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विज्ञापन में AI के बढ़ते प्रयोग से भ्रामक जानकारी फैलने का जोखिम

 - World News in Hindi

दुनिया भर में हर साल विज्ञापन पर ख़र्च होने वाला धन, 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पर पहुँच चुका है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि प्रमुख ब्रांड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता रखते हैं, और आगाह किया है कि यदि समय रहते क़दम नहीं उठाए गए, तो वैश्विक सूचना विश्वसनीयता संकट और भी गहरा सकता है. संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग (DGC) और ज़िम्मेदार विज्ञापन नैटवर्क (Conscious Advertising Network) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में बताया है कि विज्ञापन क्षेत्र में एआई का अनियंत्रित प्रयोग, पूरे डिजिटल सूचना तंत्र में जोखिम बढ़ा रहा है.रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञापन उद्योग ऑनलाइन सूचना के प्रवाह के केन्द्र में है, जहाँ उसके ख़र्च से यह तय होता है कि कौन-सी सामग्री (content) तैयार होगी, उसे कितना बढ़ावा मिलेगा और उससे किस तरह आमदनी होगी.एआई उपकरणों की मीडिया ख़रीद और सामग्री (content) सृजन में तेज़ी से शामिल होने के साथ, यह प्रभाव और भी बढ़ता जा रहा है.विज्ञापनदाताओं की अहम भूमिकासंयुक्त राष्ट्र की सूचना अखंडता (Information Integrity) मामलों की वरिष्ठ सलाहकार शार्लट स्कैडन का कहना है, “विज्ञापन उन प्रणालियों को वित्तीय समर्थन करता है, जो यह तय करती हैं कि लोग क्या देखते हैं, किस पर भरोसा करते हैं और क्या मानते हैं.”उन्होंने चेतावनी दी, “यदि तुरन्त क़दम नहीं उठाए गए और उचित दिशानिर्देश नहीं बनाए गए, तो एआई, सूचना तंत्र की विश्वसनीयता को और कमज़ोर कर सकती है. इसे ठीक करने में विज्ञापनदाताओं की अहम भूमिका है.” © Unsplash/Igor Omilaev कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी तेजी से विकसित हो रही है. ग़लत सूचना, नफ़रत भरे भाषण और ध्रुवीकरणइस रिपोर्ट में, कई बढ़ते जोखिमों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि एआई ग़लत सूचना, नफ़रत भरे भाषण और ध्रुवीकरण करने वाली सामग्री के प्रसार को तेज़ कर रही है. इसके बावजूद, विज्ञापन से होने वाली आय, सामग्री की गुणवत्ता या सटीकता की परवाह किए बिना उसे वित्तीय समर्थन करती जा रही है.साथ ही, एआई-आधारित विज्ञापन प्रणालियों के काम करने के तरीके़ में पारदर्शिता की कमी, धोखाधड़ी और अक्षमता को लेकर चिन्ताएँ बढ़ा रही है.रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई-निर्मित सामग्री का बढ़ता उपयोग स्वतंत्र पत्रकारिता के अस्तित्व के लिए ख़तरा बन रहा है. डिजिटल मंचों पर घटता भरोसा, पहले ही विज्ञापन अभियानों की प्रभावशीलता को कमज़ोर कर रहा है.एक व्यावसायिक जोखिम भी...रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है कि ये केवल सामाजिक चिन्ताएँ नहीं हैं, बल्कि सीधे व्यावसायिक जोखिम भी हैं.इन विज्ञापनों को दिखाए जाने वाले मंचों पर दर्शकों के घटते भरोसे के साथ, उपयोगकर्ताओं का जुड़ाव (engagement) कम होता है और निवेश पर मिलने वाली रक़म भी घट जाती है.ज़िम्मेदार विज्ञापन नैटवर्क की हैरियट किंगाबी का कहना है, “ब्रांड्स पर एआई को तेज़ी से अपनाने का दबाव है, लेकिन बिना उचित सुरक्षा उपायों के ऐसा करना उन्ही डिजिटल परिवेशों को कमज़ोर कर सकता है जिन पर उनका विपणन यानि मार्केटिंग आधारित है.”उन्होंने कहा, “यह नवाचार को रोकने की बात नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की बात है कि यह व्यापार और समाज दोनों के लिए सही तरीके़ से काम करे.” © Unsplash/Immo Wegmann एआई प्रणाली डेटा विश्लेषण, निर्णय लेने, स्वचालन और अनुकूलन में सहायता करेगी. बचाव के उपायइससे बचाव के लिए नीति-निर्माताओं से अपील की गई है कि वे, एआई और विज्ञापन से जुड़े शासन ढाँचों को सूचना अखंडता (information integrity) के अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएंँ और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उद्योग व नागरिक समाज के साथ मिलकर कार्य करें.साथ ही, विज्ञापनदाताओं के लिए इसमें सुझाव दिया गया है कि वे एआई आपूर्ति श्रृंखला में अधिक पारदर्शिता की मांग करें, बेहतर और भरोसेमन्द मीडिया वातावरण को प्राथमिकता दें.इसके अलावा, विज्ञापनदाता अपने वित्तीय प्रभाव का प्रयोग करके, मंचों को प्रयोक्ताओं व ग्राहकों के लिए मज़बूत सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें.

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