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जयपुर के 7 प्रसिद्ध गणेश मंदिर: जहां हर दिन उमड़ता है भक्तों का सैलाब, जानें इनकी विशेष मान्यताएं और यात्रा गाइड

राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे प्यार से “छोटी काशी” कहा जाता है, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध शहर है। यहां भगवान गणेश के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर तो इन मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। जयपुर के सात प्रमुख गणेश मंदिर — मोती डूंगरी, गढ़ गणेश, नहर के गणेश, लाल डूंगरी, ध्वजाधीश गणेश, काले गणेश और परकोटा गणेश मंदिर — धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से बेहद खास माने जाते हैं। आइए जानते हैं इन मंदिरों की मान्यताओं के साथ-साथ यह भी कि वहां तक कैसे पहुंचा जाए और कब दर्शन किए जा सकते हैं। मोती डूंगरी वाले गणेश जी
जयपुर का सबसे प्रसिद्ध और आस्था का केंद्र मोती डूंगरी गणेश मंदिर शहर के बीचोंबीच स्थित है। हर बुधवार यहां भक्तों का मेला लगता है। माना जाता है कि जयपुर की स्थापना के 34 वर्ष बाद राजा माधो सिंह प्रथम ने मेवाड़ से गणेश जी की प्रतिमा जयपुर मंगवाई थी, जिसे बैलों की सग्गड़ में महीनों की यात्रा के बाद यहां स्थापित किया गया। शुरू में यह प्रतिमा रात्रि विश्राम के लिए मोती डूंगरी पर रखी गई थी, लेकिन बाद में यहीं पर स्थायी मंदिर बना।
कैसे पहुंचें: जयपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर दूरी पर, ऑटो या कैब से 15 मिनट में पहुंचा जा सकता है।
दर्शन समय: प्रातः 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक। बुधवार और गणेश चतुर्थी को विशेष आरती होती है।
लाल डूंगरी वाले गणेश जी

जयपुर के पुराने इलाके में स्थित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है। यहां गणेश जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है और दाहिनी सूंड वाली है, जो तंत्र शास्त्र में अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह प्रतिमा त्रिनेत्रधारी (तीन नेत्रों वाली) है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि लाल डूंगरी वाले गणेश जी की पूजा से जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं।
कैसे पहुंचें: हवा महल से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर।

दर्शन समय: सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक।
ध्वजाधीश गणेश जी

बड़ी चौपड़ के उत्तर-पश्चिम कोने में स्थित यह मंदिर जयपुर के सबसे पुराने गणेश मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि कभी इस मंदिर की ध्वजा (पताका) इतनी ऊंची थी कि वह मानक चौक के स्कूल तक पहुंचती थी। इसी कारण इसका नाम ध्वजाधीश गणेश जी पड़ा। यहां हर मंगलवार और बुधवार को भक्त बड़ी संख्या में आते हैं।
कैसे पहुंचें: चांदपोल बाजार से पैदल दूरी पर स्थित।

दर्शन समय: सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक।

गढ़ गणेश जी

जयपुर शहर के उत्तरी भाग में पहाड़ी पर स्थित गढ़ गणेश मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर की स्थापना के दौरान अश्वमेध यज्ञ के समय बनवाया था। यहां गणेश जी का विग्रह बाल स्वरूप में है और यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां गणेश जी बिना सूंड के विराजमान हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
कैसे पहुंचें: नाहरगढ़ किले के मार्ग पर, जयपुर सिटी पैलेस से करीब 3 किमी दूरी पर।

दर्शन समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक। रविवार को विशेष भीड़ रहती है।
नहर के गणेश जी

यह मंदिर ब्रह्मपुरी माउंट रोड पर स्थित है और लगभग 200 वर्ष पुराना है। यहां गणपति का विग्रह दक्षिणमुखी और दाहिनी सूंड वाला है, जो तंत्र विधान के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है। यहां आकर भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष पूजा करते हैं।

कैसे पहुंचें:
नाहरगढ़ रोड से आगे, ब्रह्मपुरी इलाके में मुख्य मार्ग पर स्थित।

दर्शन समय: सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक।
काले गणेश जी

जयपुर के बनीपार्क में मीरा मार्ग पार्क क्षेत्र में स्थित काले गणेश मंदिर का निर्माण वर्ष 1978 में कराया गया था। यहां गणेश जी की सवा फीट ऊंची काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है, जिसे दक्षिण भारत से मंगवाया गया था। इस मंदिर में हर बुधवार और गणेश चतुर्थी पर भक्तों का मेला लगता है।

कैसे पहुंचें:
सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर।

दर्शन समय:
सुबह 5:30 बजे से रात 9 बजे तक।

परकोटा गणेश जी

जयपुर के चांदपोल संजय सर्किल पर स्थित परकोटा गणेश मंदिर में गणेश जी बालस्वरूप में विराजमान हैं। स्थानीय लोग इन्हें बुजुर्ग वाले गणेश जी भी कहते हैं। यह मंदिर पुरानी बस्तियों में बसे लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।

कैसे पहुंचें:
चांदपोल मेट्रो स्टेशन से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर।
दर्शन समय: सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक।
जयपुर गणेश मंदिर यात्रा के लिए उपयोगी जानकारी
यात्रा का सर्वोत्तम समय
गणेश चतुर्थी (अगस्त-सितंबर) के समय इन मंदिरों में विशेष भव्य आयोजन होते हैं। इसके अलावा सर्दियों (अक्टूबर से फरवरी) में जयपुर घूमने और मंदिरों के दर्शन के लिए मौसम सबसे सुहावना रहता है।
कैसे पहुंचें:
जयपुर हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। शहर के भीतर ऑटो, ई-रिक्शा और कैब आसानी से उपलब्ध हैं।

विशेष आयोजन

गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और बुधवार के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाता है।

भक्तों के लिए सुझाव

दर्शन के लिए सुबह के समय या शाम की आरती से पहले पहुंचना उचित रहता है। त्यौहारों के दौरान भीड़ अत्यधिक होती है, इसलिए पहले से योजना बनाएं।

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Web Title-7 Famous Ganesh Temples of Jaipur: Legends, Significance, and Complete Travel Guide
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