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जब रामभक्त हनुमान पर प्रारंभ हुई शनि की दशा . . . .

शनि शांति के लिए शनिदेव की लौह प्रतिमा पर सरसों का तेल चढाने का विधान ज्योतिष ग्रंथों में किया गया है। यह अभिषेक का ही मानो एक रूप है। आनंद रामायण के अनुसार,हनुमान पर जब शनि की दशा प्रारंभ हुई, उस समय समुद्र पर पुल बांधने का कार्य चल रहा था राक्षस पुल को हानि न पहुंचाए, यह आशंका सदैव बनी हुई थी। पुल की सुरक्षा का उत्तरदायित्व हनुमान को सौंपा गया था। शनिदेव हनुमान के बल और कीर्ति को जानते थे।
उन्होंने पवनपुत्र को शरीरधारी पर ग्रहचाल की व्यवस्था के नियम को बताते हुए अपना आशय बताया। हनुमान ने कहा की वे प्रकुति के नियम का उल्लंघन नहीं करना चाहते, लेकिन राम-सेवा उनके लिए सर्वोपरि है। उनका आशय था कि राम काज होने के बाद वे शनिदेव को अपना पूरा शरीर समर्पित कर देंगे।

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Web Title-Why do people offer mustard oil to Lord Shani
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