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योरोप: उत्तरी क्षेत्रों में जंगल की आग का बढ़ता ख़तरा, अनुकूलन पर ज़ोर

 - World News in Hindi

जलवायु परिवर्तन के कारण योरोप में जंगल की आग का ख़तरा बढ़ रहा है. अब यह जोखिम उन देशों तक भी पहुँच रहा है, जो पारम्परिक रूप से ठंडे और अधिक वर्षा वाले रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि ये देश इससे निपटने की तैयारी कैसे कर सकते हैं? योरोप में जंगल की अधिकाँश आग मानवीय गतिविधियों के कारण लगती है. लेकिन आग कितनी तेज़ी से फैलेगी और कितनी भीषण होगी, यह बढ़ती गर्मी व सूखे पर निर्भर करता है, जो जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं. भूमि उपयोग के तरीक़ों में बदलाव भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं.योरोपीय वन अग्नि सूचना प्रणाली के अनुसार, 2026 के पहले आठ महीनों में योरोपीय संघ के देशों में 6 लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि जंगल की आग में जल चुकी है.हालाँकि यह आँकड़ा 2025 की इसी अवधि से कम है, जो अब तक जंगल की आग के लिहाज़ से सबसे ख़राब वर्ष था. फिर भी, यह पिछले 20 वर्षों के लगभग 2 लाख 80 हज़ार हैक्टेयर के औसत से कहीं अधिक है. यूएन एजेंसियों का कहना है कि बढ़ते जोखिम को देखते हुए पहले से तैयारी करना बेहद ज़रूरी है.बढ़ते जोखिमअब तक जंगल की अधिकाँश आग फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में लगी है, जहाँ पहले से ही इसका ख़तरा अधिक रहा है. लेकिन अत्यधिक सूखे के कारण ब्रिटेन, दक्षिणी स्कैंडिनेविया और पश्चिमी व मध्य योरोप के कई अन्य इलाक़ों में भी जंगल की आग का जोखिम बढ़ रहा है.प्रबल हो रहा अल-नीनो आने वाले समय में इस ख़तरे को और बढ़ा सकता है. यह एक प्राकृतिक जलवायु रुझान है, जो तापमान और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है और चरम मौसम की घटनाओं की सम्भावना बढ़ा सकता है.जिन देशों में पहले से जंगल की आग लगती रही है, वहाँ अब ऐसी घटनाएँ अधिक बार हो रही हैं, बड़े इलाक़ों में फैल रही हैं और अधिक समय तक जारी रहती हैं. वहीं, पारम्परिक रूप से ठंडे और अधिक वर्षा वाले देश भी अब जंगल की आग के बढ़ते ख़तरे से निपटने की तैयारी कर रहे हैं.स्कॉटलैंड के जलते जंगलजुलाई के मध्य में स्कॉटलैंड के कैरनगॉर्म्स पर्वतीय क्षेत्र में जंगल की आग भड़क उठी. इस इलाक़े में पहले भी आग लग चुकी है, लेकिन इस साल असाधारण सूखे के कारण आग ज़मीन के नीचे मौजूद सूखी पीट की परत तक पहुँच गई. इससे आग के कई हिस्से बार-बार भड़कते रहे और उसे क़ाबू करना मुश्किल हो गया.500 से अधिक अग्निशमनकर्मी आग बुझाने में जुटे रहे. हवाई मदद से भी आग बुझाने के प्रयास किए गए. साथ ही, आग को फैलने से रोकने के लिए बुलडोज़रों से ज़मीन के कुछ हिस्सों को साफ़ कर चौड़ी पट्टियाँ बनाई गईं, ताकि आग आगे न बढ़ सके.लेकिन तेज़ हवाओं के कारण आग नेथी ब्रिज गाँव की ओर बढ़ने लगी.निकासी के आदेशआग लगने के नौ दिन बाद, स्कॉटलैंड पुलिस ने इसे एक बड़ी आपात स्थिति घोषित किया और नेथी ब्रिज के 600 निवासियों में से कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया. इनमें जेम्स मैकइवान भी शामिल थे, जिन्होंने बताया कि बढ़ती आग के बीच कई दिनों तक बारिश न होने से चिन्ता बढ़ गई थी.उन्होंने कहा, “हम बहुत भाग्यशाली रहे कि हवा पश्चिम से चलती रही और आग पहाड़ियों की ओर बढ़ी. वरना सम्पत्ति और लोगों की जान को गम्भीर ख़तरा हो सकता था. लेकिन इससे आग ऐसे दुर्गम इलाक़े में पहुँच गई, जहाँ उसे क़ाबू करना बेहद मुश्किल था.”अग्निशमन दलों को आग पर क़ाबू पाने में एक महीने से भी ज़्यादा समय लगा, जिसके बाद स्कॉटलैंड अग्निशमन एवं बचाव सेवा ने उन्हें आधिकारिक रूप से वापस बुला लिया. © Climate Visuals/Alastair ब्रिटेन के झुलसे हुए खुले मैदानी इलाक़ों में जंगल की आग पर क़ाबू पाने की कोशिश करते अग्निशमनकर्मी. (फ़ाइल) भविष्य के लिए तैयारीब्रिटेन में जंगल की आग, पर्यावरण और समाज के लिए लीवरहल्म केन्द्र के शोधकर्ता विल हेज़ ने बताया कि जंगल की आग का ख़तरा अब भूमध्यसागरीय क्षेत्र से कहीं आगे तक फैल रहा है.