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शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केन्या ने अपनाया भारत का डीपीआई मॉडल: रिपोर्ट

Kenya Adopts India DPI Model to Strengthen Governance: Report - Gadgets News in Hindi

नई दिल्ली । केन्या ने अपनी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को अपनाया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें यूपीआई जैसे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम और डिजीलॉकर जैसी डिजिटल डॉक्यूमेंट स्टोरेज सुविधा शामिल है। इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्या की प्रशासनिक व्यवस्था, जो लंबे समय से देरी और बिखरे हुए पहचान सिस्टम की समस्याओं से जूझ रही थी, अब भारतीय डिजिटल सिस्टम की मदद से बड़ा बदलाव करने जा रही है। इससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी और तेजी से बढ़ रही अफ्रीकी अर्थव्यवस्था में डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, "2023 से 2026 के बीच यूपीआई जैसे पेमेंट सिस्टम और डिजीलॉकर जैसी डॉक्यूमेंट स्टोरेज के पायलट प्रोजेक्ट्स एक मजबूत दक्षिण-दक्षिण साझेदारी का उदाहरण हैं। इससे केन्या महाद्वीप में डिजिटल क्षेत्र का अग्रणी देश बन सकता है और आम लोगों के लिए सरकारी प्रक्रियाएं आसान होंगी।"
यूपीआई जैसे सिस्टम को केन्या के नागरिकों को दिए जाने वाले यूनिक पर्सनल आईडी नंबर 'माईशा नंबा' के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे शिक्षा सुधार और केनेक जैसे पोर्टल्स को मजबूती मिलेगी।
इन पायलट प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य पहचान, पेमेंट और सुरक्षित डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन को एक साथ जोड़ना है, ताकि सरकार से नागरिकों तक सेवाएं (जी2सी), शिक्षा सुधार और छोटे व्यवसायों के पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाया जा सके। साथ ही यह एम-पेसा जैसे मौजूदा मोबाइल मनी प्लेटफॉर्म के साथ भी काम करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह लागू होने के बाद यह सिस्टम रेमिटेंस, व्यापारिक भुगतान और सरकारी सेवाओं को गति प्रदान करेगा, साथ ही धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में भी मदद करेगा।
अप्रैल 2026 में पायलट प्रोजेक्ट्स के दौरान बेहतर नतीजे देखने को मिले, जैसे तेज आईडी प्रोसेस, कम भ्रष्टाचार और मजबूत डिजिटल संप्रभुता। रिपोर्ट में कहा गया कि "केन्या सिर्फ अपनाने ही नहीं, बल्कि अफ्रीकी जरूरतों के हिसाब से डीपीआई को ढाल भी रहा है।"
डिजीलॉकर जैसे टूल्स ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को हफ्तों से घटाकर मिनटों में कर दिया, जिससे लोगों को लंबी लाइनों से राहत मिली। वहीं यूपीआई और माइशा नंबा का एकीकरण शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक कई क्षेत्रों को फायदा पहुंचा सकता है। केन्या में करीब 60 प्रतिशत टेक्नोलॉजी पहुंच होने के कारण डिजिटल पेमेंट को और बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि इंडिया का डिजिटल 'स्टैक' — आधार आईडी, यूपीआई पेमेंट और डिजीलॉकर वॉल्ट —1.4 अरब लोगों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचा चुका है। 2023-24 तक यूपीआई कुल ट्रांजैक्शंस का 70 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और इससे बिना बैंक वाले लोगों को भी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिली है।
डिजीलॉकर अकेले 50 करोड़ यूजर्स को सेवाएं दे रहा है और अरबों सुरक्षित डॉक्यूमेंट्स को संभाल रहा है, जिससे साबित होता है कि डीपीआई कम लागत में भी समावेशी विकास दे सकता है।
फरवरी 2026 में, केन्या ने 'इंडिया एआई इंपैक्ट समिट' के दौरान भारत के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के साथ मिलकर एक कस्टमाइज्ड डिजीलॉकर पायलट के लिए कार्यान्वयन ढांचा (इम्प्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क) पर हस्ताक्षर किए थे।
--आईएएनएस

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Web Title-Kenya Adopts India DPI Model to Strengthen Governance: Report
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