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राजस्थान के 5 प्रमुख शिवधाम, जहां उमड़ता है आस्था का सैलाब

5 Major Shiva Temples of Rajasthan that Attract Huge Crowds - Entertainment News in Hindi

जुलाई से सितम्बर तक बारिश का मौसम होता है, शिवभक्तों में उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। बारिश की ठंडी फुहारें, हरियाली से लिपटी वादियां और मंदिरों में गूंजते ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे — यह सब मिलकर आस्था और सौंदर्य का अनूठा संगम रचते हैं। राजस्थान, जो अपने किलों, हवेलियों और रेगिस्तानी विस्तार के लिए प्रसिद्ध है, शिवभक्ति की भी एक सशक्त धरोहर संजोए हुए है। यहां के कई प्राचीन शिव मंदिर सावन में श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाते हैं, जहां मेले जैसी रौनक देखने को मिलती है। आइए जानते हैं ऐसे ही पांच प्रमुख शिवधामों के बारे में। 1. अचलेश्वर महादेव मंदिर, धौलपुर
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे धौलपुर के चंबल के बीहड़ों में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर एक अद्भुत धार्मिक स्थल है। यहां का शिवलिंग अपनी विशेषता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है — इसका रंग दिन में तीन बार बदलता है। सुबह यह लाल, दोपहर में केसरिया और शाम होते-होते सांवला हो जाता है। हजारों साल पुराना यह मंदिर भक्तों के लिए केवल पूजन का स्थान ही नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक भी है। सावन के दौरान यहां भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि पूरा इलाका शिवमय हो उठता है।
2. नालदेश्वर महादेव मंदिर, अलवर
अलवर शहर से करीब 24 किलोमीटर दूर पहाड़ियों और हरियाली से घिरे नालदेश्वर महादेव मंदिर का वातावरण मानो भक्तिभाव का जादू बिखेर देता है। यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग सालभर पूजा जाता है, लेकिन मानसून में इसकी छटा और निखर जाती है। पहली बारिश के बाद मंदिर के आसपास का नजारा मन मोह लेता है। सावन में यहां विशाल मेला लगता है, जहां हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।

3. घुश्मेश्वर महादेव मंदिर, सवाई माधोपुर

भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम स्थान रखने वाला घुश्मेश्वर महादेव मंदिर, सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ कस्बे में स्थित है। देवगिरी पर्वत पर बने इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है। यहां महाशिवरात्रि पर पांच दिनों तक भव्य मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग को स्वयं प्रकट माना जाता है। सावन में यहां का वातावरण अलौकिक और ऊर्जा से भरपूर होता है।

4. देव सोमनाथ मंदिर, डूंगरपुर

डूंगरपुर से 24 किलोमीटर दूर देवगांव में सोम नदी के किनारे स्थित देव सोमनाथ मंदिर वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। सफेद पत्थर से बने तीन मंजिला इस मंदिर को 150 खूबसूरत नक्काशीदार स्तंभ सहारा देते हैं। गर्भगृह में कृष्ण पाषाण का शिवलिंग स्थापित है और पीछे एक विशाल कुंड है, जो गर्भगृह से पत्थर की नाली द्वारा जुड़ा हुआ है। सावन के महीने में यहां जलाभिषेक और भजन-कीर्तन की ध्वनियां निरंतर गूंजती रहती हैं।
5. परशुराम महादेव मंदिर, पाली
राजसमंद और पाली की सीमा पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर एक रहस्यमय गुफा में बसा है। यहां पहुंचने के लिए लगभग 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मान्यता है कि यहीं भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने शिवजी की कठोर तपस्या की थी और उनसे धनुष, अक्षय तूणीर तथा दिव्य फरसा प्राप्त किया था। गुफा के भीतर स्थित स्वयंभू शिवलिंग के नीचे आज भी वह धूणी है, जिस पर परशुराम ने तप किया था। यहां एक शिला पर राक्षस की आकृति भी बनी हुई है, जिसे परशुराम ने अपने फरसे से मारा था। सावन में यह स्थान हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है।
आस्था और पर्यटन का संगम
इन मंदिरों की खासियत यह है कि ये केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व से भी भरपूर हैं। सावन में यहां की यात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि एक सांस्कृतिक और प्राकृतिक अनुभव भी कराती है। राजस्थान का यह शिवभक्ति सफर हर भक्त के जीवन में एक बार अवश्य होना चाहिए।

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Web Title-5 Major Shiva Temples of Rajasthan that Attract Huge Crowds
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