उन्होंने बताया कि आयरलैंड और स्कॉटलैंड के ऊँचे अटलांटिक इलाक़ों के साथ-साथ उत्तरी एवं मध्य योरोप के अन्य हिस्सों में भी जंगल की आग को लेकर चिन्ता बढ़ रही है.विल हेज़ ने आगाह किया, “इन इलाक़ों की जलवायु भूमध्यसागरीय क्षेत्रों जैसी नहीं हो रही है. लेकिन पारम्परिक रूप से ठंडे और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अब ऐसे शुष्क दौर ज़्यादा बार आ रहे हैं, जब बड़ी मात्रा में वनस्पति इतनी सूख जाती है कि आसानी से आग पकड़ सकती है.”उन्होंने कहा, “लोगों को यह नहीं मानना चाहिए कि हरे-भरे या अधिक वर्षा वाले इलाक़े आग से पूरी तरह सुरक्षित हैं. गर्म, शुष्क एवं तेज़ हवा वाले मौसम में वनस्पति बहुत आसानी से जल सकती है, यहाँ तक कि उत्तरी और पर्वतीय क्षेत्रों में भी.”उन्होंने अधिक जोखिम वाले मौसम में कैम्पफायर और बारबेक्यू से बचने, सिगरेट जैसी चीज़ों से लापरवाही से आग न लगने देने और आग की स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी.जोखिम का आकलनविल हेज़ ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जंगल की आग से निपटने की तैयारी बेहद अहम है.उन्होंने कहा, “जंगल की आग की रोकथाम केवल अग्निशमन सेवाओं की ज़िम्मेदारी नहीं है. यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि आग लगने से पहले ज़मीन और वन क्षेत्रों का प्रबन्धन कैसे किया जाता है. जंगल की आग को केवल आपात स्थिति के रूप में नहीं, बल्कि भूमि उपयोग, जलवायु अनुकूलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम के रूप में भी देखा जाना चाहिए.”विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जोखिम आकलन के लिए रणनैतिक टूलकिट (STAR) पद्धति के ज़रिये सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी अन्य क्षेत्रों के साथ मिलकर स्वास्थ्य से जुड़े ख़तरों का तेज़ी से और साक्ष्यों के आधार पर आकलन कर सकते हैं. इनमें अत्यधिक गर्मी और जंगल की आग का जोखिम भी शामिल है.बेहतर तैयारीसाइप्रस और आयरलैंड जैसे देशों ने हाल ही में पहली बार ऐसी आकलन कार्यशालाएँ आयोजित कीं. इनमें STAR पद्धति का इस्तेमाल किया गया.इन कार्यशालाओं में तापलहरों से लेकर जंगल की आग तक, स्वास्थ्य के लिए अहम ख़तरों की पहचान की गई. साथ ही यह तय किया गया कि किन जोखिमों पर पहले ध्यान देना चाहिए.इन कार्यशालाओं से देशों को आपात स्थितियों के लिए बेहतर और अधिक रणनैतिक तैयारी करने में मदद मिलती है. साथ ही, ज़रूरी क्षेत्रों में निवेश की प्राथमिकताएँ तय करने में भी मदद मिलती है.WHO ने 2018 से अब तक योरोप में 38 राष्ट्रीय रणनैतिक जोखिम आकलन कार्यशालाएँ आयोजित की हैं. STAR पद्धति को अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (IHR) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेन्डाई फ़्रेमवर्क के प्रमुख तत्वों में शामिल किया गया है.बढ़ता सार्वजनिक स्वास्थ्य ख़तराWHO योरोप के स्वास्थ्य सुरक्षा प्रभाग में तैयारी कार्यक्रम की प्रबन्धक तान्या श्मिट ने कहा कि अत्यधिक गर्मी और जंगल की आग अब केवल पर्यावरणीय आपात स्थितियाँ नहीं रह गई हैं.उन्होंने कहा, “ये सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बढ़ते ख़तरे हैं. इनका सीधा असर लोगों की सेहत और स्वास्थ्य प्रणालियों, दोनों पर पड़ता है.”“पूरे क्षेत्र में देश अब सभी प्रकार के ख़तरों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जोखिम आकलन का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. इससे जलवायु से जुड़े जोखिमों और उनके एक के बाद एक पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद मिलती है. साथ ही, यह तय किया जा सकता है कि तैयारी के किन उपायों को प्राथमिकता दी जाए.अन्ततः, इससे समुदायों, विशेषकर सबसे संवेदनशील लोगों की सुरक्षा करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखने में मदद मिलती है.”WHO के जोखिम आकलन टूलकिट के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.

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