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दक्षिण सूडान: हिंसा में आई तेज़ी पर चिन्ता, खाद्य सहायता मार्ग मुहैया कराने का आग्रह

 - World News in Hindi

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने दक्षिण सूडान में सभी पक्षों से हिंसक टकराव, सैन्य गतिविधियों को तुरन्त रोकने, तनाव में कमी लाने और जोंगलेई प्रान्त में फँसे लाखों लोगों तक जीवनरक्षक खाद्य सहायता पहुँचाने की अपील की है. इससे पहले, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने एक वक्तव्य में बढ़ती हिंसा और उससे नागरिक आबादी पर हो रहे असर के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त की थी. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, दक्षिण सूडान के जोंगेलई प्रान्त में सेना ने विपक्षी हथियारबन्द गुटों के विरुद्ध एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, जिससे वहाँ तनाव व्याप्त है और 1.8 लाख लोग विस्थापन का शिकार हुए हैं.ऐसी ख़बरें है कि सेना ने आम नागरिकों और मानवीय सहायता एजेंसियों को सैन्य कार्रवाई से प्रभावित इलाक़े छोड़कर जाने का आदेश दिया है. Tweet URL

जोंगलेई प्रान्त में बिगड़ती परिस्थितियों का असर वहाँ रह रहे उन 20 लाख लोगों पर होने की आशंका है, जिन्हें सुरक्षित आश्रय व भोजन की तलाश में विस्थापित होना पड़ सकता है.60 प्रतिशत आबादी के पहले से ही आगामी दिनों में संकट स्तर पर भूख की चपेट में आने की आशंका है. देश की आबादी क़रीब 1 करोड़ 30 लाख है, जिनमें 93 लाख लोगों को, किसी न किसी प्रकार की मानवीय सहायता की ज़रूरत है. महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि ज़रूरतमन्द आबादी तक सुरक्षित ढंग से मानवीय सहायता पहुँच सके. उन्होंने दक्षिण सूडान की सरकार और विरोधी बलों से आग्रह किया कि सैन्य टकराव को रोकने के लिए जल्द से जल्द, निर्णायक क़दम उठाए जाने होंगे और समावेशी सम्वाद के ज़रिए तनाव में कमी लानी होगी.राजनैतिक समाधान पर बलदक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह देश, टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था. कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.इस समझौते के बाद, फ़रवरी 2020 में एक संक्रमणकालीन सरकार का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद से ही चुनाव स्थगित होते रहे हैं.यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से किसी सैन्य समाधान के बजाय राजनैतिक हल पर ध्यान केन्द्रित करने की अपील की है, ताकि विश्वसनीय ढंग से चुनावों का मार्ग प्रशस्त हो सके.हालात बिगड़ने की आशंकादक्षिण सूडान में, विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यवाहक देशीय निदेशक अदहम ऐफ़ेंदी ने बताया कि यह सैन्य टकराव एक बेहद कठिन समय में शुरू हुआ है. सम्वेदनशील परिस्थितियों में रह रही आबादी तक मदद पहुँचाने के लिए समय तेज़ी से बीता जा रहा है.अप्रैल से जुलाई तक, फ़सलों की पैदावार के बीच की अवधि में, आम नागरिकों की खाद्य सुरक्षा के लिए खाद्य सहायता व राहत आपूर्ति की व्यवस्था पहले से किया जाना अहम है. वर्ष 2026 में, WFP की योजना, 33 लाख लोगों तक आपात खाद्य सामग्री, पोषण, स्कूली आहार, नक़दी समेत अन्य सहायता पहुँचाने की है. इस समय भारी बारिश की वजह से महिलाओं, बच्चों, पुरुषों तक सड़क मार्ग तक मानवीय राहत पहुँचाना कठिन हो जाता है. इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने स्थानीय प्रशासन से तत्काल सुरक्षित रास्ते की अनुमति दिए जाने का आग्रह किया है, अन्यथा बड़ी संख्या में लोग ज़रूरी सहायता से वंचित हो सकते हैं.

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