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सुरक्षा परिषद: 'एक नाज़ुक डोर से बंधे' यमनी नागरिकों के लिए विकट स्थिति

 - World News in Hindi

यमन में हालात निरन्तर बिगड़ रहे हैं, लाखों लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है, स्वास्थ्य सेवाएँ दरक रही हैं और मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मार्ग सीमित हैं. यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद में ज़ोर देकर कहा कि यमनी नागरिकों को एक समाधान की आवश्यकता है और स्थाई हल के लिए समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया ही एकमात्र रास्ता है. मध्य पूर्व में उपजे संकट की पृष्ठभूमि में यमन में हालात पर चर्चा के लिए मंगलवार को सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई, जिसमें यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यमन को इस संकट में धँसने से रोकना होगा.इसके मद्देनज़र, टकराव व तनाव में कमी लाने, राजनैतिक प्रगति को मज़बूती देने और ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए धनराशि की व्यवस्था करने पर बल दिया गया है. Tweet URL

क़रीब एक महीने तक खाड़ी क्षेत्र में ईरान, अमेरिका व इसराइल के हमलों व जवाबी हमलों के बाद फ़िलहाल अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम नाज़ुक स्थिति में लागू है. पिछले महीने के अन्तिम दिनों में यमन में हूथी लड़ाकों ने इसराइल के विरुद्ध हमले किए थे.विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने अपने सम्बोधन में सदस्य देशों को कहा कि यमन में एक दशक से जारी हिंसक टकराव के बाद, देश में ऐसे झटकों को सहन करने की बहुत क्षमता नहीं है.उन्होंने हाल ही में यमन की अस्थाई तौर पर राजधानी अदन की यात्रा का उल्लेख किया. देश में पहले से ही आम लोगों के पास पर्याप्त सार्वजनिक सेवाएँ नहीं हैं, वेतन मिलने में देरी हो रही है और महंगाई है.अब उन्हें क्षेत्रीय टकराव के कारण ईंधन और खाद्य वस्तुओं के दाम में आए उछाल से भी जूझना पड़ रहा है और आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है.हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि यमन में वर्ष 2022 के बाद से मोटे तौर पर तनाव व हिंसक टकराव अतीत जैसा नहीं है, लेकिन यह मान कर नहीं चला जा सकता है कि ऐसी स्थिति हमेशा बनी रहेगी.उनके अनुसार, यमन को मौजूदा अस्थिरता की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता है और इसलिए यह ज़रूरी है कि एक समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया के रास्ते पर आगे बढ़ाया जाए.मानवीय आवश्यकताओं में वृद्धिसंयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय की वरिष्ठ अधिकारी ऐडेम वोसोर्नु ने 2.2 करोड़ लोगों की स्थिति पर चिन्ता जताते हुए कहा कि उन यमनी नागरिकों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें मानवीय सहायता की आवश्यकता है. “यह संकट सर्वाधिक निर्बलों को सबसे पहले और अधिक प्रभावित कर रहा है.” 1.8 करोड़ से अधिक लोग गम्भीर भूख का सामना कर रहे हैं और हर तीन में से दो परिवारों को हर दिन, एक समय का भोजन नहीं मिल पा रहा है. 20 लाख से अधिक, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और 10 लाख गर्भवती व स्तनपान करा रही महिलाएँ, कुपोषण के कारण जान को जोखिम में डालने वाली स्थिति से जूझ रही हैं. 1.9 करोड़ लोगों के पास स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा नहीं है और ऐसी बीमारियाँ फैल रही हैं, जिनकी रोकथाम की जा सकती है. ऐडेम वोसोर्नु ने बताया कि इस भयावह स्थिति को टालने के लिए इस वर्ष, 1.2 करोड़ लोगों तक सहायता पहुँचाने की योजना है.उनके अनुसार, उपलब्ध संसाधनों और बढ़ती मानवीय आवश्यकताओं के बीच का अन्तर बढ़ता जा रहा है. यमन में एक दशक पुराने हिंसक टकराव की वजह से लोग एक नाज़ुक डोर से बंधे हुए हैं, जोकि अब टूटती जा रही है.

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