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उपेक्षित उष्णकटिबन्धीय रोग: भेदभाव और मानसिक पीड़ा से जूझ रहे हैं लाखों मरीज़

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि विश्व के उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में उपेक्षित बीमारियों से पीड़ित लाखों लोग आज भी भेदभाव, सामाजिक कलंक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण गहरी और अक्सर अनदेखी पीड़ा झेल रहे हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने, उपेक्षा का शिकार उष्णकटिबन्धीय रोग के विश्व दिवस के अवसर पर यह चिन्ता जताई है, जिसे हर वर्ष 30 जनवरी को मनाया जाता है.इन बीमारियों में डेंगू, चिकनगुनया, रेबीज़, ट्रैकोमा, चगास समेत अन्य बीमारियाँ हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, विश्व भर में इन रोगों से एक अरब लोग प्रभावित हैं. WHO ने, इस वर्ष की थीम, ‘एकजुट हों, कार्रवाई करें, उन्मूलन करें’ के तहत देशों की सरकारों से अपील की है कि वे इन बीमारियों के उन्मूलन कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अनिवार्य रूप से शामिल करें, ताकि कोई भी व्यक्ति पीड़ा और सामाजिक अलगाव के कारण पीछे नहीं छूट जाए.उपेक्षित उष्णकटिबन्धीय रोग क्या हैं?उपेक्षा का शिकार उष्णकटिबन्धीय रोग (Neglected Tropical Diseases/NTD), अनेक तरह की बीमारियों का एक समूह हैं, जो अलग-अलग प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी, फ़ंगस और विषैले तत्वों के कारण फैलते हैं. ये बीमारियाँ स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और आजीविका पर गहरा और विनाशकारी असर डालती हैं.NTD, मुख्य रूप से उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में रहने वाले निर्धन और हाशिये पर मौजूद समुदायों में पाई जाती हैं, हालाँकि इनमें से कुछ रोगों का फैलाव इससे कहीं अधिक व्यापक क्षेत्रों तक है.NTD का महामारी-विज्ञान (epidemiology) काफ़ी जटिल है और अक्सर पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ा होता है. इनमें से अनेक बीमारियाँ कीटवाहक (वैक्टर-जनित) होती हैं, अनेक के स्रोत जानवरों में पाए जाते हैं और अनेक रोगों का जीवन-चक्र भी बहुत जटिल होता है. यही कारण है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर इन बीमारियों को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.सरल शब्दों में, वैक्टर-जनित बीमारियाँ ऐसे रोग हैं, जोकि उन परजीवों, विषाणुओ और जीवाणुओं से फैलते हैं, जिनका संचारण किसी वाहक से होता है, जैसेकि मच्छर, पिस्सू समेत रक्त चूसने वाले ऐसे जीव, जिनसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में या फिर मनुष्यों से पशुओं में संक्रमण फैलता है. © IAEA ऑस्ट्रिया में रोग नियंत्रण अनुसंधान के लिए वैज्ञानिक मच्छरों को इकट्ठा करते हुए. एक अरब से अधिक लोग चपेट मेंयूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग NTD रोगों से प्रभावित हैं और लगभग उतनी ही संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं. विशेष रूप से, क्यूटेनियस लीशमैनियासिस, कुष्ठ रोग, लिम्फैटिक फाइलेरियासिस, मायसेटोमा और नोमा जैसे NTD रोगों से जूझ रहे लोग सामाजिक कलंक और भेदभाव का सबसे अधिक सामना करते हैं. इन रोगों से पीड़ित के शरीर में विकृति या स्थाई अपंगता हो जाती है.इन रोगों से जुड़े कलंक, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार को संक्रमण और फैलाव को लेकर फैली ग़लत धारणाएँ और गहरा करती हैं. दीर्घकालिक NTD रोगों से पीड़ित लोगों में अवसाद, चिन्ता और आत्महत्या से जुड़ी प्रवृत्तियाँ सामान्य आबादी और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों की तुलना में अधिक पाई जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद समुदाय स्तर पर उन्हें आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सहयोग नहीं मिल पाता.पहली बार वैश्विक गाइडलाईन जारी WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “NTD के विरुद्ध लड़ाई सिर्फ़ रोग पैदा करने वाले वाहकों के विरुद्ध लड़ाई नहीं है, बल्कि उस गहरे मानवीय दुख के ख़िलाफ़ भी है, जो ये बीमारियाँ लोगों को झेलने पर मजबूर करती हैं.”उन्होंने कहा कि वास्तविक उन्मूलन का अर्थ सिर्फ़ बीमारी से मुक्ति नहीं, बल्कि उससे जुड़ी शर्म, सामाजिक अलगाव और निराशा से भी लोगों को मुक्त करना है. WHO ने, मानसिक स्वास्थ्य और कलंक से निपटने के पहली बार वैश्विक दिशानिर्देश जारी किए हैं.इस ‘आवश्यक देखभाल पैकेज’ में मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, NTD रोगों से पीड़ित लोगों में मानसिक समस्याओं की पहचान और उपचार तथा व्यक्ति, समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के स्तर पर कलंक कम करने से जुड़े प्रमाण-आधारित उपायों को शामिल किया गया है. WHO/Oscar ZaragozaFungal Infection फंगल रोगजनक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा ख़तरा हैं क्योंकि वे तेज़ी से सामान्य और उपचार के लिए प्रतिरोधी होते जा रहे हैं. प्रगति को पीछे धकेलती धन-कटौती…हालाँकि, NTD उन्मूलन के क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति पर वित्तीय संकट का खतरा मंडरा रहा है. WHO के अनुसार, पिछले एक दशक में सहयोग और साझेदारी के कारण उपचार की आवश्यकता वाले लोगों की संख्या घटकर 1.4 अरब के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर आ गई है, और मृत्यु व बीमारी के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है.इसके अलावा, अब तक 58 देशों ने कम से कम एक NTD रोग को समाप्त कर दिया है और वर्ष 2030 तक 100 देशों में उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है. ब्राज़ील से लेकर जॉर्डन और नाइजर से फिजी तक के देशों ने दिखाया है कि यह लक्ष्य व्यवहारिक और सम्भव है.लेकिन NTD पर 'वैश्विक रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच NTD के लिए वैश्विक सहायता में 41 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे अब तक की उपलब्धियाँ ख़तरे में पड़ सकती हैं. WHO का कहना है कि NTD कार्यक्रमों में निवेश आर्थिक रूप से भी लाभकारी है. अनुमान के मुताबिक़, निवारक उपचार में लगाया गया हर एक अमेरिकी डॉलर लगभग 25 डॉलर का लाभ देता है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उपेक्षित उष्णकटिबन्धीय रोग लोगों के जीवन और आजीविका पर लगातार बोझ बनते रहेंगे.

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