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शरणार्थी बच्चों की पढ़ाई पर संकट, 58 लाख स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर

 - World News in Hindi

विस्थापन की वजह से बेघर होने वाले शरणार्थी बच्चों के जीवन में शिक्षा, फिर से जीवन को पटरी लाने में मदद कर सकती है, लेकिन लाखों बच्चों के लिए ये अवसर भी उनकी पहुँच से दूर होता जा रहा है. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 60 लाख शरणार्थी बच्चे स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर थे. संगठन ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि सहायता धनराशि में कटौतियों की वजह से लाखों अन्य बच्चे भी कक्षाओं से वंचित हो सकते हैं और शरणार्थियों के लिए शिक्षा में प्रगति पलट सकती है. युद्धग्रस्त सूडान से पड़ोसी देश मिस्र में शरण लेने वाली 19 वर्षीय जमीला मुस्तफ़ा ने बताया कि “जब हमने सूडान छोड़ा, तो मुझे चिन्ता थी कि मेरी शिक्षा रुक जाएगी.”वह स्कूल जाने की आयु वाले 1.31 करोड़ शरणार्थी बच्चों में हैं और UNHCR के समर्थन से अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई कर रही हैं. उनकी कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) में विशेष दिलचस्पी है और वह युनिवर्सिटी में टैक्नॉलॉजी की पढ़ाई करना चाहती हैं. मगर, इनमें से लगभग आधी संख्या में बच्चे, 58 लाख स्कूलों से बाहर हैं. युद्ध, हिंसक टकराव, उत्पीड़न के कारण विस्थापित होने वाले इन बच्चों व किशोरों के लिए शिक्षा से दूर होना एक बड़ी चुनौती है. © UNICEF/Rawan Eleyan ग़ाज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी बच्चे यूनीसेफ़ द्वारा समर्थित एक अस्थाई शिक्षा केन्द्र में स्कूली गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं. बुनियादी कौशल से वंचितयूएन शरणार्थी एजेंसी के उच्चायुक्त, बरहम सालेह ने बताया कि मानवीय सहायता और विकास के लिए वित्तीय संसाधनों पर गहरा दबाव है. अब शिक्षा मद में कटौतियों के कारण युवाओं की एक पूरी पीढ़ी के लिए अवसर बन्द हो जाएंगे.प्राथमिक से माध्यमिक शिक्षा तक पहुँचने का सफ़र, शरणार्थी बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. 2025 में, 65 प्रतिशत बच्चे प्राथमिक स्तर पर पंजीकृत थे, लेकिन हाई स्कूल में यह आँकड़ा केवल 32 फ़ीसदी था.प्राथमिक स्कूलों में अक्सर युवा शरणार्थी बिना किसी तैयारी के पहुँचते हैं. हर तीन में से दो ने कक्षाओं की तैयारी के लिए बुनियादी पढ़ाई-लिखाई नहीं की है.माध्यमिक स्तर पर मुश्किलेंप्राथमिक स्कूलों में पंजीकरण के मामले में शरणार्थी लड़कियों और लड़कों में लगभग समान दर है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा में यह खाई चौड़ी हो जाती है. निर्धनता, जल्द शादी, सुरक्षा चिन्ताओं और अन्य दबावों की वजह से किशोरवय लड़कियों के स्कूली शिक्षा छोड़ने के मामले बढ़ रहे हैं. हालांकि, उच्चतर शिक्षा में प्रगति नज़र आ रही है, जोकि इस दिशा में निरन्तर निवेश की अहमियत को दर्शाती है. वर्ष 2025 में 4.5 लाख शरणार्थी छात्र युनिवर्सिटी स्तर की पढ़ाई कर रहे थे या फिर तकनीकी व वैकल्पिक रोज़गार के लिए प्रशिक्षण का हिस्सा थे. यह शरणार्थियों की युवा आबादी का रिकॉर्ड 11 फ़ीसदी हिस्सा है. यूएन शरणार्थी एजेंसी और साझेदार संगठनों का लक्ष्य, इस दशक के अन्त तक 15 फ़ीसदी शरणार्थी युवा आबादी को उच्चतर शिक्षा के दायरे तक पहुँचाना है. © ACNUR/Pierre-Marc René मेक्सिको के टेनोसिक़ में एक प्राथमिक विद्यालय में कम्पयुटर लैम्ब, जहाँ शरणार्थी बच्चे भी पढ़-लिख सकते हैं. बेहतर भविष्य के लिएUNHCR ने ज़ोर देकर कहा है कि शरणार्थियों के लिए शिक्षा में स्थिति को बेहतर बनाने का अर्थ है, राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्थाओं को मज़बूती दी जाए. शिक्षकों, कक्षाओं, पाठ्यक्रम सामग्री में निवेश किया जाए ताकि इसका लाभ शरणार्थी व मेज़बान समुदायों के बच्चों को मिल सके.कॉलेज शिक्षा के साथ-साथ, ज़रूरी कौशल, योग्यता, रोज़गार, वित्तीय आत्मनिर्भरता के ज़रिए भी शरणार्थी लड़कियों व महिलाओं के जीवन में सुधार लाया जा सकता है, हालांकि वहाँ अभी समान अवसरों कमी है. यूएन एजेंसी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय और विकास साझेदारों से शिक्षा में निवेश की रक्षा का आग्रह किया है और उन देशों की शिक्षा व्यवस्था के लिए समर्थन पर बल दिया है, जहाँ शरणार्थी रह रहे हैं.

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