिर हैं। ऐतिहासिक महत्व के इन मंदिरों को बचाने के लिए सरकार ने आंखे मूंद ली थी लेकिन जिस तरह अब मंदिरों को सहेजने की कवायद शुरू हुई है, उससे ऐतिहासिक मंदिरों के दोबारा नजर आने की उम्मीद प्रबल हुई है। पुन: स्थापित होने से ऐतिहासिक धरोहरें इतिहासकारों व शोधकर्ताओं के लिए शोध का अनूठा विषय साबित हो सकता है।
मंदिर में चढ़ाते थे जल तो होती थी बारिश
मान्यता है कि जलमग्न मंदिरों में करीब एक हजार वर्ष पुराना रंगनाथ मंदिर शिव को समर्पित था। लोगों के अनुसार जब इस शिव मंदिर में जलधारा डालते थे और वह सतलुज नदी में मिलती थी तो एकाएक बारिश शुरू हो जाती थी। झील में समा चुके मंदिरों के पुन: स्थापना के लिए समय-समय पर लोगों ने आवाज बुलंद की है। मई 2011 में हस्ताक्षर अभियान भी संघर्ष का हिस्सा रहा है। अभियान के दौरान एक हजार लोगों ने झील में डूबे मंदिरों को निकालने के लिए हस्ताक्षर किए थे।
पुरातत्व विभाग की टीम ने किया दौरा
गोबिंद सागर झील में डूबे कहलूर रियासत के मंदिरों को नई जगह स्थापित करने के लिए पुरातत्व विभाग ने करीब पांच माह पूर्व बिलासपुर का दौरा किया है। मंदिरों के खंडहरों के साथ-साथ उन जगहों का भी जायजा लिया जहां ये मंदिर स्थापित किए जाने हैं।
12 मंदिरों की होगी स्थापना
बिलासपुर उपायुक्त ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर का कहना है कि गोबिंद सागर झील में जलमग्न मंदिरों के पुनर्गठन के लिए निदेशालय भाषा एवं संस्कृति विभाग से शीघ्र कार्यवाही के लिए आग्रह किया गया है। बिलासपुर में जलमग्न हो रहे 28 मंदिरों में से 12 मंदिरों को पुन: दूसरी जगह स्थापित किया जाएगा। इसके लिए बिलासपुर के काला बाबा की कुटिया के निकट करीब 30 बीघा जमीन देखी गई है।

[# जो भी यहां आया बन गया "पत्थर"]

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Web Title-Gobind Sagar lake, the historic temple submerged exit
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