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सूडान: मानवाधिकार प्रमुख ने युद्धविराम की अपील दोहराई

 - World News in Hindi

सूडान में जारी युद्ध सोमवार को यूएन मानवाधिकार परिषद की चर्चा के केन्द्र में रहा. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने बाज़ारों, अस्पतालों और ईंधन स्टेशनों पर आम नागरिकों के ख़िलाफ़ हमले तुरन्त रोकने की अपील की. मुख्य बिन्दु Tweet URL

विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करने की अपील.लम्बी दूरी के ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल.दोनों पक्षों पर सम्भावित युद्ध अपराधों के आरोप.स्वास्थ्य सेवाओं को भारी नुक़सान.सूडान में युद्ध अब चौथे वर्ष में पहुँच चुका है. सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और अर्द्धसैनिक त्वरित समर्थन बल (RSF) के बीच जारी लड़ाई ने गम्भीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है. 60 लाख से अधिक लोग देश के भीतर विस्थापित हो चुके हैं, जबकि 45 लाख अन्य लोगों को सूडान की सीमाओं के पार शरण लेनी पड़ी है.यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने हिंसा समाप्त करने की अपील करते हुए कोर्दोफ़ान, ब्लू नाइल और उत्तरी व पश्चिमी दारफ़ूर में बिगड़ती स्थिति पर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर अभी भी “तात्कालिक” ख़तरा बना हुआ है.युद्धविराम की अपीलवोल्कर टर्क ने कहा, “तुरन्त युद्धविराम होना चाहिए, विदेशी हस्तक्षेप समाप्त होना चाहिए और समावेशी नागरिक शासन बहाल किया जाना चाहिए.”मानवाधिकार उच्चायुक्त की यह अपील, मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त वरिष्ठ स्वतंत्र जाँचकर्ताओं की सूडान युद्ध पर जारी नई रिपोर्ट के बाद आई है.रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों में आम नागरिकों के ख़िलाफ़ लम्बी दूरी के ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल शामिल है. साथ ही, आरोप है कि संयुक्त अरब अमीरात, चाड, दक्षिण-पूर्वी लीबिया और सोमालिया के पंटलैंड में मौजूद “व्यक्तियों और संस्थाओं” से अर्द्धसैनिक विद्रोही लड़ाकों को अहम सहायता मिल रही है.अक्टूबर 2023 में जिनीवा में परिषद द्वारा गठित सूडान के लिए तथ्य-खोजी मिशन के अध्यक्ष मोहमद ओथमान ने कहा, “सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और त्वरित समर्थन बल (RSF), दोनों लम्बी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. इसके कारण हमले अब पारम्परिक मोर्चों से बहुत दूर तक पहुँच रहे हैं.”उन्होंने कहा कि ड्रोन हमलों में आम नागरिक अपने घरों, स्कूलों, अस्पतालों, बाज़ारों, विस्थापन स्थलों और शरण स्थलों पर घायल हुए हैं और मारे गए हैं. शादियों, अन्तिम संस्कारों और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल लोग भी इन हमलों की चपेट में आए हैं.इसके बाद उन्होंने उत्तरी कोर्दोफ़ान के ऐल ओबेद शहर की स्थिति का ज़िक्र किया, जहाँ शहर तक पहुँच को लेकर दोनों पक्षों के बीच भारी टकराव जारी है. मानवाधिकार जाँचकर्ता ने चेतावनी दी कि RSF के बार-बार किए गए ड्रोन हमलों से पानी, ऊर्जा और अन्य अहम नागरिक बुनियादी ढाँचे प्रभावित हुए हैं.उन्होंने कहा, “ये हमले दिखाते हैं कि ख़तरा अब भी बेहद गम्भीर है. आम नागरिक लगातार हवाई हमलों और विस्थापन का सामना कर रहे हैं, जबकि पहले से दबाव झेल रही आवश्यक सेवाओं पर बोझ और बढ़ रहा है.” ऐल ओबेद शहर RSF की आंशिक घेराबन्दी में है.तथ्य-खोजी मिशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों पक्षों ने आम नागरिकों पर हमले किए हैं.इनमें दक्षिण कोर्दोफ़ान के कालोगी में एक बालवाड़ी और अस्पताल पर RSF के ‘लगातार हुए’ ड्रोन हमले शामिल हैं, जिनमें 60 बच्चों समेत 114 लोगों की मौत हुई. वहीं, अद-दाएन शिक्षण अस्पताल पर SAF के हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए.मोहमद ओथमान ने परिषद को बताया, “एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर हमें यह मानने के उचित आधार मिले हैं कि SAF और RSF, दोनों ने मानवाधिकारों और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन किया है. ये उल्लंघन युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं.”स्वास्थ्य सेवाओं को भारी नुक़सानख़ारतूम से मिली एक अलग जानकारी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को बताया कि राजधानी के तीन प्रमुख अस्पतालों को जिस तरह भारी नुक़सान पहुँचा है, वैसी ही स्थिति देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रही है.हिंसक टकराव से पहले ख़ारतूम शिक्षण अस्पताल, नेत्र अस्पताल और दन्त अस्पताल प्रमुख रेफ़रल और शिक्षण अस्पताल थे. अब उनकी इमारतों और चिकित्सा उपकरणों को भारी नुक़सान पहुँच चुका है.सूडान में WHO के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दिनासिर अबुबकर ने कहा, “ऑपरेशन थिएटर नष्ट हो चुके हैं, इमेजिंग उपकरण बर्बाद हो गए हैं और कई वार्ड ढह गए हैं. अस्पतालों के पूरे ब्लॉक और विभाग बन्द पड़े हैं. मरीज़ों को सुरक्षित रूप से भर्ती करने से पहले इमारतों की तत्काल मरम्मत ज़रूरी है.”डॉक्टर अब्दिनासिर अबुबकर ने अस्पतालों को हुए भारी नुक़सान की मरम्मत के लिए सहायता की अपील की. उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अस्पताल कर्मचारी अब भी काम कर रहे हैं और इमारतों के जो हिस्से इस्तेमाल के लायक बचे हैं, वहीं मरीज़ों का इलाज किया जा रहा है.

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