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सिस्टम रिव्यू: सशक्त कथानक, दमदार अभिनय और रहस्य, देखने लायक है कोर्टरूम ड्रामा

System Review: Strong Performances And Engaging Mystery Make This Courtroom Drama Worth Watching - Movie Review in Hindi

—राजेश कुमार भगताणी ओटीटी मंचों पर पिछले कुछ वर्षों में कोर्टरूम ड्रामा आधारित फिल्मों और धारावाहिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन दर्शकों को प्रभावित करना हर फिल्म के लिए आसान नहीं होता। ऐसी कहानियों में केवल कानूनी बहस या अदालत का वातावरण ही काफी नहीं होता, बल्कि दर्शकों को बांधे रखने के लिए मजबूत अभिनय, रहस्य और भावनात्मक गहराई भी जरूरी होती है। 22 मई 2026 को प्रदर्शित हुई फिल्म “सिस्टम” इसी कोशिश के साथ दर्शकों के सामने आई है। यह फिल्म केवल एक अदालत की कहानी नहीं सुनाती, बल्कि रिश्तों, महत्वाकांक्षा और रहस्य के कई पहलुओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी अभिनय क्षमता है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, लेकिन जैसे-जैसे घटनाएं खुलती हैं, दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ने लगती है। पारिवारिक टकराव से शुरू होने वाली यह कथा अचानक एक हत्या के रहस्य में बदल जाती है और यहीं से फिल्म अपना असली रंग दिखाना शुरू करती है।
बाप-बेटी के रिश्ते के बीच छिपा संघर्ष
फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जहां पिता एक बड़े और प्रतिष्ठित वकील हैं, जबकि उनकी बेटी वकालत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। बेटी अपने पिता की कानूनी संस्था में साझेदार बनना चाहती है, लेकिन पिता उसके सामने शर्त रखते हैं कि पहले उसे दस मुकदमे जीतकर खुद को साबित करना होगा।
यहीं से कहानी में भावनात्मक तनाव पैदा होता है। एक ओर बेटी खुद को साबित करने की जिद में है, वहीं दूसरी ओर पिता अपने अनुभव और सिद्धांतों पर अडिग दिखाई देते हैं। कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब दोनों एक हत्या के मामले में आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। अदालत की बहसों के बीच रिश्तों का तनाव और रहस्य की परतें फिल्म को लगातार रोचक बनाए रखती हैं।
रहस्य और भावनाओं का संतुलन
फिल्म की शुरुआत पारिवारिक नाटक की तरह होती है, जिससे कुछ समय तक कहानी सामान्य लग सकती है, लेकिन जैसे ही हत्या का मामला सामने आता है, घटनाक्रम तेजी से बदलने लगता है। दर्शक लगातार यह जानने की कोशिश में लगे रहते हैं कि आखिर असली अपराधी कौन है। फिल्म का चरम भाग दर्शकों को चौंकाने में सफल दिखाई देता है।
कहानी में सस्पेंस हावी है, जिसके चलते पटकथा को और मजबूत किया जा सकता था। यदि एडिटिंग में फिल्म के प्रारंभिक हिस्से में पारिवारिक भावनाओं को थोड़ा सीमित किया जाता तो फिल्म और अधिक प्रभावशाली बन सकती थी। इसके बावजूद पूरी फिल्म दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है।
सोनाक्षी सिन्हा का प्रभावशाली अभिनय
फिल्म में सबसे अधिक प्रभावित करने वाला पक्ष सोनाक्षी सिन्हा का अभिनय माना जा सकता है। उन्होंने एक ऐसी महिला वकील का किरदार निभाया है जो महत्वाकांक्षी भी है, भावुक भी और परिस्थितियों के अनुसार मजबूत भी। अदालत में उनकी उपस्थिति प्रभावशाली लगती है और भावनात्मक दृश्यों में भी वह दर्शकों से जुड़ने में सफल रहती हैं।
ओटीटी मंचों पर सोनाक्षी लगातार अलग तरह के किरदारों में दिखाई दे रही हैं और “सिस्टम” में भी उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। उन्होंने एक साथ बेटी, वकील और रहस्य सुलझाने वाली महिला के कई रूपों को संतुलित तरीके से निभाया है।

ज्योतिका और आशुतोष ने बढ़ाई फिल्म की गंभीरता

ज्योतिका का किरदार फिल्म में धीरे-धीरे महत्वपूर्ण होता जाता है। शुरुआत में उनका पात्र सामान्य प्रतीत होता है, लेकिन आगे चलकर कहानी में उनका महत्व काफी बढ़ जाता है। उन्होंने अपने अभिनय से पात्र में गहराई पैदा की है और कई दृश्यों में दर्शकों को चौंकाने में सफल रहती हैं।
आशुतोष गोवारिकर ने अनुभवी वकील की भूमिका को बेहद सहजता से निभाया है। उनके संवाद बोलने का तरीका और अदालत के दृश्यों में उनका आत्मविश्वास किरदार को वास्तविकता के करीब ले जाता है। कई बार ऐसा महसूस होता है कि वह केवल अभिनय नहीं कर रहे, बल्कि सचमुच एक अनुभवी अधिवक्ता हैं।
विजयंत कोहली ने भी अपने नकारात्मक किरदार में प्रभाव छोड़ा है। उनका अभिनय कहानी में तनाव बनाए रखने में मदद करता है और वह दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं।
निर्देशन और लेखन ने रखा कहानी को संतुलित
फिल्म का निर्देशन संवेदनशील और वास्तविक रखने की कोशिश की गई है। अदालत के दृश्यों को अत्यधिक नाटकीय बनाने के बजाय वास्तविकता के करीब रखा गया है, जो फिल्म को अलग पहचान देता है। कहानी में अनावश्यक शोर-शराबे की जगह संवादों और परिस्थितियों के माध्यम से तनाव पैदा किया गया है।
लेखन में कई अच्छे क्षण दिखाई देते हैं, हालांकि कुछ स्थानों पर कहानी को और अधिक धारदार बनाया जा सकता था। यदि रहस्य और रोमांच के स्तर को थोड़ा और बढ़ाया जाता, तो यह फिल्म केवल अच्छी नहीं बल्कि बेहद यादगार कोर्टरूम ड्रामा बन सकती थी।

देखें या नहीं?

यदि आपको अदालत आधारित रहस्यपूर्ण कहानियां पसंद हैं और आप मजबूत अभिनय वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो “सिस्टम” आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। यह फिल्म भावनात्मक संघर्ष, पारिवारिक रिश्तों और हत्या के रहस्य को एक साथ प्रस्तुत करती है। खासतौर पर सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका और आशुतोष गोवारिकर का अभिनय इस फिल्म को देखने लायक बनाता है।
यह फिल्म उन दर्शकों को अधिक पसंद आ सकती है जो शोर-शराबे से अलग एक गंभीर और रहस्यपूर्ण कहानी देखना चाहते हैं। ओटीटी पर आराम से बैठकर देखने के लिए यह एक संतुलित और मनोरंजक फिल्म कही जा सकती है।

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