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इबोला के 100 दिन: संक्रमण पर क़ाबू पाने की जद्दोजहद

 - World News in Hindi

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में बुंडिबुग्यो इबोला प्रकोप की घोषणा को 100 दिन हो चुके हैं और महामारी अभूतपूर्व स्तर पर फैल रही है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को चेतावनी दी कि देश के पूर्वी हिस्सों व सीमाओं के पार संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए प्रयास और तेज़ करने होंगे. मुख्य बिन्दुविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पहले तीन महीनों में हर दिन औसतन क़रीब 90 पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जो डीआरसी में 2018-2020 के प्रकोप की दर से कहीं ज़्यादा है.ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, अब तक 5,515 मामले और 2,642 मौतें दर्ज की गई हैं, यानि मृत्यु दर लगभग 48 प्रतिशत है.प्रकोप अब छह प्रान्तों तक फैल चुका है. इतुरी इसका केन्द्र बना हुआ है, जहाँ क़रीब 85 प्रतिशत मामले और 79 प्रतिशत मौतें दर्ज की गई हैं.पूर्वी डीआरसी में सशस्त्र गुटों के बीच जारी हिंसक टकराव, उससे जुड़ा विस्थापन और बढ़ती भूख के बीच, WHO ने इबोला से निपटने के प्रयास और तेज़ करने का आहवान किया है.WHO प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “हम इबोला प्रकोप पर क़ाबू पा सकते हैं, लेकिन इसके लिए प्रभावित समुदायों में कार्रवाई बड़े पैमाने पर बढ़ानी होगी.”उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि कार्रवाई का नेतृत्व राष्ट्रीय और स्थानीय प्रशासन के हाथ में होना चाहिए, उन्हें ज़रूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ और साझीदारों का मज़बूत सहयोग मिले.‘असाधारण’ प्रगतिपिछले 100 दिनों में इबोला से निपटने की कार्रवाई का दायरा और क्षमता काफ़ी बढ़ी है. शुरुआत में जाँच की सुविधा केवल एक केन्द्र पर थी, लेकिन अब 19 प्रयोगशालाओं में हर दिन 3,000 से अधिक नमूनों की जाँच की जा सकती है.उपचार क्षमता भी 10 से कम बिस्तरों से बढ़कर 1,300 से अधिक बिस्तरों तक पहुँच गई है. सामुदायिक जागरूकता अभियानों के ज़रिए 25 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचा गया है. वहीं, संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी की दर पहले सप्ताह में नौ प्रतिशत थी, जो 18 अगस्त तक बढ़कर 84 प्रतिशत हो गई.वैज्ञानिक स्तर पर भी प्रयास तेज़ हुए हैं. सम्भावित उपचारों के नैदानिक परीक्षण और वैक्सीन उम्मीदवारों का मूल्यांकन जारी है. साथ ही, बुंडिबुग्यो वायरस की पहचान के लिए पहली आणविक जाँच शुरू की गई है.अफ़्रीका में WHO की आपात प्रतिक्रिया के लिए क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मैरी रोज़लीन बेलिज़ेयर ने यूएन न्यूज़ से कहा, “यह असाधारण प्रगति है,” लेकिन महामारी को ख़त्म करने और वायरस का फैलाव रोकने के लिए यह अभी भी नाकाफ़ी है.60 प्रतिशत मौतें उपचार केन्द्रों के बाहर Tweet URL

