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भारत: वैक्सीन से छूट गए बच्चों तक टीके पहुँचाने में मददगार TrackVac

 - World News in Hindi

भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित एक डिजिटल मंच, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को उन बच्चों तक पहुँचने में मदद कर रहा है, जो नियमित टीकाकरण से छूट जाते थे. वैक्सीन के टीके तभी जीवन बचाते हैं, जब वे हर बच्चे तक पहुँचते हैं. भारत के कुछ सबसे वंचित समुदायों में टीकाकरण से जुड़ी एक पुरानी चुनौती बरक़रार रही है और वो ये कि बच्चों की पहचान तो हो जाती थी, मगर वो बच्चे, हमेशा टीकाकरण सेवाओं तक नहीं पहुँच पाते थे.देश के 11 प्रान्तों के 143 Gavi-समर्थित ज़िलों में कुछ बच्चे हर साल व्यवस्था की कमियों के कारण टीकाकरण से छूट जाते थे.निगरानी प्रणालियाँ उनकी पहचान कर लेती थीं, लेकिन आगे की कार्रवाई हमेशा समय पर और व्यवस्थित ढंग से नहीं हो पाती थी. इससे उनके फिर से टीकाकरण से छूट जाने का ख़तरा बना रहता था.लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है.भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित TrackVac नामक डिजिटल मंच, बिखरे हुए आँकड़ों को स्पष्ट और उपयोगी जानकारी में बदल रहा है. यह मंच स्वास्थ्य उप-केन्द्र स्तर तक टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार करता है, जिससे स्वास्थ्य टीमों के लिए हर बच्चे की पुष्टि करना, परिवार से सम्पर्क करना और उसका टीकाकरण सुनिश्चित करना आसान हो जाता है.आँकड़ों से कार्रवाई तकहर सप्ताह, फ़ील्ड मॉनिटर, त्वरित प्रतिक्रिया टीमें और टीकाकरण कार्यकर्ता, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर टीकाकरण से छूटे हुए बच्चों की जानकारी जुटाते हैं.वे घर-घर जाकर रिकॉर्ड देखते हैं, हर टीके के आधार पर बच्चों की टीकाकरण स्थिति की पुष्टि करते हैं, और यह जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज करते हैं. UNDP India/ Gaurav Menghaney अपने नवजात शिशु के टीकाकरण के बाद प्रसन्न राजेश्वरी. अगर कोई बच्चा किसी भी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो स्वास्थ्य टीम TrackVac के ज़रिये उसी समय उसकी जानकारी जोड़ सकती है. कई मामलों में, यह उस बच्चे का सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पहला औपचारिक पंजीकरण हो सकता है.यह मंच केवल सूची तैयार नहीं करता, बल्कि जवाबदेही की एक सक्रिय व्यवस्था बनाता है. सत्यापित जानकारी सीधे सहायक नर्स मिडवाइफ़ और ज़िला अधिकारियों जैसे उन लोगों तक पहुँचती है, जो उस पर तुरन्त कार्रवाई कर सकते हैं तथा लक्षित तरीक़े से उनकी देखभाल योजना बना सकते हैं.बच्चे क्यों छूट जाते हैंTrackVac स्वास्थ्य टीमों को यह समझने में भी मदद करता है कि कोई बच्चा टीकाकरण से क्यों छूट गया.इस मंच के ज़रिये परिवार का पलायन, टीकाकरण से इनकार, या दुष्प्रभावों का डर जैसे कारण दर्ज किए जाते हैं. इससे ज़मीनी जानकारी को कार्यक्रमों के लिए उपयोगी समझ में बदलने में आसानी होती है.अब स्वास्थ्यकर्मी केवल सामान्य सम्पर्क पर निर्भर नहीं रहते. वे स्थिति के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं - जैसेकि टीकाकरण से झिझकने वाले परिवारों को समझाना, प्रवासी परिवारों पर नज़र रखना, या उन इलाक़ों में टीकाकरण सत्र आयोजित करना जहाँ छूटे हुए बच्चों की संख्या अधिक है.'शून्य-ख़ुराक' बच्चों तक पहुँचनाइसके नतीजे महत्वपूर्ण रहे हैं. वर्ष 2025 में TrackVac के ज़रिये 2 लाख 24 हज़ार से अधिक बच्चों की पुष्टि की गई. इनमें से आधे से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया गया, और कई बच्चों को पहचान के दो महीनों के भीतर टीके लगाए गए.हर तीन में से एक 'शून्य-ख़ुराक' बच्चे को उसकी पहली महत्वपूर्ण टीका ख़ुराक मिली.इस प्रणाली ने नियमित टीकाकरण से जुड़े डेटा को भी मज़बूत किया. इससे पता चला कि कई बच्चे किसी न किसी रिकॉर्ड में पहले से दर्ज थे, लेकिन उनकी नियमित निगरानी नहीं हो पा रही थी. © UNICEF/Rachit Arora इलाक़े में अब लोग बिना झिझक, बच्चों का टीकाकरण करवा रहे हैं. बाक़ी कमियाँ अब भी पलायन, अविश्वास और छूटे हुए अवसरों जैसी चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं. मगर TrackVac की मदद से ये कमियाँ अब अधिक स्पष्ट दिख रही हैं, उन्हें मापा जा सकता है, और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई की जा सकती है.टीकाकरण की कमी दूर करनाTrackVac का असर इस अहम बदलाव में दिखता है कि अब ध्यान केवल छूटे हुए बच्चों की गिनती पर नहीं, बल्कि उन्हें टीकाकरण सेवाओं तक पहुँचाने पर है.यह पहल दिखाती है कि टीकाकरण की आख़िरी कड़ी केवल वैक्सीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. इसके लिए ऐसी मज़बूत व्यवस्था भी ज़रूरी है, जो बच्चे की पहचान होने के बाद यह सुनिश्चित करे कि वह फिर से पीछे नहीं छूट जाएँ.

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