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कैसे निपटे: काम के बोझ से और नकारात्मक बातें करने वाले सहयोगी से

How to deal with workload and negative talkers - Career News in Hindi

हाल ही में हुए एक शोध में यह सामने आया है कि अपने कार्यस्थल पर बेहतर परफॉर्मेंस देने वाले 90 प्रतिशत कर्मचारी काम का बोझ बढऩे पर भी वह खुद को दबाव से दूर रखते हैं। साथ ही वर्कप्लेस पर काम करने के दौरान ऐसे कलीग्स से भी सामना होता है जो हमेशा नकारात्मक बातें करते हैं और मनोबल गिराने का काम करते हैं। आइए डालते हैं एक नजर इन परिस्थितियों से आप अपने आपको किस तरह उबार सकते हैं, पर—
सबसे जरूरी बात है कि नकारात्मक बातें करने वालों के व्यवहार से अपने काम पर असर न पडऩे दें। पहले यह समझें कि आप इन लोगों को कैसे पहचानें। अगर आपका कलीग्स असभ्य औी अपमानजनक तरीके से बात करते हैं। अगर वो अपनी गलतियों को हमेशा दूसरों पर थोप देते हैं या हमेशा असन्तुष्ट रहते हैं। वे हमेशा ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे कि वे सब कुछ जानते हैं।
ऐसे निगेटिव कलीग्स किस तरह के व्यवहार करते हैं, पहले उसे समझें। यह समझने की कोशिश करें कि उनका ऐसा निगेटिव व्यवहार सभी के लिए है या सिर्फ आपके लिए है। उनकी बातों का पहली बार में ही जवाब न दें और बहस की स्थिति न बनने दें। जब वे आपके काम की कमी निकालें या गलत व्यवहार करें तो ध्यान रखें कि वे आपको काम से भटकाना चाहते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप ऐसे कलीग्स से अधिक बातें न करें। आप सिर्फ अपने काम पर ध्यान दें। स्थिति बिगडऩे पर उन्हें विनम्रता के साथ जवाब दें। एक-दो बार कलीग्स के निगेटिव व्यवहार करने पर उन्हें नजरअंदाज करें। यदि वह आपसे 3-4 बार गलत व्यवहार कर चुके हैं तो उनसे सीधी बात करें। उनसे मिलें और ऐसा करने की वजह पूछें। लेकिन ध्यान रखें कि बातचीत का लहजा विनम्र होना चाहिए, तभी समस्या का समाधान मिल सकेगा।
ऑफिस में काम का बोझ बढऩे पर कर्मचारी स्वयं को दबाव में महसूस करता है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग खुद को अकेला पाते हैं और परेशानी का सामना करने की जगह इससे दूरी बनाने लगते हैं। नतीजा, समस्याएँ और बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में कम्पनी से जुड़े सपोर्ट सिस्टम की मदद लें। उन सुविधाओं का प्रयोग करें जो कम्पनी ने उपलब्ध कराई हैं। साथ ही काम का लोड़ बढऩे पर मन में किसी तरह की नकारात्मक स्थिति न बनने दें। इससे समस्या और बड़ी लगने लगती है। इसलिए खुद से यह कहें कि आप समस्या को हल कर सकते हैं। 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें और दिमाग को शांत रखते हुए नए सिरे से समाधान खोजें। यदि आपको इन परिस्थितियों में डर लग रहा है तो डर को अपने मन से निकाल दें। यह डर ही है जो आपको सही कदम उठाने से रोकता है। अगर सोच-समझकर फैसला लेते हैं तो सफलता की गुंजाइश और बढ़ जाती है, इसलिए फेल होने का डर निकाल दें और आगे बढ़ें।

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Web Title-How to deal with workload and negative talkers
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Tags: how to deal with workload and negative talkers, career news in hindi
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