• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

सहायता कटौती से 10 लाख महिलाएँ और लड़कियाँ जीवनरक्षक मदद से वंचित

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र की लैंगिक समानता संस्था, UN Women ने शुक्रवार को कहा कि सहायता में अभूतपूर्व कटौती के कारण संकटग्रस्त क्षेत्रों में काम करने वाले महिला संगठन बन्द होने की कगार पर पहुँच गए हैं. इससे जनवरी 2025 से अब तक कम से कम 10 लाख महिलाएँ और लड़कियाँ अहम मानवीय सहायता से वंचित हो गई हैं. यह चेतावनी नई रिपोर्ट, ‘सहनशक्ति की सीमा के पार’(Beyond the Breaking Point) में दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों को आवश्यक सेवाएँ देने वाले संगठनों को ऐसे समय में अपने कार्यक्रमों में कटौती या उन्हें स्थगित करना पड़ रहा है, जब मानवीय सहायता की वैश्विक ज़रूरतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं.नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 12 करोड़ महिलाओं और लड़कियों को मानवीय सहायता और संरक्षण की आवश्यकता है. मगर उन तक पहुँचने में सबसे सक्षम स्थानीय महिला संगठन गम्भीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं. ये संगठन अक्सर उन क्षेत्रों में भी काम करते हैं, जहाँ अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियाँ नहीं पहुँच पातीं.जीवन बचाने का संघर्षअफ़ग़ानिस्तान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य और हेती समेत दुनिया के कुछ सबसे गम्भीर मानवीय संकटों में ये संगठन अहम भूमिका निभा रहे हैं. अन्तरराष्ट्रीय ध्यान दूसरी ओर चले जाने के बाद भी वे ज़मीनी स्तर पर काम करते रहते हैं और हिंसा से जीवित बचे लोगों, विस्थापित परिवारों एवं संवेदनशील समुदायों को सहायता पहुँचाते हैं.यूएन वीमेन की मानवीय कार्रवाई प्रमुख सोफ़िया कैलटॉर्प ने कहा, “महिला संगठनों को मिलने वाली सहायता में हर एक डॉलर की कटौती का सीधा असर संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा से जीवित बचे लोगों, विस्थापित माताओं, स्कूल छोड़ने को मजबूर लड़कियों और जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे समुदायों पर पड़ता है.”UN Women ने चेतावनी दी कि एजेंसियों और साझीदारों को ऐसे समय में अपने कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ रही है, जब उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है.मुख्य निष्कर्षयह रिपोर्ट 52 संकट और हिंसक टकराव-प्रभावित देशों में महिलाओं के नेतृत्व वाले 855 संगठनों से मिली प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. इसके मुख्य निष्कर्ष हैं:जनवरी 2025 से अब तक कम से कम 10 लाख महिलाएँ और लड़कियाँ महत्वपूर्ण सहायता से वंचित हो गई हैं. इसकी वजह मानवीय सहायता में अब तक दर्ज सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है.लगभग 10 में से 9 संगठन मौजूदा ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जबकि 84 प्रतिशत संगठनों ने अपनी सेवाओं की माँग बढ़ने की जानकारी दी है.जिन महिलाओं और लड़कियों के पास सहायता के अन्य विकल्प सबसे कम हैं, वे सबसे पहले प्रभावित हो रही हैं. दूरदराज़ और दुर्गम समुदायों में 63 प्रतिशत संगठनों ने अपनी सेवाएँ कम कर दी हैं.लैंगिक हिंसा बढ़ रही है. 86 प्रतिशत संगठनों ने ऐसी हिंसा में वृद्धि दर्ज की है, जबकि 62 प्रतिशत का कहना है कि महिलाओं एवं लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान या तो बन्द हो गए हैं या उनमें भारी कटौती की गई है.वित्तीय कटौती से महिला अधिकारों के विरुद्ध बढ़ता वैश्विक विरोध और गहरा रहा है. हर पाँच में से एक संगठन ने महिलाओं के नेतृत्व और लैंगिक समानता से जुड़े कार्यक्रम पहले ही स्थगित कर दिए हैं.बिना वेतन काम करने को मजबूरमानवीय संगठनों का नेतृत्व करने वाली अनेक महिलाएँ स्वयं हिंसक टकराव या विस्थापन का सामना कर रही हैं. संसाधनों की भारी कमी के बावजूद वे अपना काम जारी रखे हुए हैं. लगभग दो-तिहाई संगठनों ने बताया कि आवश्यक सेवाएँ जारी रखने के लिए उनके कर्मचारी बिना वेतन काम कर रहे हैं.वहीं, लगभग आधे संगठनों के अनुसार कर्मचारियों में अत्यधिक थकान और मानसिक दबाव बढ़ रहा है. 88 प्रतिशत संगठनों ने यह भी बताया कि उनकी सहायता पाने वाली महिलाओं और लड़कियों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है. © UNICEF/Mohammed Jamal अल फ़शर से विस्थापित दाई अमीना, उत्तरी दारफ़ूर के तवीला में UNICEF समर्थित स्वास्थ्य केन्द्र में माताओं की देखभाल करती हैं. सिमटती सेवाएँवित्तीय संकट का असर संकट-प्रभावित समुदायों पर पहले ही दिखाई देने लगा है.सर्वेक्षण में शामिल आधे संगठनों ने प्रतीक्षा सूची बनानी शुरू कर दी है या बढ़ती माँग पूरी न कर पाने के कारण महिलाओं और लड़कियों को बिना सहायता लौटाने के लिए मजबूर हैं.वहीं, 92 प्रतिशत संगठनों ने बताया कि उनकी सहायता पाने वाली महिलाओं में ग़रीबी बढ़ रही है, जबकि 82 प्रतिशत के अनुसार अधिक लड़कियाँ स्कूल छोड़ने को मजबूर हैं.इन आँकड़ों के पीछे ऐसी महिलाएँ हैं, जिन्हें बन्द हो चुके आश्रय केन्द्रों से लौटना पड़ रहा है, ऐसी गर्भवती महिलाएँ हैं, जिन्हें इलाज के लिए घंटों यात्रा करनी पड़ रही है, और ऐसी माताएँ हैं, जो अपने बच्चों के लिए भोजन नहीं जुटा पा रही हैं.मानवीय सहायता से परे असरUN Women ने चेतावनी दी है कि इस संकट का असर केवल तत्काल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है.महिला संगठनों के कमज़ोर होने से समुदायों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं का नेतृत्व और भागेदारी बढ़ाने के प्रयास भी प्रभावित हो रहे हैं. सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक संगठनों ने बताया कि स्थानीय नेतृत्व में महिलाओं की भागेदारी घट रही है.UN Women ने इन संगठनों को निरन्तर वित्तीय सहायता देने का आहवान किया है. संस्था ने कहा कि महिला संगठन संकट के दौरान सबसे पहले सहायता पहुँचाते हैं, महिला अधिकारों की रक्षा करते हैं और पुनर्बहाली एवं शान्ति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.सोफ़िया कैलटॉर्प ने कहा, “तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो दुनिया के सबसे भीषण संकटों में महिलाओं और लड़कियों का जीवन बचाने वाले ये संगठन ख़ुद भी युद्ध की भेंट चढ़ सकते हैं.”

यह भी पढ़े

Web Title-
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved