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विश्व बैंक: कामकाज व नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़तीं महिलाएँ, कुछ मिसालें

 - World News in Hindi

दक्षिण एशिया में आर्थिक गतिविधियों में, महिलाओं की भागेदारी अब भी बहुत सी बाधाओं से घिरी हुई है. इनमें असमान वेतन, अवसरों तक सीमित पहुँच और ऐसी अपेक्षाएँ शामिल हैं, जो उनकी महत्वाकाँक्षा व नेतृत्व को रोकती हैं. लेकिन जब महिलाओं को काम करने, नेतृत्व करने और उद्यम शुरू करने का अवसर मिलता है तो इनके परिणाम, केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहते. इनसे परिवार, समुदाय और अर्थव्यवस्थाएँ मज़बूत होती हैं. रोज़गार और आर्थिक अवसर महिलाओं को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने में मदद करते हैं. लेकिन दक्षिण एशिया में अब भी बहुत सी महिलाएँ ऐसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जो उन्हें कामकाजी जीवन में प्रवेश करने, अपने करियर में आगे बढ़ने या व्यवसाय शुरू करने से रोकते हैं. यहाँ तक कि जब महिलाएँ काम करती भी हैं, तो अक्सर उन्हें पुरुषों से कम वेतन मिलता है और पूरे लाभ व सुरक्षा नहीं मिल पाते.अर्थव्यवस्था में तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ, बच्चों और बुज़ुर्गों की देखभाल की व्यवस्था, तथा भूमि वित्तीय संसाधनों और कौशल तक आसान पहुँच बड़ा बदलाव ला सकती है. हम यहाँ कुछ ऐसी महिलाओं की कहानियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं जिन्होंने ये दर्शाया है कि जब दृढ़ संकल्प, मार्गदर्शन और सहयोगी प्रणालियों के साथ समर्थन मिलता है, तो किस तरह ज़िन्दगियाँ बदल जाती हैं.निधि पन्त भारत में समाज के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकियाँ (S4S Technologies) की सह-संस्थापक निधि पन्त, छोटे स्तर की किसान महिलाओं के लिए, टिकाऊ आजीविका सृजित करने का काम कर रही हैं. आज हज़ारों महिलाएँ, सौर ऊर्जा से चलने वाली खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों की मदद से, अतिरिक्त उपज को स्थाई आमदनी में बदल रही हैं.निधि पन्त कहती हैं कि महिला किसानों का साहस उन्हें लगातार प्रेरित करता है. अनेक महिलाएँ पहली बार घर से बाहर निकलकर सोलर ड्रायर चलाती हैं या ख़रीदारों से मोल-भाव करती हैं. हालांकि उन्हें, कृषि टैक्नॉलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा टैक्नॉलॉजी जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में काम करते हुए, बार-बार अपनी विश्वसनीयता साबित करनी पड़ी. उनके अनुसार, शिक्षा, वित्तीय संसाधन, तकनीक और नैटवर्क तक पहुँच, और महिलाओं की क्षमता पर भरोसे का माहौल ही, स्थाई बदलाव की असली कुंजी हैं.नफ़ीरा अहमद बांग्लादेश में नफ़ीरा अहमद ने 16 वर्ष की उम्र में 'एम्प्लिट्यूड' की स्थापना की, ताकि सामुदायिक पहलों के ज़रिये सामाजिक वर्जनाओं और भेदभाव को चुनौती दी जा सके. आज इस संगठन में 35 से अधिक युवा सदस्य और 1,500 स्वयंसेवक शामिल हैं, जो पूरे देश में 98 हज़ार लोगों तक पहुँच बना चुके हैं.नफ़ीरा अहमद कहती हैं कि उनकी उम्र, नेतृत्व और वित्त प्रबन्धन क्षमता को लेकर अक्सर सन्देह जताया गया. लेकिन आत्म-अनुशासन, मज़बूत विश्वास और समुदाय के समर्थन ने, उन्हें आगे बढ़ने में मदद की. उनके अनुसार, असली प्रगति तब होगी जब युवा महिलाओं के नेतृत्व पर भरोसा किया जाएगा और अवसरों तक पहुँच आसान बनाने के लिए प्रणालियों को बदला जाएगा - न कि महिलाओं को.ज़रीन महमूद हुसैन बांग्लादेश में, 'स्नेहासिश महमूद एंड कम्पनी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स' की संस्थापक साझेदार ज़रीन महमूद हुसैन बताती हैं कि उन्हें बोर्डरूम में अक्सर सन्देह का सामना करना पड़ा और मातृत्व के साथ अपने पेशेवर लक्ष्यों को सन्तुलित करना आसान नहीं रहा.ज़रीन महमूद हुसैन कहती हैं कि उन्हें, हज़ारों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले एक संगठन की स्थापना करने वाली अपनी दादी से प्रेरणा मिली. उनके मार्गदर्शन और प्रतिनिधित्व ने आगे बढ़ने में मदद की, और आज वह स्वयं युवा महिलाओं का मार्गदर्शन करती हैं. उनका मानना है कि वास्तविक बदलाव के लिए सहनसक्षम कार्य नीतियाँ, सुरक्षित परिवहन और महिलाओं में निवेश करने वाली नेतृत्व संरचनाएँ बेहद ज़रूरी हैं.