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अफ़ग़ानिस्तान: नए तालेबानी आदेश से, महिलाओं के साथ भेदभाव गहराने का जोखिम

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अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) ने वैवाहिक अलगाव से जुड़े मामलों में, सत्तारूढ़ तालेबान प्रशासन के एक नए आदेश पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे अफ़ग़ान महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों को और ठेस पहुँचेगी और क़ानून व व्यवहार में उनके साथ होने वाला व्यवस्थागत भेदभाव और गहराएगा. अफ़ग़ानिस्तान में तथ्यत: (de facto) तालेबान प्रशासन ने 14 मई को जारी अपने आधिकारिक आदेश में उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया है जिनमें एक महिला, अपने वैवाहिक अलगाव की याचिका, न्यायालय में दायर कर सकती है. यूएन मिशन के अनुसार, इस व्यवस्था के लिए फ़्रेमवर्क में गहराई तक असमानता व्याप्त है. जहाँ पुरुषों के पास महिलाओं को तलाक़ देने का एकतरफ़ा अधिकार है, वहीं महिलाओं को अपने पति से अलग होने के लिए जटिल और सीमित न्यायिक विकल्पों का सहारा लेना होगा. Tweet URL

UNAMA ने इस स्थिति में ढाँचागत भेदभाव के और गहरा होने व गरिमा, सुरक्षा व कल्याण से जुड़े मामलों में महिलाओं की स्वायत्ता सीमित हो जाने की आशंका जताई है.अफ़ग़ानिस्तान में यूएन महासचिव की विशेष उप प्रतिनिधि और कार्यवाहक मिशन प्रमुख जियॉर्जेट गैगनॉन ने बताया कि आधिकारिक आदेश संख्या 18, एक वृहद और चिन्ताजनक रुझान का हिस्सा है, जिसमें अफ़ग़ान महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों का क्षरण हो रहा है.संस्थागत भेदभाव पर चिन्ताउन्होंने कहा कि इस आधिकारिक आदेश से अफ़ग़ान महिलाओं के साथ भेदभाव को संस्थागत रूप से जगह मिलेगी. लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की सार्वजनिक भागेदारी पर थोपी गई पाबन्दियों के साथ मिलकर यह एक ऐसी व्यवस्था को मज़बूती देगा, जिसमें स्वायत्ता, अवसर व न्याय पाने के अधिकार को नकार दिया जाता है.UNAMA ने कहा कि आधिकारिक आदेश संख्या 18 को उस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना होगा जिसमें अगस्त 2021 में सत्ता पर तालेबान की वापसी के बाद से ही, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर असर डालने वाले क़दम उठाए गए हैं. लड़कियों की माध्यमिक व उच्चतर शिक्षा पर प्रतिबन्ध और महिलाओं के कामकाज पर थोपी गई पाबन्दियों से लाखों अफ़ग़ान महिलाएँ व लड़कियाँ शिक्षा के अधिकार से वंचित हो गई हैं. आर्थिक भागेदारी कमज़ोर और निर्धनता गहरी हुई है, जिससे अफ़ग़ानिस्तान के दीर्घकालिक विकास पर असर हुआ है.इस पृष्ठभूमि में, इस नए आदेश की वजह से, विवाह, अलगाव और न्याय तक पहुँच के मामलों में पहले से ही मौजूद असमानताएँ और भी गहरा सकती हैं. तालेबान ने, दिसम्बर 2021 में, एक विशेष आदेश जारी करते हुए देश में महिलाओं के लिए कुछ अधिकारों को मान्यता दी थी, जिनमें विवाह के लिए सहमति और विरासत का अधिकार भी है. कमज़ोर संरक्षण उपाय © UN Women/Sayed Habib Bidell अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर अगस्त 2021 में तालेबान की वापसी के बाद से महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों पर पाबन्दियाँ थोपी गई हैं. मगर, उसके बाद से जितने भी आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं, उनसे ये संरक्षण उपाय कमज़ोर हुए हैं, और विवाह से पहले, उसके दौरान, और बाद में महिलाओं की स्वायत्ता सीमित हुई है.उदाहरण के लिए, इसी वर्ष आधिकारिक आदेश संख्या 12 के ज़रिए विवाह सम्बन्धी मामलों में सीमित न्यायिक हस्तक्षेप का प्रावधान किया गया, लेकिन उन्हीं मामलों में जहाँ महिलाओं के साथ बुरी तरह मार-पिटाई की गई हो. गम्भीर दुर्व्यवहार के लिए पति को 15 दिन जेल की सज़ा दिए जाने का भी प्रावधान है.आधिकारिक आदेश संख्या 18 की वजह से लड़कियों पर होने वाले असर के प्रति भी चिन्ता जताई गई है. इसमें किशोरावस्था की आयु में पहुँचने वाली या विवाहित लड़कियों के लिए अलगाव पर एक अध्याय है, जिसका निहित अर्थ है कि बाल विवाह की अनुमति दी गई है.इसके तहत, किशोरावस्था की आयु में पहुँच चुकी लड़कियों के ख़ामोश रहने की व्याख्या, विवाह के लिए उनके सहमत होने के रूप में की जा सकती है. यूएन मिशन ने कहा कि इससे स्वतंत्र व पूर्ण सहमति का सिद्धान्त कमज़ोर होता है और बच्चों के हितों की रक्षा करने में यह विफलता है.इसके मद्देनज़र, यूएन मिशन ने दोहराया है कि अफ़ग़ानिस्तान को अपने तयशुदा अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करना होगा, जिनमें महिलाओं के साथ भेदभाव का उन्मूलन और बाल अधिकारों की रक्षा भी है. UNAMA ने ज़ोर देकर कहा है कि विवाह के लिए सहमति, बाल विवाह के उन्मूलन, न्याय तक पहुँच और सभी व्यक्तियों के लिए अधिकारों व गरिमा को सुनिश्चित किया जाना होगा.

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