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जलवायु संकट से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई की दरकार

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि रिकॉर्ड गर्मी, जानलेवा बाढ़ और चरम मौसम की घटनाएँ दुनिया को गहराते जलवायु संकट की चेतावनी दे रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापमान जल्द ही सुरक्षित सीमा को पार कर सकता है, लेकिन तेज़ और निर्णायक जलवायु कार्रवाई से अब भी विनाशकारी नतीजों को टाला जा सकता है. मुख्य बिन्दुवैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए तेज़ और सामूहिक कार्रवाई ज़रूरी है.मीथेन उत्सर्जन में कटौती, भूमि, वनों एवं महासागरों की रक्षा और जीवाश्म ईंधनों से तेज़ी से दूरी बनाकर मौजूदा रुझान को बदला जा सकता है.तापमान में हर अतिरिक्त बढ़ोत्तरी से जान-माल का नुक़सान बढ़ेगा, आजीविकाएँ प्रभावित होंगी, असमानता गहराएगी और पारिस्थितिकी तंत्रों को स्थाई क्षति का ख़तरा बढ़ेगा.संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि हाल के महीनों में उत्तरी गोलार्द्ध में भीषण गर्मी, जंगल की आग और जानलेवा बाढ़ ने आने वाले जलवायु ख़तरों की चेतावनी दी है.उन्होंने याद दिलाया कि जलवायु परिवर्तन पर ऐतिहासिक 2015 पेरिस समझौते के तहत विश्व नेताओं ने, वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C तक सीमित रखने का संकल्प लिया था. वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के सबसे विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए इस सीमा के भीतर रहना बेहद अहम है.लेकिन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया इस लक्ष्य से भटक रही है.महासचिव ने कहा, “1.5 डिग्री के लिए लड़ाई, मानवता के लिए लड़ाई है.”उन्होंने आगाह किया, “अगले कुछ वर्षों में ही वैश्विक तापमान 1.5°C की सीमा को पार कर सकता है.”‘हर अंश की बढ़ोत्तरी जानलेवा’संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की प्रमुख इन्गेर ऐंडरसन ने आगाह किया कि यदि वैश्विक तापमान लगातार 1.5°C से ऊपर बना रहता है, तो इसके गम्भीर नतीजे होंगे.उन्होंने कहा, “दुनिया भर में चरम तापलहरें पहले ही स्पष्ट कर रही हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अधिक तेज़, गम्भीर और लम्बे समय तक रहने वाले होंगे. इससे अधिक लोगों की जान जाएगी और जनजीवन पर गहरा असर पड़ेगा.”उन्होंने कहा, “अब जलवायु कार्रवाई तेज़ करने का समय है. हम सही राह पर लौट सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा. इसके लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती, जलवायु सहनसक्षमता और अनुकूलन को मज़बूत करना तथा यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि तापमान 1.5°C की सीमा से जितना सम्भव हो, उतना कम और कम समय के लिए ही ऊपर रहे.” संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इससे सहमति जताई.उन्होंने कहा, “तापमान में हर छोटे से छोटे अंश की बढ़ोत्तरी जानलेवा होगी, आजीविकाओं पर असर डालेगी, असमानता गहराएगी व पारिस्थितिकी तंत्रों को अपरिवर्तनीय क्षति के और क़रीब ले जाएगी.”महासचिव ने आगाह किया, “मानवता जलवायु तबाही से बचने की सीमा को तेज़ी से पार करती जा रही है.” Tweet URL

‘समाधान मौजूद हैं’महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि तेज़ जलवायु कार्रवाई से दुनिया को अब भी तबाही के कगार से वापस लाया जा सकता है.उन्होंने कहा, “हम इस सदी के अन्त तक तापमान वृद्धि को फिर 1.5°C से नीचे ला सकते हैं. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तापमान 1.5°C से जितना सम्भव हो, उतना कम और कम समय के लिए ही ऊपर रहे.”इसके लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ानी होंगी - जीवाश्म ईंधनों को चरणबद्ध ढंग से समाप्त करने और नवीकरणीय ऊर्जा की रफ़्तार तेज़ करने, मीथेन प्रदूषण में भारी कटौती करने तथा भूमि, वनों व महासागरों की रक्षा करने की ज़रूरत होगी.उन्होंने कहा कि सरकारों को राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं और नैट-ज़ीरो उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं से भी आगे बढ़कर काम करना होगा. विकसित देशों को अनुकूलन वित्त तीन गुना करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सहायता सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुँचे.महासचिव ने कहा, “विज्ञान स्पष्ट है. समाधान हमारे पास हैं और दुनिया उन्हें लागू करने के लिए पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है. अब महत्वाकाँक्षा बढ़ाने और कार्रवाई तेज़ करने का समय है.”नवीनतम रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:तापमान 1.5°C से ऊपर जाने पर, हर अतिरिक्त बढ़ोत्तरी व हर बीतते वर्ष के साथ जलवायु जोखिम और गम्भीर होंगे. इनमें चरम मौसम, पारिस्थितिकी तंत्रों का नुक़सान, छोटे द्वीपीय देशों एवं निचले तटीय शहरों के डूबने का ख़तरा तथा मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जल आपूर्ति, बुनियादी ढाँचे और अर्थव्यवस्था पर गम्भीर असर शामिल हैं.तापमान जितना अधिक और जितने लम्बे समय तक ऊँचा रहेगा, अपरिवर्तनीय बदलावों का ख़तरा उतना ही बढ़ेगा. इनमें विशाल हिमचादरों का अस्थिर होना और अमेज़ॉन वर्षावन का क्षरण शामिल है.उत्सर्जन में कटौती व जलवायु अनुकूलन को साथ-साथ आगे बढ़ाना होगा, और प्रकृति-आधारित शीतलन जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी होगी.ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगातार कटौती करते हुए नैट-ज़ीरो से आगे, नैट-नैगेटिव उत्सर्जन की दिशा में बढ़ना होगा.सफलता के लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति, बहुपक्षीय सहयोग, प्रभावी नीतियाँ, समावेशी शासन और पर्याप्त वित्तीय सहायता ज़रूरी हैं.जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक ज़िम्मेदार देशों को सबसे तेज़ और सबसे महत्वाकाँक्षी कार्रवाई करनी होगी. © Unsplash/Ratio EV Charging इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन.

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