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बूंदी: स्थापत्य और ऐतिहासिकता के चलते पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है गजलक्ष्मी मंदिर

राजस्थान की सांस्कृतिक धरती पर बसे बूंदी को यूं ही ‘छोटी काशी’ नहीं कहा जाता। यह शहर न केवल स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासतों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी धार्मिक पहचान भी उतनी ही अनूठी और आकर्षक है। दीपावली जैसे पावन पर्व पर यह शहर भक्तिभाव, परंपरा और रोशनी से जगमगा उठता है। इसी शहर के नवलसागर तालाब के पास स्थित गजलक्ष्मी मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो भक्तों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। बूंदी का गजलक्ष्मी मंदिर न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थापत्य और पौराणिक कथाओं से जुड़ी अपनी विशिष्टता के कारण भी पर्यटन के मानचित्र पर विशेष स्थान रखता है। खास बात यह है कि गजलक्ष्मी का यह मंदिर राजस्थान में इकलौता है, और पूरे देश में भी ऐसा दूसरा मंदिर केवल कर्नाटक में पाया जाता है। ऐसे में यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि सांस्कृतिक पर्यटकों के लिए भी रोमांचक स्थल बन चुका है। दीपावली पर जब बूंदी दीपों से सराबोर होता है, तब गजलक्ष्मी मंदिर की विद्युत सज्जा और आकर्षक साज-सज्जा हर आंख को भाती है। मंदिर में दीयों की झिलमिलाहट जब देवी के मुखमंडल पर पड़ती है, तो एक अलौकिक अनुभूति का जन्म होता है, मानो स्वयं देवी गजलक्ष्मी आशीर्वाद दे रही हों। यह दृश्य मंदिर को केवल एक पूजास्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव बना देता है।
मंदिर के इतिहास की बात करें तो स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, यह मंदिर करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पुराना है। यहां देवी लक्ष्मी की जो प्रतिमा स्थित है, उसमें वे अपने सिर पर दोनों हाथ रखे हुए हैं और उनके दोनों ओर गज (हाथी) जल से उनका अभिषेक कर रहे हैं। प्रतिमा के बीच में बना श्रीयंत्र न केवल तांत्रिक मान्यताओं का प्रतीक है, बल्कि सृजन और ऊर्जा की धुरी भी मानी जाती है। यही विशेषताएं इस मंदिर को आध्यात्मिक और रहस्यमयी पर्यटन स्थल का दर्जा देती हैं।
गजलक्ष्मी के इस स्वरूप को ‘तोरणलक्ष्मी’ भी कहा जाता है, क्योंकि गजों की सूंड से बनी तोरण जैसी आकृति मंदिर में विद्यमान है। यह आकृति केवल स्थापत्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक भी बन चुकी है। मंदिर से जुड़ी एक और रोचक मान्यता यह भी है कि यह प्रतिमा आकाश से उड़ती हुई जा रही थी, जिसे एक तांत्रिक ने अपने मंत्रों से यहीं स्थिर कर दिया। तभी से यह प्रतिमा बूंदी में स्थित है और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है।
बूंदी का यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे राजस्थान के सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा पड़ाव माना जा सकता है। दीपावली जैसे पर्व पर यहां की धार्मिक गतिविधियां, पारंपरिक संगीत, सजावट और भक्ति का माहौल इसे एक अद्भुत अनुभव में बदल देते हैं, जिसे हर यात्रा प्रेमी और संस्कृति के जिज्ञासु को कम से कम एक बार अवश्य देखना चाहिए।
यदि आप भी इस दीपोत्सव के बाद अपने पर्यटन अनुभव में अध्यात्म और संस्कृति को जोड़ना चाहते हैं, तो बूंदी का गजलक्ष्मी मंदिर आपके लिए एक यादगार पड़ाव साबित हो सकता है।

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Web Title-Bundi: Gajalakshmi Temple attracts tourists due to its architecture and historicity
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