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चंबल की गोद में बसा भैंसरोडगढ़ किला, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम

Bhainsrorgarh Fort Where History Meets Nature - Entertainment News in Hindi

चंबल और ब्रह्माणी के बीच उगता इतिहास राजस्थान की धरती पर बसे किलों में भैंसरोडगढ़ किला अपनी भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण अलग पहचान रखता है। यह आकर्षक किला लगभग 200 फुट ऊँची सपाट पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जिसके तीन ओर चंबल और ब्रह्माणी नदियां बहती हैं। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह किला प्रकृति की गोद में सुरक्षित बैठा हुआ हो। उदयपुर से लगभग 235 किलोमीटर उत्तर-पूर्व और कोटा से करीब 50 किलोमीटर दक्षिण में स्थित यह दुर्ग आज भी अपनी गरिमा और ऐतिहासिक आभा को संजोए हुए है।

वह किला जिसे ब्रिटिश इतिहासकार भी अपनाना चाहते थे

भैंसरोडगढ़ किले की सुंदरता से केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी इतिहासकार भी प्रभावित हुए हैं। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स टॉड ने इस किले को देखकर कहा था कि यदि उन्हें राजस्थान में कहीं जागीर चुनने का अवसर मिले, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के भैंसरोडगढ़ को ही चुनेंगे। यह कथन इस बात का प्रमाण है कि यह किला केवल एक ऐतिहासिक संरचना नहीं, बल्कि सौंदर्य, सामरिक महत्व और शांति का अनोखा संगम है।

निर्माण और जागीर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार, भैंसरोडगढ़ किले का निर्माण सलूम्बर के रावत केसरी सिंह के पुत्र रावत लाल सिंह द्वितीय ने करवाया था। वर्ष 1783 ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने यह किला रावत लाल सिंह को जागीर के रूप में प्रदान किया था। हालांकि इसके वास्तविक निर्माण काल को लेकर स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी कई मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण दूसरी शताब्दी के आसपास माना जाता है। समय के साथ यह किला कई राजवंशों के अधीन रहा और प्रत्येक कालखंड ने इसकी संरचना और पहचान में कुछ न कुछ जोड़ा।
युद्ध, आक्रमण और टूटता वैभव
भैंसरोडगढ़ किले का इतिहास केवल शौर्य और समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संघर्ष और विनाश की कहानियां भी दर्ज हैं। ऐसी मान्यता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने भी इस किले पर आक्रमण किया था। इस दौरान किले के भीतर मौजूद कई प्राचीन मंदिरों और इमारतों को नष्ट कर दिया गया। समय की मार और युद्धों के कारण किले का मूल स्वरूप कई बार बदला, लेकिन इसके बावजूद इसकी आत्मा और ऐतिहासिक महत्व आज भी जीवित है।

प्रकृति और अरावली की गोद में बसा दुर्ग

भैंसरोडगढ़ किला केवल इतिहास प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। तीन ओर बहती नदियां, चारों तरफ फैली अरावली पर्वतमाला और घने जंगल इस किले को एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। यहां खड़े होकर चंबल नदी का शांत प्रवाह देखना और आसपास के जंगलों की हरियाली को महसूस करना, मन को अद्भुत शांति देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह किला और भी मनमोहक दिखाई देता है, जब आकाश के रंग और नदी का प्रतिबिंब एक साथ मिल जाते हैं।
आज का भैंसरोडगढ़: एक शाही हैरिटेज अनुभव
वर्तमान समय में भैंसरोडगढ़ किले को शाही परिवार द्वारा एक भव्य हैरिटेज होटल के रूप में संचालित किया जा रहा है। यहां ठहरने वाले पर्यटक न केवल इतिहास के बीच समय बिताते हैं, बल्कि राजसी जीवनशैली का अनुभव भी करते हैं। किले की पुरानी दीवारें, विशाल प्रांगण और नदी की ओर खुलते दृश्य, पर्यटकों को एक अलग ही युग में ले जाते हैं। यही कारण है कि देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी इस स्थान की ओर आकर्षित होते हैं।
क्यों जाएं भैंसरोडगढ़
भैंसरोडगढ़ किला उन लोगों के लिए आदर्श पर्यटन स्थल है, जो इतिहास, प्रकृति और शांति को एक साथ महसूस करना चाहते हैं। यह किला न केवल राजस्थान की समृद्ध विरासत का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समय के साथ बदलते दौर में कैसे एक ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखा जा सकता है। यहां आकर हर यात्री को यह एहसास होता है कि भैंसरोडगढ़ केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि महसूस करने का अनुभव है।

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Web Title-Bhainsrorgarh Fort Where History Meets Nature
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