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प्रवासन से अर्थव्यवस्था व विकास को सहारा, मगर पाबन्दियों से योगदानों पर जोखिम

 - World News in Hindi

हर वर्ष, बेहतर आर्थिक अवसरों, हिंसक टकराव, सुरक्षा की तलाश, पर्यावरणीय चुनौतियों या अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग अपने मूल निवास स्थान से कहीं दूर जाकर दूसरे स्थान पर अपना घर बसाते हैं. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रवासन (migration) के लिए सुरक्षित व नियमित मार्ग तक पहुँच बहुत आवश्यक है, जोकि आर्थिक प्रगति व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. लेकिन, प्रवासन पर पाबन्दियाँ थोपने से इससे हासिल होने वाले लाभ पर गहरा असर हो सकता है. प्रवासन, अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक केन्द्रीय भूमिका निभा रहा है. एक अनुमान के अनुसार मध्य-2024 तक विश्व भर में कुल 30.4 करोड़ अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी थे, जोकि विश्व आबादी का लगभग 3.7 प्रतिशत है. समय बीतने के साथ प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है. वहीं, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों की संख्या भी बढ़ रही है. 2013 से 2022 के दशक के दौरान, इस संख्या में 3 करोड़ का उछाल दर्ज किया गया. Tweet URL

यूएन एजेंसी ने मंगलवार को 'अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा फ़ोरम सप्ताह' के दौरान न्यूयॉर्क में ‘विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026’ जारी की है. यह रिपोर्ट बताती है कि प्रवासन से श्रम बाज़ारों को समर्थन व नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है, और कौशल सम्बन्धी खाइयों को दूर करने में मदद भी. मगर, सुरक्षित व नियमित प्रवासन मार्गों पर पाबन्दियाँ थोपने से प्रवासन थमता नहीं है, बल्कि इसके अनियमित तौर-तरीक़ों व ख़तरनाक मार्गों का सहारा लिया जाने लगता है.इससे प्रवासियों के लिए जोखिम और देशों के लिए इसकी क़ीमत बढ़ती है, जबकि प्रवासन से प्राप्त होने वाले लाभ सीमित हो जाते हैं.प्रवासियों का अहम योगदानप्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाला धन, उनके मूल समुदायों के लिए समर्थन का एक बड़ा स्रोत होता है. वर्ष 2024 में, धन प्रेषण (remittance) बढ़कर 90.5 करोड़ डॉलर तक पहुँचने की संभावना थी, जिनमें 68.5 करोड़ डॉलर की धनराशि निम्न- और मध्य-आय वाले देशों के लिए थी.यह रक़म, आधिकारिक विकास सहायता और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को जोड़ने के बाद प्राप्त होने वाली धनराशि से भी अधिक है.यूएन प्रवासन एजेंसी की महानिदेशक ऐमी पोप ने कहा कि विश्व भर में, प्रवासन से नौकरियों, आर्थिक प्रगति, स्थिरता और सामाजिक जुड़ाव में मदद मिलती है.“हर देश के पास अपनी प्रवासन नीतियों को आकार देने का अधिकार है. मगर, साक्ष्य दर्शाते हैं कि जब देश क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर सहयोग करते हैं, तो प्रवासन का प्रबन्धन बेहतर होता है.”“इससे सार्वजनिक भरोसे का निर्माण होता है और अर्थव्यवस्थाओं, समुदायों व एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे लोगों को मज़बूत लाभ हासिल होते हैं.”बदलते प्रवासन रुझानरिपोर्ट दर्शाती है कि समय बीतने के साथ, जहाँ एक ओर अन्तरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है, वहीं भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में प्रवासन रुझानों में बदलाव भी दिखाई दिया है. यानि, पूरे विश्व में प्रवासन के मुद्दे पर केवल एक स्थिति नहीं है और इसलिए यह ज़रूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए उपाय विकसित किए जाने होंगे. रिपोर्ट के अनुसार, प्रवासन के अवसरों तक पहुँच भी असमान है. अधिक आय वाले देशों में लोगों के लिए इन मार्गों का विस्तार हो रहा है, जबकि निम्नतर आय वाले देशों में ये सीमित हैं. इससे वैश्विक स्तर पर आवाजाही अवसरों में व्याप्त असमानताएँ और पैनी हुई हैं. इसकी वजह से, श्रमिकों की गतिशीलता धीमी हो रही है और प्रवासन से प्राप्त होने वाले सम्भावित आर्थिक लाभ घट सकते हैं. यह स्थिति एक ऐसे समय पर है, जब विश्व भर में विस्थापन मामलों की संख्या अपने रिकॉर्ड स्तर पर है.2024 के अन्त तक, दुनिया में 12 करोड़ लोग विस्थापित थे, जिनमें शरणार्थी, आश्रय तलाश रहे लोग और आन्तरिक रूप से विस्थापित लोग हैं. मगर, विस्थापन के अधिकाँश मामले देशों के भीतर होते हैं, ना कि उसकी सीमाओं के पार. हिंसक टकराव, पर्यावरणीय दबाव, व्यवस्थागत समस्याओं समेत अन्य चुनौतियाँ इन रुझानों को आकार देती हैं. © IOM/Gema Cortés पनामा के डेरियन में स्थित अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के एक आगन्तुक केन्द्र में वेनेज़ुएला से आने वाले प्रवासी पहुँच रहे हैं. चंद व्यवहारिक उपाययूएन एजेंसी के अनुसार, अनेक क्षेत्रों में विशाल विस्थापन संकट लम्बे समय तक खिंच रहे हैं, और इसलिए यह ज़रूरी है कि मानवीय सहायता के साथ-साथ, दीर्घकाल में विकास को प्राथमिकता देने वाले उपायों को भी अपनाना होगा.प्रवासियों के योगदान व उनसे हासिल होने वाले लाभ को लम्बे समय तक सहेजने के लिए, रिपोर्ट में कुछ क़दम सुझाए गए हैं, जैसेकि:सुरक्षित व नियमित प्रवासन मार्गों का विस्तारधन-प्रेषण की क़ीमतों में कमीहुनरमन्द श्रमिकों की आवाजाही को बढ़ावासाथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर मज़बूत सहयोग, डेटा जुटाने के बेहतर उपायों, और समावेशी, साक्ष्य-आधारित नीतियों को भी आकार देना होगा, ताकि तेज़ी से बदलती दुनिया में प्रवासन का बेहतर ढंग से प्रबन्धन किया जा सके.

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