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यूक्रेन युद्ध, परमाणु सुरक्षा के लिए विश्व में सबसे बड़ा ख़तरा - IAEA

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अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफ़ाएल ग्रोस्सी ने चिन्ता जताई है कि यूक्रेन में युद्ध को चार वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह विश्व भर में परमाणु सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बना हुआ है. परमाणु स्थलों के नज़दीक लड़ाई की वजह से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर जोखिम है और इसलिए उनके संगठन का ध्यान हर तरह से परमाणु हादसे को टालने पर केन्द्रित है. IAEA प्रमुख ने शुक्रवार को परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स को सम्बोधित करते हुए कहा कि लड़ाई की वजह से अति-महत्वपूर्ण बुनियादी प्रतिष्ठानों पर ख़तरा है.“यूक्रेन में हिंसक संघर्ष अपने पाँचवे वर्ष में प्रवेश करने के नज़दीक है. यह परमाणु सुरक्षा के लिए विश्व का सबसे बड़ा ख़तरा बना हुआ है.” Tweet URL

IAEA की टीम इस हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़ों में सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर तैनात हैं और परमाणु सुरक्षा से जुड़ी स्थिति पर नियमित अपडेट प्रकाशित किए जा रहे हैं.बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, IAEA का मुख्य निर्णय-निर्धारण निकाय है, जिसमें 35 देशों के प्रतिनिधि शामिल है. इसका दायित्व परमाणु सुरक्षा का आकलन, बचाव उपायों की देखरेख करना और परमाणु ऊर्जा संगठन के कामकाज को निर्देशित करना है.फ़िलहाल, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्राँस समेत अन्य देश इसके सदस्य हैं.राफ़ाएल ग्रोस्सी ने ज़ोर देकर कहा कि परमाणु स्थलों की सुरक्षा के लिए यह अहम है कि उनके पास, राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था हो. उसके अभाव में, परमाणु संयंत्रों को शीतलन (cooling) और अन्य आवश्यक सुरक्षा कार्यों के लिए बैक-अप (वैकल्पिक) प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ता है.उनके अनुसार, राष्ट्रीय ग्रिड से यह सुरक्षित सप्लाई सभी परमाणु केन्द्रों के लिए सुरक्षित ढंग से मुहैया कराई जानी होगी और इसके लिए, हिंसक टकराव के दौरान परमाणु सुरक्षा सम्बन्धी IAEA के दिशानिर्देशों का ध्यान रखा जाना होगा.ज़ैपोरिझझिया प्लांट में स्थितिIAEA के शीर्ष अधिकारी ने अपने सम्बोधन में योरोपीय क्षेत्र के सबसे बड़े संयंत्र, ज़ैपोरिझझिया परमाणु प्लांट में हाल के दिनों में हुई प्रगति से अवगत कराया. यह संयंत्र 19 जनवरी को मरम्मत कार्य के पूरा होने के बाद अपनी 330-किलोवोल्ट बैक-अप पावर लाइन से फिर जुड़ गया.यूक्रेन और रूस में अस्थाई युद्धविराम लागू किए जाने के बाद इसकी मरम्मत की गई थी. सैन्य गतिविधियों के कारण 2 जनवरी को आपूर्ति व्यवस्था को क्षति पहुँचने के बाद से यह ठप थी. यह कनेक्शन बहाल होने तक, ज़ैपोरिझझिया प्लांट अपनी 750 किलोवोल्ट की मुख्य लाइन पर ही निर्भर रहा, ताकि सुरक्षा प्रणालियों के लिए बिजली आपूर्ति बरक़रार रखी जा सके. IAEA की टीम सर्दी के मौसम में प्लांट के कामकाज पर क़रीबी नज़र रखे गए हैं. बिजली आपूर्ति अहमराफ़ाएल ग्रोस्सी ने कहा कि परमाणु सुरक्षा के लिए यूक्रेन के बिजली सब-स्टेशन भी अहम हैं. उन्हें क्षति पहुँचने से परमाणु सुरक्षा पर असर होता है और इसे बचा जाना होगा. ग़ौरतलब है कि रूसी सैन्य बलों ने पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं, जिसके बाद IAEA विशेषज्ञ उन सब-स्टेशन की स्थिति का आकलन कर रहे हैं, जोकि परमाणु सुरक्षा की दृष्टि से अहम हैं. इसके अलावा, अन्य परमाणु संयंत्रों के नज़दीक सैन्य गतिविधियों की ख़बरें है, जिनमें चेरनोबिल प्लांट भी है, जहाँ एक सब-स्टेशन को नुक़सान पहुँचने से बिजली आपूर्ति की अनेक लाइन प्रभावित हुई थीं. IAEA प्रमुख ने कहा कि परमाणु सुरक्षा व बचाव के लिए सर्वोत्तम उपाय यही है कि इस हिंसक टकराव का अन्त किया जाए.

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