असुरक्षा, विस्थापन, स्वास्थ्य केन्द्रों पर हमले और इलाज तक पहुँच में मुश्किलें, इबोला से निपटने के प्रयासों में लगातार बाधा बन रही हैं.समुदायों और इलाज करा रहे मरीज़ों, दोनों में मृत्यु दर अब भी ऊँची है. पिछले छह हफ़्तों में हर सप्ताह दर्ज की गई क़रीब 260 मौतों में से लगभग 60 प्रतिशत इबोला उपचार केन्द्रों के बाहर हुईं.WHO के अनुसार, इससे पता चलता है कि मामलों की जल्द पहचान करने, मरीज़ों को समय पर स्वास्थ्य केन्द्र पहुँचाने और उनका इलाज सुनिश्चित करने में अब भी बड़ी चुनौतियाँ हैं.एजेंसी ने ज़ोर दिया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वायरस के फैलाव के तरीक़ों और मौजूद कमियों के अनुसार कार्रवाई को बेहतर ढंग से ढालना होगा. जिन क्षेत्रों में संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है, वहाँ टीमों की मौजूदगी बढ़ानी होगी और उच्च जोखिम वाले इलाक़ों में मामले सामने आने से पहले ही पूरी तैयारी करनी होगी.‘लोग भूखे हैं’इबोला का प्रकोप ऐसे समय फैल रहा है, जब लोग पहले से ही भूख, कुपोषण और सुरक्षित पेयजल की कमी जैसी मानवीय समस्याओं से जूझ रहे हैं.डॉक्टर मैरी रोज़लीन बेलिज़ेयर ने कहा, “लोग भूखे हैं; उन्हें भोजन और पानी चाहिए. इबोला से निपटने के प्रयासों के साथ-साथ मानवीय सहायता भी पहुँचानी होगी.”उन्होंने कहा कि आने वाले हफ़्तों में सबसे बड़ी चुनौती प्रकोप से एक क़दम आगे रहने की है. इसके लिए पाँच प्राथमिकताएँ तय की गई हैं:समुदायों की भूमिका मज़बूत करना.निगरानी और संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए व्यक्तियों की पहचान की दर बढ़ाकर 95 प्रतिशत करना.इलाज तक पहुँच तेज़ करना और उपचार क्षमता बढ़ाकर 3,000 बिस्तर करना.स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मज़बूत करना; अब तक 155 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं और 50 की मौत हो चुकी है.सीमापार तैयारियों को मज़बूत करना.दक्षिण सूडान में सीमापार प्रयाससंयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, दक्षिण सूडान में फ़िलहाल इबोला का कोई मामला नहीं है, लेकिन डीआरसी से लोगों की लगातार आवाजाही के कारण संक्रमण फैलने का ख़तरा बना हुआ है.यूएन एजेंसियाँ और साझीदार रोकथाम के प्रयास कर रहे हैं. इनमें निगरानी, प्रवेश बिन्दुओं पर जाँच, स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति और रेडियो व सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को जागरूक करना शामिल है.दक्षिण सूडान के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवीय समन्वयक रामानाथन बालाकृष्णन ने राहतकर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. दक्षिण-पश्चिमी दक्षिण सूडान में चार राहतकर्मियों का अज्ञात हथियारबन्द लोगों ने उस समय अपहरण कर लिया, जब वे इबोला से निपटने के लिए ज़रूरी सामग्री सीमावर्ती शहर लिबोगो ले जा रहे थे.इस बीच, अफ़्रीका के लिए WHO के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मोहम्मद जनाबी ने चेतावनी देते हुए कहा, “आज लिए गए हमारे फ़ैसले तय करेंगे कि हम इस प्रकोप पर कितनी जल्दी क़ाबू पा सकेंगे और ज़िन्दगियाँ बचा सकेंगे.”संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई WHO ने 260 से अधिक विशेषज्ञ तैनात किए हैं, 330 टन से अधिक ज़रूरी चिकित्सा और सहायता सामग्री पहुँचाई है और आपात कार्रवाई के लिए 56 लाख डॉलर आवंटित किए हैं.संयुक्त राष्ट्र की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी, UNFPA, स्वास्थ्य केन्द्रों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण में सहयोग दे रही है. साथ ही, एजेंसी समुदायों में जागरूकता बढ़ाने, ग़लत जानकारी से निपटने और गर्भवती महिलाओं व लैंगिक हिंसा से बची महिलाओं को जाँच तथा ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच दिलाने में मदद कर रही है.विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) यूएन मानवतावादी वायु सेवा (UNHAS) के ज़रिए आपात सहायता पहुँचाने और मरीज़ों को इलाज के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने में मदद कर रहा है.डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र के आपात प्रयासों के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.

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