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अफ़ग़ानिस्तान: 10 लाख बच्चे जानलेवा कुपोषण की चपेट में

 - World News in Hindi

अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 37 लाख बच्चे अत्यधिक दुबलेपन (wasting) से पीड़ित हैं, जो कुपोषण के सबसे ख़तरनाक रूपों में से एक है. इनमें लगभग 10 लाख बच्चे जानलेवा स्तर के तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं. पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिलने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है और वे आम संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं.संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को बताया कि गम्भीर तीव्र कुपोषण के 83 प्रतिशत मामले दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हैं.अस्पतालों पर बढ़ता दबावयूनीसेफ़ ने चेतावनी दी है कि कुपोषित बच्चों की बढ़ती संख्या से अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ रहा है.दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों में हर उपलब्ध बिस्तर के लिए गम्भीर कुपोषण से पीड़ित तीन से चार बच्चे अस्पताल पहुँच रहे हैं.चिकित्सीय जटिलताओं के साथ भर्ती होने वाले गम्भीर तीव्र कुपोषण के मामले पिछले वर्ष की तुलना में एक-तिहाई बढ़े हैं. जुलाई 2025 में ऐसे 6,000 मामले थे, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 8,000 हो गए.एक साथ कई संकट Tweet URL

अफ़ग़ानिस्तान में कुपोषण बढ़ने के पीछे पर्यावरणीय और राजनैतिक, दोनों तरह के संकट हैं.देश लगातार कई वर्षों से सूखे का सामना कर रहा है, जिसके बाद भारी बारिश व अचानक आई बाढ़ ने हालात और बिगाड़ दिए. इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर के मज़बूत अल-नीनो से चरम मौसम के और बढ़ने की आशंका है.वहीं, क्षेत्रीय अस्थिरता से सीमा-पार व्यापार प्रभावित हुआ है. 2023 से अब तक 60 लाख से अधिक लोगों की देश वापसी से पहले से दबाव झेल रहे रोज़गार बाज़ार एवं आवास व स्वास्थ्य जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर बोझ और बढ़ गया है.यूनीसेफ़ के अनुसार, इन परिस्थितियों में कई परिवार बच्चों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं दे पा रहे हैं. भोजन की मात्रा और उपलब्धता, दोनों घटी हैं तथा पोषण में विविधता भी कम हुई है.एजेंसी ने हाल में जारी एक रिपोर्ट में बताया कि छह महीने की उम्र में किसी बच्चे का पहला भोजन कभी-कभी चाय के साथ रोटी या पानी मिली दही तक सीमित होता है.देखभाल सेवाएँकुपोषण का इलाज सम्भव है और समय पर उपचार से बच्चों की जान बचाई जा सकती है.अफ़ग़ानिस्तान में UNICEF के प्रतिनिधि डॉक्टर ताजुद्दीन ओयेवाले ने पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के एक अस्पताल में नौ महीने की बच्ची सगीदा से मुलाक़ात का ज़िक्र किया.सगीदा पड़ोसी प्रान्त के एक दूरदराज़ गाँव की रहने वाली है, जहाँ हाल ही में भीषण बाढ़ आई थी. यूनीसेफ़ के एक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी ने उसे गम्भीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित पाया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा.ताजुद्दीन ओयेवाले ने बताया, “जब सगीदा को अस्पताल में भर्ती किया गया, तो डॉक्टरों को उसके बचने की बहुत कम उम्मीद थी. उसका वज़न केवल 4 किलोग्राम था. लेकिन चिकित्सीय दूध मिलने के बाद अब उसकी हालत स्थिर है.”समय पर सहायता, कम लागतयूनीसेफ़ के अनुसार, मानवीय सहायता में कटौती के कारण 2025 की तुलना में इस वर्ष गम्भीर दुबलेपन (severe wasting) से पीड़ित बच्चों का इलाज करने वाले 100 से अधिक केन्द्र बन्द हो चुके हैं, जिससे बाक़ी केन्द्रों पर दबाव और बढ़ गया है.एजेंसी के पोषण कार्यक्रम को इस वर्ष आवश्यक 18 करोड़ डॉलर में से अब तक केवल 22 प्रतिशत धन मिला है.ताजुद्दीन ओयेवाले ने कहा, “हमें तब तक इन्तज़ार नहीं करना चाहिए जब कोई बच्चा बेहद दुबला होकर अस्पताल न पहुँच जाए. समय पर मदद से न केवल जान बचती है, बल्कि यह गम्भीर कुपोषण के जीवनरक्षक इलाज की तुलना में कहीं अधिक किफ़ायती भी है.”

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