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ऋषि चिंतन: सुघड़ व्यक्तित्व गढऩे की पाठशाला परिवार

Rishi Chintan: School for building a well-rounded personality Parivar - News in Hindi

शालीनता पुष्प वाटिका की तरह फैलती है। अपनी सुगंध और शोभा से दर्शकों का मन मोहती और वातावरण को सुगंध से भरती है, उसकी सर्वत्र सराहना होती है । इसके विपरीत हेय व्यक्ति के कण-कण में घुसी हुई निकृष्टता सर्वप्रथम अपने को अप्रमाणिक, अनगढ़ एवं घृणा-तिरस्कार का भाजन बनाती है । उसके उपरांत उसके साथी सहयोगी उस संस्कार छूत से प्रभावी होते हैं । कचरा जब सड़ता है तो विषाणु से सारे प्रभाव क्षेत्र में सडऩ- असहनीय दुर्गंध भरती है। परिवार कैसा बन पड़ा ? इसके संबंध में यही कहा जा सकता है कि जैसा कुछ उसे बनाया गया वैसा बन गया। कुंती और मदालसा ने अपने स्तर का प्रजनन और परिवार बना कर खड़ा कर दिया । परिवार बनाने में कोई बुद्धिमत्ता नहीं, यह कार्य तो क्षुद्र स्तर के प्राणी कीड़े-मकोड़े भी करते रहते हैं। मनुष्य की गरिमा यह है कि वह परिवार के साथ रहने की प्रवृत्ति-प्रेरणा को सार्थक बनाने, सीखने सिखाने का, ढलने ढालने का क्रम जारी रखें। सेवा का दृष्टिकोण तो विश्व व्यापक स्तर का रखा जा सकता है, पर उसे व्यवहार में चरितार्थ कर पाना अपने निकटवर्ती क्षेत्र में ही बन पड़ता है। परिवार एक ऐसी संस्था है, जो बालक के जन्मने से पूर्व ही उसे सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार रहती है। अपनी बहुमुखी उदारता से उसे बना-बढ़ाकर लाभान्वित करती है, स्नेह देने और सुधारने सिखाने में उसकी अपने ढंग की भूमिका रहती है। बड़े होने पर उस बालक का कर्तव्य हो जाता है कि जो अनुदान दिया गया है उसका प्रति दान देने की तैयारी करें और जब तक वह श्रृंखला पूरी तरह न बन पड़े तब तक नए उत्तरदायित्व अपने अपने ऊपर ओढऩे का दुस्साहस न करें। यह उऋणता मात्र भोजन वस्त्र जैसी सुविधाएंँ जुटा देने भर से पूरी नहीं हो जाती वरन यह अपेक्षा रखती है कि अधिक सुसंस्कृत बनकर अपने परिवार का सदस्य उस भावनात्मक विभूतियों से उन्हें लाभान्वित करें, जो सच्चे अर्थों में किसी को प्रामाणिक, प्रतिभावान और सुसंस्कृत बनाती है। परिवार की खदान भले कोयले जैसी रही हो पर उसमें से प्राणवान प्रतिभाओं को तो हीरा बन कर ही निकलना चाहिए। कीचड़ में कमल खिल सकते हैं, सीपियों में मोती बन सकते हैं तो कोई कारण नहीं है कि सामान्यतया अनगढ़ परिस्थितियों वाले परिवार में भी उच्च स्तरीय प्रतिभाएँ न जग सकें -इस सुयोग का बन पडऩा ही पारिवारिकता की उपलब्धि है।
उपरोक्त प्रवचन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक परिवार को सुव्यवस्थित कैसे बनाएँ? पृष्ठ-19 से लिया गया है।

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Web Title-Rishi Chintan: School for building a well-rounded personality Parivar
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