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योरोपीय संघ, यूएन चार्टर व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का प्रबल समर्थक

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संयुक्त राष्ट्र ने योरोपीय संघ (EU) की सराहना करते हुए, इस क्षेत्रीय संगठन को, एक प्रमुख आर्थिक और राजनयिक पक्षकार व बहुपक्षवाद (multilateralism) के साथ-साथ यूएन चार्टर का प्रबल समर्थक बताया है और संयुक्त राष्ट्र के लिए इस विश्व संगठन के सहयोग को बहुत अहम क़रार दिया है. संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक मामलों के सहायक महासचिव ख़ालेद ख़ियारी ने, सोमवार को सुरक्षा परिषद में, शान्ति और सुरक्षा के क्षेत्रों में दोनों संगठनों के बीच सहयोग पर वार्षिक चर्चा के दौरान कहा कि तेज़ी से जटिल और अनिश्चित होते अन्तरराष्ट्रीय माहौल में, निरन्तर जुड़ाव, संवाद और विश्वास बहाली आवश्यक है.उन्होंने आगे कहा, "साझा चुनौतियों से निपटने के लिए अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान किया जाना सबसे ऊपर बना हुआ है. इन सिद्धान्तों को आगे बढ़ाने में योरोपीय संघ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है."ख़ालेद ख़ियारी ने योरोपीय संघ को अन्तरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से लेकर मानवाधिकारों, सतत विकास और मानवीय कार्यों तक, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के पूरे दायरे में एक प्रमुख भागीदार बताया.उन्होंने विशेष रूप से, लेबनान और अन्य चुनौतीपूर्ण वातावरणों में सैनिकों व पुलिस योगदान देने वाले देशों के रूप में योरोपीय संघ के सदस्य देशों की भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया.उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "कई परिस्थितियों में राजनैतिक समाधान कठिन होने के हालात में, संयुक्त राष्ट्र के सक्षम कार्यालयों (good offices), मध्यस्थता और राजनैतिक जुड़ाव के लिए, यूरोपीय संघ का समर्थन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है."ख़ालेद ख़ियारी ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध "अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था से सम्बन्धित क्षेत्रीय ढाँचों के लिए एक गम्भीर परीक्षा है" और रूस के आक्रमण ने "योरोपीय सुरक्षा संरचना की नींव को हिलाकर रख दिया है."उन्होंने एक तत्काल, पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम को, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों के सम्मान पर आधारित एक न्यायपूर्ण और व्यापक शान्ति की दिशा में पहला क़दम बताया. UN Photo/Loey Felipe कम आबादी, बड़ा वित्तीय योगदानयोरोपीय संघ की विदेश मामलों की उच्च प्रतिनिधिकाजा कलास ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि वैसे तो इस क्षेत्रीय संगठन के सदस्य देशों में, वैश्विक आबादी का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा बसता है, मगर वे आधिकारिक विकास सहायता (ODA) का 42 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करते हैं और संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट का एक चौथाई हिस्सा मुहैया कराते हैं. त्तपोषित करते हैं.उन्होंने कहा, "हम देनदारी का, पूरा और समय पर भुगतान करते हैं. लेकिन योरोपीय संघ ने संयुक्त राष्ट्र के लिए हमारे समर्थन को कभी भी केवल इस आधार पर नहीं देखा कि हम कितना धन ख़र्च करते हैं."उन्होंने समझाने के अन्दाज़ में कहा कि योरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र का समर्थन इसलिए करता है "क्योंकि यह एकमात्र ऐसी अन्तरराष्ट्रीय प्रणाली है जो शान्ति की ख़ातिर सक्रिय है, वैश्विक सामूहिक हितों का प्रतिनिधित्व करती है और अन्तरराष्ट्रीय क़ान की रक्षा करती है."उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में ये भी कहा कि "हम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से आज, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का सबसे गम्भीर असम्मान देख रहे हैं," जिससे शान्ति और सुरक्षा ख़तरे में है. "यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के लिए योरोपीय संघ का समर्थन अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है."अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का असम्मानकाजा कलास ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का असम्मान, यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के आक्रामक युद्ध और मध्य पूर्व के युद्ध में स्पष्ट है, जिसे उन्होंने आज के दो प्रमुख वैश्विक संकट बताया.उन्होंने कहा, "रूस एक सम्प्रभु देश पर आक्रमण करके और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य के रूप में अपने दायित्वों से मुँह मोड़कर, संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के सबसे अपमानजनक उल्लंघनों में से एक को अंजाम दे रहा है."इस बीच, "मध्य पूर्व में युद्ध ने अत्यधिक अस्थिरता पैदा की है और बहुत से लोगों की जानें ली हैं," जिसका प्रभाव दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है. योरोप से लेकर एशिया तक के लोग उच्च ऊर्जा क़ीमतों से जूझ रहे हैं, और सूडान से लेकर दक्षिण अमेरिका तक के किसान उर्वरक की कमी का सामना कर रहे हैं. UN Photo/Manuel Elias नई विश्व व्यवस्थायोरोपीय संघ की प्रतिनिधि ने आगे कहा कि ये दो संकट "पुराने नियमों की अनदेखी का अब तक के सबसे स्पष्ट संकेत हैं, जिनमें जिनमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है.”उन्होंने आगाह करते हुए कहा, "अब एक नई दुनिया बन रही है, जिसकी ख़ासियत प्रतिस्पर्धा और दमनकारी शक्ति की राजनीति है; एक ऐसी विश्व व्यवस्था जिसमें मुट्ठी भर सैन्य शक्तियों का दबदबा है जिनका लक्ष्य, अपने प्रभाव क्षेत्र स्थापित करना है."उन्होंने सुरक्षा परिषद को याद दिलाया कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने किस तरह प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों के बाद, बहुध्रुवीयता (multipolarity) के बजाय बहुपक्षवाद (multilateralism) को चुना. "योरोप हमेशा दमन के बजाय सहयोग को चुनेगा."सुधार ज़रूरीकाजा कल्लास ने कहा कि 100 साल बाद, "इतिहासकार इस क्षण को पीछे मुड़कर देखेंगे. और वे पूछेंगे: जब नियमों पर आधारित व्यवस्था ख़तरे में थी, तो संयुक्त राष्ट्र ने क्या किया?""क्या हम अतीत से चिपके रहकर, एक ऐसी प्रणाली का बचाव करते रहे जो अब बहुत से पक्षों के लिए काम नहीं करती थी? या क्या हमने इसे सुधारने का साहस दिखाया - इसे और अधिक मज़बूत, निष्पक्ष और लचीला बनाने के लिए?"उन्होंने ज़ोर दिया कि "जवाब हमारे ही पास है." और परिषद के सदस्यों के लिए एक सन्देश के साथ अपनी बात समाप्त की. "आपको आने वाली पीढ़ियों को युद्ध के अभिशाप से बचाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. यही 1945 का वादा था, और आज यही हमारा मिशन होना चाहिए.”“आइए हम वह पीढ़ी बनें जिसने एक मज़बूत, निष्पक्ष व्यवस्था बनाई, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए उपयुक्त हो. कार्रवाई करने का क्षण बिल्कुल अभी है."

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