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धन कटौती से, 83 लाख शरणार्थियों की जीवनरक्षक सहायता पर संकट

 - World News in Hindi

शरणार्थियों के लिए सहायता धनराशि में गहरी कटौतियों की वजह से एक नई चुनौती उपज रही है और लाखों लोगों की सुरक्षा व कल्याण के लिए ज़रूरी कार्यक्रमों पर अनिश्चितता के बादल छा रहे हैं. शरणार्थी मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में बताया है कि लगभग 83 लाख शरणार्थियों, जबरन विस्थापन का शिकार और राष्ट्रविहीन लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहायता को रोकने पर मजबूर होना पड़ सकता है. Tweet URL

वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत की वजह से, यूएन एजेंसी ने वर्ष 2025 में अपने कर्मचारियों में लगभग 33 फ़ीसदी की कटौती की थी, और 140 स्थानों पर अपने कार्यालयों को बन्द कर दिया था. मगर, धन कटौती की वजह से अब सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है.यूएन एजेंसी के पास 2024 में 5.2 अरब डॉलर की धनराशि उपलब्ध थी, जोकि 2025 में घटकर 3.9 अरब डॉलर तक पहुँच गई. गिरावट का यह रुझान जारी है और वर्ष 2026 में जुलाई के अन्त तक ज़रूरी 8.5 अरब डॉलर में से केवल 32 प्रतिशत का ही प्रबन्ध हो पाया है. वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत एक ऐसे समय में महसूस की जा रही है जब संरक्षण व समर्थन के लिए ज़रूरतमन्द लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रही है.यूएन एजेंसी में बाहरी मामलों के लिए निदेशक डॉमिनिक हाइड ने बताया कि जब शरणार्थियों के लिए पंजीकरण रुक जाते हैं, सुरक्षित घर बन्द हो जाते हैं और बाल संरक्षण सेवाएँ ग़ायब हो जाती हैं, तो हिंसा, शोषण व दुर्व्यवहार से जान बचाकर भागने वाले लोगों के लिए फिर से ये संकट उपजते हैं. रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि भोजन व आश्रय सेवाओं के विपरीत, संरक्षण सेवाओं को कम स्तर पर मुहैया नहीं कराया जा सकता है, चूँकि एक सीमा के बाद ऐसी व्यवस्था सिकुड़ती नहीं है बल्कि विफल हो जाती है.लाखों शरणार्थियों पर संकट © UNICEF/Omid Fazel ईरान की सीमा से लगी इस्लाम क़ला चौकी को पार करके अफ़ग़ान नागरिक, अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं.. यूएन एजेंसी के अध्ययन के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष 10 लाख से अधिक लोगों ने देश वापसी की है. पहले घर लौटने वाले हर व्यक्ति को 375 डॉलर की मदद दी जा रही थी, जिसे अब घटाकर प्रति घर-परिवार 170 डॉलर कर दिया गया है. समाज में फिर से घुलने-मिलने के लिए मिलने वाला अनुदान इस वर्ष केवल 175 घर-परिवारों को ही दिया गया है, जबकि 2024 में यह मदद पाने वाले परिवारों की संख्या 5,300 थी. वहीं, चाड में 3.19 लाख शरणार्थियों को अपने पंजीकरण में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनके पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं हैं और उन्हें हिरासत में लिए जाने का जोखिम है. 2 लाख महिलाओं व लड़कियों के पास सुरक्षित स्थान तक पहुँच नहीं है और 2.33 लाख बच्चों के लिए संरक्षण सेवाएँ समाप्त हो सकती हैं.इथियोपिया में, लिंग-आधारित हिंसा का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए सुरक्षित घरों की संख्या में 50 फ़ीसदी की कमी, 29 से घटकर 13, आई है. वहीं, कुछ इलाक़ों में बाल संरक्षण कवरेज में 85 प्रतिशत तक की गिरावट आई है.सूडान के दारफ़ूर और कोर्दोफ़ान में, यौन हिंसा के 50 हज़ार से अधिक पीड़ित जीवनरक्षक देखभाल से वंचित हो सकते हैं.सहायता में लचीलापन ज़रूरीयूएन एजेंसी के अनुसार, पिछले वर्ष अपने कार्यबल में कटौतियों और 100 से अधिक कार्यालय बन्द किए जाने के बाद, अब उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं.कुल बजट में से विशिष्ट परियोजनाओं के लिए मिलने वाली धनराशि की हिस्सेदारी, 2022 में 19 प्रतिशत थी, जोकि इस वर्ष बढ़कर 51 प्रतिशत हो गई है. इसे अन्य ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.यूएन एजेंसी ने बताया कि सहायता धनराशि में लचीलापन होने से, उन स्थानों तक मदद पहुँचाना आसान हो जाता है, जहां उनकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है. सुरक्षा और संरक्षण सम्बन्धी सेवाओं में अनिश्चितकाल के लिए कटौती नहीं की जा सकती, वरना व्यवस्थाएँ चरमरा जाएंगी.UNHCR ने दानदाताओं और साझेदारों से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि अब तक हासिल की गई प्रगति की रक्षा की जा सके.

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