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सूडान: 2 लाख बच्चों की शिक्षा के लिए 2.2 करोड़ डॉलर की पहल

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक शिक्षा कोष ने सोमवार को सूडान में युद्ध से प्रभावित 2 लाख बच्चों की पढ़ाई में मदद के लिए 2.2 करोड़ डॉलर की नई पहल की घोषणा की. देश में जारी गृहयुद्ध के कारण लाखों बच्चों की शिक्षा बाधित है और बड़ी संख्या में बच्चे अब भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इस सहायता से सूडान के पश्चिम दारफ़ूर, दक्षिण कोर्दोफ़ान और गेदारेफ़ प्रान्तों के बच्चों को लाभ मिलेगा. दुनिया के सबसे बड़े मानवीय और विस्थापन संकट के बीच, पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए “सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा” बहाल करना है.संयुक्त राष्ट्र कोष ‘शिक्षा इन्तज़ार नहीं कर सकती’ (Education Cannot Wait) यानि ECW की निदेशक मायसा जलबाउत ने कहा कि शिक्षा, संकट से प्रभावित लाखों बच्चों की सुरक्षा और उन्हें उबरने में मदद करने का एक अहम ज़रिया है. Tweet URL

उन्होंने कहा, “यह निवेश केवल कक्षाएँ दोबारा खोलने के लिए नहीं है. इसका मक़सद बच्चों में सुरक्षा एवं सामान्य जीवन का अहसास लौटाना, साथ ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करना है जो संकट के दौरान और उसके बाद भी समुदायों की ज़रूरतें पूरी कर सके.”गम्भीर मानवीय संकटअप्रैल 2023 में सूडान में प्रतिद्वन्द्वी सैन्य गुटों के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से 1.4 करोड़ लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं. देश में अब 3.37 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है.Education Cannot Wait ने नई बहुवर्षीय पहल की घोषणा करते हुए कहा कि सूडान में कम से कम 80 लाख बच्चे अब भी स्कूल नहीं जा रहे हैं. यह देश के लगभग 1.7 करोड़ स्कूली उम्र के बच्चों का लगभग आधा हिस्सा है.संगठन ने कहा, “देश भर में बड़ी संख्या में स्कूल अब भी बन्द हैं और लाखों बच्चों की पढ़ाई लम्बे समय से बाधित है. कुछ बच्चे लगभग 500 दिनों की पढ़ाई से वंचित रहे हैं.”तीन वर्षों का यह कार्यक्रम सूडान के सबसे अधिक वंचित बच्चों तक पहुँचेगा. इनमें आन्तरिक रूप से विस्थापित बच्चे, शरणार्थी तथा कमज़ोर तबक़े के मेज़बान समुदाय शामिल हैं. लाभार्थियों में कम से कम 60 प्रतिशत लड़कियाँ और 10 प्रतिशत विकलांग बच्चे होंगे.इस पहल के तहत बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे, मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता दी जाएगी, शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और शिक्षण सामग्री तक पहुँच बेहतर बनाई जाएगी. साथ ही, लड़कियों और विकलांग बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर भी काम होगा.Save the Children इस कार्यक्रम का नेतृत्व करेगा. Plan International, लाकरमिशनेन इंटरनैशनल (LM International) और स्थानीय साझीदार AORD तथा सदागात इसमें सहयोग करेंगे.संयुक्त राष्ट्र बाल कोष UNICEF के अनुसार, दारफ़ूर में 81 प्रतिशत स्कूल अब भी बन्द हैं और 70 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. वहीं, 5.8 प्रतिशत स्कूलों का इस्तेमाल आश्रय स्थलों के रूप में हो रहा है. UNICEF ने यह भी बताया कि इस वर्ष स्कूलों पर सीधे हमले हुए हैं.दुनिया भर में बढ़ती ज़रूरत‘शिक्षा इन्तज़ार नहीं कर सकती’ (Education Cannot Wait) संगठन के अनुसार, दुनिया भर के संकटग्रस्त क्षेत्रों में 25.8 करोड़ स्कूली उम्र के बच्चों और किशोरों की पढ़ाई बाधित है. इनमें से 9.3 करोड़ बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे हैं.संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक शिक्षा कोष की हाल में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, संकट या हिंसक टकरावों के कारण स्कूल से बाहर रहने वाले लगभग 80 प्रतिशत बच्चे केवल 20 देशों से हैं.इसका सबसे अधिक असर अक्सर पहले से वंचित समूहों पर पड़ता है, ख़ासतौर पर लड़कियों, विस्थापित बच्चों और विकलांग बच्चों पर.सूडान के लिए यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब संयुक्त राष्ट्र वैश्विक शिक्षा कोष (Education Cannot Wait) ने ‘उम्मीद यहीं से शुरु होती है’ (Hope Starts Here) नामक वैश्विक अभियान शुरू किया है. इसका लक्ष्य 60 करोड़ डॉलर जुटाकर दुनिया के सबसे गम्भीर संकटों से प्रभावित एक करोड़ बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है.

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