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सूडान: दारफ़ूर में नाज़ुक स्थिति, बच्चों तक पहुँच पाना बहुत कठिन है - UNICEF

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण हालात में रह रहे बच्चों एक बच्चे तक पहुँच पाना भी बहुत कठिन है और इसके लिए अनेक दिनों की बातचीत, सुरक्षा अनुमति और रेत भरी सड़कों पर लम्बी यात्राओं से होकर गुज़रना पड़ रहा है. यूएन एजेंसी ने क्षोभ जताया है कि लड़ाई के अग्रिम मोर्चे निरन्तर बदल रहे हैं और बच्चे बस किसी तरह गुज़र-बसर कर पा रहे हैं. यूनीसेफ़ की संचार प्रमुख ऐवा हिन्ड्स ने 10 दिनों की दारफ़ूर यात्रा से लौटने के बाद जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि वहाँ मानवीय सहायता प्रयास, बहुत नाज़ुक परिस्थितियों में किए जा रहे हैं और उन्हें बरक़रार रखना बहुत आवश्यक है.पिछले लगभग तीन वर्षों से, सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर हिंसक टकराव जारी है, जिससे सूडान के अलावा अन्य पड़ोसी देशों पर भी गहरा असर हुआ है. Tweet URL

“इस संकट के बारे कुछ में कुछ भी सरल नहीं है. हर एक क़दम बहुत कठिनाई के बाद बढ़ पाता है, हर सहायता पहुँचानी नाज़ुक ही है.”ऐवा हिन्ड्स ने उत्तर दारफ़ूर में तवीला में भी हालात का जायज़ा लिया, जहाँ पूरी आबादी बेहद हताशा में जीवन गुज़ार रही है. लाखों लोग हिंसा से बचने के लिए वहाँ पहुँचे और किसी तरह भूसे, प्लास्टिक शीट, डंडों से बने अस्थाई शिविरों में रह रहे हैं.यूनीसेफ़ अधिकारी के अनुसार, 5-6 लाख लोगों ने तवीला में शरण ली हुई है और ऐसा महसूस होता है कि यह पूरा शहर बेघर हुए, भयभीत लोगों से बना हुआ है.मौजूदा चुनौतियों और आवाजाही की कठिनाइयों के बावजूद, यूनीसेफ़ अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर बच्चों तक राहत पहुँचाने की कोशिशें कर रहे हैं.कठिन हालात में सहायता प्रयासपिछले दो सप्ताह में, 1.4 लाख बच्चों का टीकाकरण किया गया, हज़ारों अन्य का बीमारियों व कुपोषण के लिए इलाज किया गया. हज़ारों बच्चों के लिए सुरक्षित जल व्यवस्था बहाल की गई है और अस्थाई शिक्षण केन्द्र भी खोले गए हैं.उन्होंने कहा कि जोखिम भरी परिस्थितियों में कड़ी मेहनत से एक क़ाफ़िले, एक क्लीनिक, एक कक्षा को एक बार में खड़ा करने जैसा है, लेकिन यहाँ दारफ़ूर में बच्चों के लिए, उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिए जाने और उन तक सहायता पहुँचाने के बीच एक महीन रेखा जैसा है.इस दौरान उन्होंने अनेक बच्चों से मुलाक़ात की जो स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई करना चाहते हैं, ताकि एक बेहतर भविष्य को आकार दे सकें. ऐवा हिन्ड्स ने कहा कि ये बच्चे और आशा और दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं.कुछ शिविरों में महिलाओं व लड़कियों के पास न खाने के लिए भोजन है और न ही कम्बल या बच्चों के लिए गर्म कपड़े. उनके पास सर्दी के मौसम में ओढ़ने के लिए कुछ भी नहीं है.यूनीसेफ़ की वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, उन्होंने दारफ़ूर क्षेत्र में एक ऐसी मानवीय आपदा को देखा, जोकि एक विशाल स्तर पर घटित हो रही है. “सूडान के बच्चों को तत्काल अन्तरराष्ट्रीय ध्यान व निर्णायक क़दमों की आवश्यकता है. उसके बिना, देश की सबसे युवा और सम्वेदनशील परिस्थितियों में रह रही आबादी के लिए यह पीड़ा और गहराएगी.”

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