सोनम पेम भूटान में तरायणा फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सोनम पेम ने देश के कुछ सबसे दूरदराज़ वाले इलाक़ों में वर्षों तक काम किया है. कई बार तो उन्हें गाँवों तक पहुँचने के लिए, कई दिनों तक पैदल सफ़र करना पड़ा. वह अपने करियर के शुरुआती वर्षों में अक्सर अपनी टीम की एकमात्र महिला होती थीं और कई बार उन्हें “सर” कहकर सम्बोधित किया जाता था.वह, मज़बूत पारिवारिक समर्थन, सहयोगी नेतृत्व और समझदार सहकर्मियों के सहयोग की बदौलत, तीन बच्चों की परवरिश के साथ अपना काम जारी रख सकीं. उनका कहना है कि ऐसे समर्थन तंत्र के बिना, कई महिलाओं को परिवार और पेशे के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.अश्लेषा कार्की नेपाल में, होटल मेची क्राउन की उप प्रबन्ध निदेशक अश्लेषा कार्की ने एक ऐसे अतिथि सत्कार व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है, जो सैकड़ों युवाओं को रोज़गार देता है और स्थानीय विक्रेताओं व किसानों का सहयोग करता है. उनके परिवार ने उनके नेतृत्व पर भरोसा किया, लेकिन कार्की कहती हैं कि बाहरी पूर्वाग्रहों के कारण उन्हें बार-बार अपनी क्षमता साबित करनी पड़ी.उनके अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव घर से शुरू होता है - जब परिवार महिलाओं को ज़िम्मेदारी और फ़ैसले लेने का भरोसा देते हैं - और आगे चलकर सुरक्षित परिवहन, मार्गदर्शन और सहनसक्षम कार्य व्यवस्थाओं जैसी नीतियों तक पहुँचते हैं.फ़ारिया यासमीन बाटा बांग्लादेश की प्रबन्ध निदेशक फ़ारिया यासमीन के लिए, नेतृत्व का मतलब पिछले दो दशकों से बनी संरचनात्मक बाधाओं को तोड़ना रहा है. कई बार तो बैठकों में, वह एकमात्र महिला होती थीं और मातृत्व के साथ-साथ उन्हें उच्च दबाव वाले निर्णय और संकट प्रबन्धन की ज़िम्मेदारियाँ निभानी पड़ीं.फ़ारिया यासमीन कहती हैं कि सहयोगी मार्गदर्शकों और मज़बूत सोच ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की. उनका मानना है कि अब भी बड़े बदलाव की ज़रूरत है - जैसेकि भरोसेमन्द बाल देखभाल सुविधाएँ, सहनसक्षम कार्य व्यवस्थाएँ और सुरक्षित परिवहन, ताकि महिलाओं को परिवार और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े.सोनिका मानन्धर नेपाल में ही, 'एलोई ग्लोबल' की सह-संस्थापक और मुख्य टैक्नॉलॉजी अधिकारी सोनिका मानन्धर, तकनीक, वित्त और स्थिरता क्षेत्र में काम करती हैं. वह किसानों और हरित व्यवसायों को वित्तीय साधनों तक पहुँच दिलाने में मदद करती हैं.अत्यधिक योग्य होने के बावजूद, पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में उन्हें बार-बार अपनी विशेषज्ञता साबित करनी पड़ी. सोनिका मानन्धर का कहना है कि माता-पिता के भरोसे, महिला मार्गदर्शकों और वैश्विक नैटवर्क की मदद ने उन्हें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी. उनका कहना है कि प्रतिभा हर जगह होती है, लेकिन अवसर नहीं - और इसलिए प्रणालियों में इस तरह का बदलाव ज़रूरी है कि सभी को समान अवसर मिल सके.लोनाली रोड्रिगो श्रीलंका में, फ़ैशन डिज़ाइनर और हाउस ऑफ़ लोनाली की संस्थापक लोनाली रोड्रिगो, कपड़ा उद्योग के कचरे को, पहनने योग्य परिधानों में बदलकर, रोज़गार के नए अवसर पैदा कर रही हैं और जागरूक उपभोग को बढ़ावा दे रही हैं.लोनाली रोड्रिगो, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अपनी दादी की प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर, रचनात्मकता को उद्यमिता से जोड़ती हैं. उनका कहना है कि युवा महिलाओं पर भरोसा करना, उन्हें अपनी रुचियाँ पहचानने में मदद करना और चुनौतियों को जीवन की यात्रा का सामान्य हिस्सा मानना, महिलाओं को आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है.ये सभी उदाहरण, एक साथ मिलकर दक्षिण एशिया की एक साझा सच्चाई को सामने लाते हैं. जब महिलाओं को अवसर, समर्थन और भरोसा मिलता है, तो वे केवल अर्थव्यवस्था में भागेदारी ही नहीं करतीं, बल्कि नेतृत्व करती हैं, नवाचार करती हैं और बदलाव को आगे बढ़ाती हैं.यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.

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