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नेपाल बाढ़: 22 हज़ार बच्चे सुरक्षित पानी से वंचित

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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली नदी घाटी में आई अचानक बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी कम से कम 22 हज़ार बच्चों को सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई सहायता की तत्काल ज़रूरत है. प्रभावित ज़िलों में जल आपूर्ति व्यवस्था, शौचालय और अन्य स्वच्छता सुविधाएँ क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं. इससे जलजनित और अन्य संक्रामक बीमारियों का ख़तरा बढ़ गया है.नेपाल में UNICEF की प्रतिनिधि एलिस अकुंगा ने कहा, “इन ज़िलों में माता-पिता दिन भर इसी पशोपेश में रहते हैं कि पानी कहाँ से लाएँ और क्या वह उनके बच्चों के लिए सुरक्षित है?”भीड़-भरे हालातप्रभावित परिवार अब मेज़बान समुदायों या अस्थाई आश्रय केन्द्रों में रह रहे हैं, जहाँ भीड़भाड़ के कारण साफ़-सफ़ाई बनाए रखना मुश्किल हो रहा है.विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस सप्ताह चेतावनी दी कि बाढ़, विस्थापन, भीड़भाड़ और ठहरा हुआ पानी डेंगू और स्क्रब टाइफस जैसी संक्रामक बीमारियों का ख़तरा बढ़ा सकते हैं. Tweet URL

एलिस अकुंगा ने कहा, “इन हालात में जलजनित बीमारियों का ख़तरा तेज़ी से बढ़ता है. हालाँकि इन्हें रोका जा सकता है.”राहत सामग्री पहुँचीUNICEF ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित रसुवा और नुवाकोट ज़िलों में लगभग 19 हज़ार लोगों के लिए पानी, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई सम्बन्धी राहत सामग्री भेजी है.इसमें 3,800 से अधिक स्वच्छता किट, 3,300 मोड़कर रखे जा सकने वाले 10-लीटर पानी के कनस्तर, 3,500 बाल्टियाँ, 3,500 एक-लीटर के मग, जल शुद्धिकरण घोल की 4,000 बोतलें और 1,000 से अधिक तिरपाल शामिल हैं.UNICEF के कर्मचारी सरकारी एजेंसियों और साझीदारों के साथ मिलकर, बीमारियों की निगरानी, साफ़-सफ़ाई के प्रति जागरूकता और संक्रमण की रोकथाम पर भी काम कर रहे हैं.अहम ढाँचे क्षतिग्रस्तयह भीषण बाढ़ 27 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा पर हिमनद ढहने के बाद आई थी. अन्तरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में मृतकों की संख्या 1,100 के पार पहुँच चुकी है.सड़कों, पुलों, दूरसंचार नेटवर्क और जल आपूर्ति प्रणालियों को भारी नुक़सान पहुँचा है, जिससे प्रभावित समुदायों तक पहुँचना और राहत पहुँचाना मुश्किल हो गया है.UNICEF के अनुमान के मुताबिक़, कम से कम 19 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें आठ पूरी तरह और आठ आंशिक रूप से नष्ट हुए हैं. वहीं, 10 हज़ार से अधिक स्कूली बच्चों को तत्काल मनोसामाजिक सहायता और सुरक्षित शिक्षण स्थलों की ज़रूरत है.बच्चों पर गहरा असरनुवाकोट के 14 वर्षीय स्वास्तिक पौडेल ने हाल ही में UNICEF को बताया, “पहले मैं ज़्यादातर समय स्कूल में बिताता था और खाली समय में दोस्तों के साथ खेलता था. हम अक्सर फ़ुटबॉल खेला करते थे.”अब स्वास्तिक अपने माता-पिता और बहन के साथ एक आश्रय स्थल में रह रहा है, जहाँ वह अपनी पुरानी दिनचर्या से जुड़े रहने की कोशिश करता है.उसने कहा, “कुछ बच्चे यहाँ फ़ुटबॉल लाए हैं. उसमें छेद है, फिर भी हम उससे खेलते रहते हैं. कुछ दोस्त मैच भी खेलते हैं.”बेहतर पुनर्निर्माणजैसे-जैसे प्रभावित इलाक़ों तक पहुँच आसान होगी, UNICEF समुदायों और आश्रय स्थलों में आपातकालीन जल आपूर्ति और घरों में पानी शुद्ध करने की सुविधा बढ़ाएगा. साथ ही, जल गुणवत्ता की निगरानी, अस्थाई शौचालय और हाथ धोने की व्यवस्था, तथा स्वच्छता व माहवारी से जुड़ी ज़रूरी सामग्री की आपूर्ति भी बढ़ाई जाएगी.एलिस अकुंगा ने कहा कि सुरक्षित पानी और स्वच्छता व्यवस्था बहाल करना “कोई ऐसा काम नहीं है जो एक सप्ताह में पूरा हो जाए”. उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त जल प्रणालियों, पाइपों, पम्पों और शौचालयों की मरम्मत व पुनर्निर्माण इस तरह करना होगा कि वे भविष्य की बाढ़ का बेहतर सामना कर सकें.उन्होंने कहा, “हमें समुदायों को अधिक सुरक्षित और सहनसक्षम बनाना होगा. वरना अगली आपदा के बाद फिर यही हालात होंगे और एक बार फिर इसका ख़ामियाज़ा बच्चों को भुगतना पड़ेगा.”

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