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मध्य एशिया में “परमाणु - शस्त्र - मुक्त क्षेत्र" के 20 साल का जश्न

 - World News in Hindi

कज़ाख़स्तान का सेमिपालातिंस्क (Semipalatinsk) इलाक़ा कभी सोवियत संघ का प्रमुख परमाणु परीक्षण स्थल हुआ करता था. आज, जब दुनिया में परमाणु ख़तरों में फिर से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है, ऐसे समय में वर्ष 2006 में मध्य एशियाई देशों द्वारा परमाणु हथियारों का परित्याग करते हुए किए गए सेमिपालातिंस्क समझौते की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है. इस समझौते में क़जाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़बेकिस्तान शामिल हैं. इसके तहत, इन देशों ने स्वेच्छा से परमाणु हथियारों का विकास, अधिग्रहण, परीक्षण या तैनाती नहीं करने का संकल्प लिया है.संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय (UNODA) में व्यापक विनाश के हथियार (Weapons of Mass Destruction) शाखा के प्रमुख क्रिस्टोफ़र किंग के अनुसार, “परमाणु-हथियार-मुक्त क्षेत्र (NWFZ) केवल ऐतिहासिक उपलब्धियाँ ही नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, अप्रसार और परमाणु जोखिम को कम करने के लिए सक्रिय और प्रभावी साधन भी हैं.”उन्होंने कहा कि मध्य एशियाई क्षेत्र इस बात का उदाहरण है कि किस तरह प्रभावी क्षेत्रीय सहयोग सम्भव है, जहाँ 5 देशों को एक क़ानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता के दायरे में लाया गया है.क्रिस्टोफ़र किंग ने कहा, “ऐसे क्षेत्र पारदर्शिता, विश्वास-निर्माण और जोखिम में कमी लाने में योगदान देते हैं, और ये क्षेत्रीय सुरक्षा चिन्ताओं तथा वैश्विक अप्रसार और निरस्त्रीकरण ढाँचे के बीच एक व्यावहारिक सेतु बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.”क्षेत्रीय सहयोग सम्भवक़जाख़स्तान के विदेश मामलों के प्रथम उप मंत्री यर्ज़हान आशिकबायेव का कहना है कि इस समझौते का महत्व क्षेत्र से कहीं आगे तक फैला हुआ है.यर्ज़हान आशिकबायेव, 2026 में जारी परमाणु अप्रसार सन्धि (NPT) के समीक्षा सम्मेलन में देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.उन्होंने कहा, “सेमिपालातिंस्क सन्धि का मध्य एशिया ही नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं से बाहर भी सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान निर्विवाद है.”उप मंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र की स्थापना इस बात को दर्शाती है कि क्षेत्रीय देशों की एक साझा प्रतिबद्धता है - शान्ति, स्थिरता और सुरक्षा को मज़बूत करना तथा परमाणु परीक्षण की विरासत को समाप्त करना. UN News/Kulpash Konyrova क़ज़ाख़स्तान के एक कलाकार करिपबेक कियूकोव ने, परमाणु मुक्त विश्व के लिए, अपनी कलाकृति के ज़रिए जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है. प्रतिबद्धता पर उठते सवालकुछ विशेषज्ञ वर्तमान में, बढ़ते भू-राजनैतिक तनावों के बीच, ऐसे समझौतों की स्थायित्व क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि, यर्ज़हगान आशिकबायेव इस राय से असहमत हैं.उनका कहना है, “ऐसे महत्वपूर्ण समय में यह क्षेत्र यह दर्शाता है कि इसका अस्तित्व एक सकारात्मक कारक है.” उन्होंने कहा कि क़जाख़स्तान बहुपक्षीय कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध है और इस क्षेत्र का आगे विकास भी, इसी नीति का हिस्सा है.मध्य एशिया का यह अनुभव, दुनिया के अन्य क्षेत्रों में भी रुचि का विषय बन रहा है, लेकिन आशिकबायेव ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे क्षेत्रों की स्थापना सम्बन्धित देशों का सम्प्रभु निर्णय होना चाहिए.साथ ही, परमाणु अतीत की विरासत आज भी महसूस की जाती है, विशेषकर पूर्व सेमिपालातिंस्क परीक्षण स्थल के आसपास, अलबत्ता पुनर्वास कार्यक्रम भी जारी हैं.यहाँ कैंसर उपचार के लिए एक आधुनिक केन्द्र स्थापित किया गया है, और अतीत में प्रतिबन्धित रहे क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद, धीरे-धीरे आर्थिक उपयोग के लिए वापस सौंपा जा रहा है.

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