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अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव की अहमियत

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र के 10वें महासचिव के पद पर कौन हस्ती बैठेगी, उससे आगामी दशक में वैश्विक कूटनीति, दुनिया भर के संकटों का सामना करने के लिए कार्रवाई और बहुपक्षीय प्रणाली की दिशा तय हो सकती है. अगले महासचिव का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 को आरम्भ होगा. पूरी प्रक्रिया पर एक नज़र... अब शुरू हो चुकी इस प्रक्रिया में ये कुछ बड़े सवाल हैं:अगले यूएन प्रमुख किस देश से होंगे?क्या पहली बार किसी महिला को इस पद के लिए चुना जाएगा?वीटो शक्ति रखने वाले सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य, बढ़ते वैश्विक विभाजन के बीच, अपने राजनैतिक मतभेदों को किस तरह सुलझाएंगे?महासचिव की भूमिकासंयुक्त राष्ट्र के महासचिव, संगठन के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी और शीर्ष राजनयिक होते हैं. उनकी प्रमुख ज़िम्मेदारियाँ हैं:संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और वैश्विक अभियानों का नेतृत्व करना.अन्तरराष्ट्रीय शान्ति के लिए ख़तरा बनने वाले मुद्दों को सुरक्षा परिषद के सामने रखना.वैश्विक संकटों पर मध्यस्थ, प्रवक्ता और समर्थक की भूमिका निभाना.सदस्य देशों के निर्णयों को लागू करना.अगले महासचिव चुनाव कब पूरा होगा?मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कार्यकाल 31 दिसम्बर 2026 को समाप्त होगा, इसलिए नए महासचिव के, 1 जनवरी 2027 से पद सम्भालने की उम्मीद है.इसके लिए चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है:नवम्बर 2025: सदस्य देशों को 1 अप्रैल 2026 तक उम्मीदवारों के नाम दाख़िल करने के लिए आमंत्रित किया गया.21- 22 अप्रैल 2026: उम्मीदवारों से यूएन महासभा में टीवी पर प्रसारित “अनौपचारिक सम्वाद” के ज़रिए सवाल-जवाब.जुलाई 2026 के अन्त में: 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद, उम्मीदवारों के बारे में बन्द कमरे में चर्चा करेगी.2026 के अन्त में: संयुक्त राष्ट्र महासभा, नए महासचिव की नियुक्ति को औपचारिक रूप से मंज़ूरी देगी.व्यावहारिक रूप से, अन्तिम निर्णय आमतौर पर अगस्त से अक्टूबर के बीच तय हो जाता है. United Nations कौन हैं उम्मीदवार?इस पद के लिए आमतौर पर राजनयिक, पूर्व प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी और अन्तरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख व्यक्तित्व शामिल होते हैं.अब तक चार उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं:मिशेल बाशेलेट (चिले)रफ़ाएल ग्रॉस्सी (अर्जेंटीना)रिबेका ग्रिनस्पैन (कोस्टारीका)मैकी साल (सेनेगल)ये प्रक्रिया कैसे काम करती है?उम्मीदवार को कम से कम एक यूएन सदस्य देश द्वारा मनोनीत किया जाना ज़रूरी है.देश एक-एक उम्मीदवार मनोनीत कर सकते हैं (अकेले या मिलकर).उम्मीदवार अपने नाम का स्वयं-नामांकन नहीं कर सकते.1 अप्रैल की समय-सीमा के बाद भी अतिरिक्त उम्मीदवारों के नाम सामने आ सकते हैं.अनौपचारिक नियमसुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों (चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका) यानि P5 देशों के नागरिकों को आमतौर पर उम्मीदवार नहीं बनाया जाता.महासचिव किस क्षेत्र से होंगे, इसके लिए कोई औपचारिक क्षेत्रीय नीति नहीं है. हालाँकि कुछ लोगों का मानना है कि अब लातीनी अमेरिका की “बारी” है, इसी वजह से अब तक घोषित उम्मीदवारों में से तीन इसी क्षेत्र से हैं. UN Photo/Loey Felipe महासभा और सुरक्षा परिषद में शक्ति सन्तुलनसंयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 97 के अनुसार, महासचिव की नियुक्ति, सुरक्षा परिषद की सिफ़ारिश पर, 193 सदस्यों वाली महासभा करती है.हालाँकि, 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद सिफ़ारिश तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं, ख़ासकर उसके पाँच स्थाई सदस्य, जिनके पास किसी भी उम्मीदवार को वीटो करने की शक्ति होती है. लेकिन अन्तिम नियुक्ति महासभा द्वारा ही की जाती है.महासचिव बनने के लिए आवश्यक शर्तें:सुरक्षा परिषद में बहुमत समर्थन हासिल करना.पाँचों स्थाई सदस्यों (P5) में से किसी का भी वीटो प्रयोग नहीं होना.अनौपचारिक ‘स्ट्रॉ पोल’ प्रक्रियासुरक्षा परिषद के सदस्य आपस में अनौपचारिक ‘स्ट्रॉ पोल’ करते हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि वे किसी उम्मीदवार को समर्थन देते हैं, विरोध करते हैं या उनके बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं रखते हैं.ये प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक किसी उम्मीदवार को बहुमत समर्थन नहीं मिल जाए और P5 में से किसी भी सदस्य की ओर से वीटो का प्रयोग नहीं हो.क्या इस बार कोई महिला, महासचिव बन सकती है?दबाव बढ़ रहा है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है.संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 80 वर्षों में अब तक 9 महासचिव रहे हैं, लेकिन कभी कोई महिला इस पद पर नहीं रही है.सदस्य देशों को महिलाओं के नाम भी आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.हालाँकि, चयन के लिए लैंगिक पहचान कोई औपचारिक मानदंड नहीं है.सुरक्षा परिषद की राजनीतिअन्तिम निर्णय अब भी काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि 5 स्थाई सदस्य (P5) आपसी सहमति बना पाते हैं या नहीं.हाल के वर्षों में ग़ाज़ा, यूक्रेन और ईरान जैसे संकटों पर इन देशों के बीच गहरे मतभेद और बार-बार का गतिरोध यह दिखाता है कि आगे की राह कितनी मुश्किल हो सकती है.पूर्व यूएन महासचिवएंतोनियो गुटेरेश (पुर्तगाल), जनवरी 2017 सेबान की-मून (दक्षिण कोरिया), 2007- 2016कोफ़ी अन्नान (घाना), 1997- 2006बुतरस बुतरस - ग़ाली (मिस्र), 1992 -1996जेवियर पेरेज़ दे कुएयार (पेरू), 1982- 1991कुर्त वाल्डहाइम (ऑस्ट्रिया), 1972 -1981यू थांट (बर्मा/म्याँमार), 1961-1971डैग हैमरशोल्ड (स्वीडन), 1953 -1961ट्राइग्वे ली (नॉर्वे), 1946 -1952

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