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म्याँमार: सैन्य तख़्तापलट के 5 वर्ष, मानवीय संकट से आम नागरिकों के लिए गहरी पीड़ा

 - World News in Hindi

म्याँमार की सेना ने पाँच वर्ष पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के सदस्यों को हिरासत में लेने के बाद सत्ता को हथिया लिया था, जिसके बाद से ही देश की जनता की पीड़ा गहरी होती गई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क्षोभ जताया है कि म्याँमार में दंडहीनता का चक्र जारी है और बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. यूएन महासचिव के प्रवक्ता द्वारा जारी शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि महासचिव गुटेरेश, म्याँमार में तेज़ी से बिगड़ती स्थिति और क्षेत्र में उसके प्रभावों पर चिन्तित हैं.पार-राष्ट्रीय अपराधों में उछाल आया है, 50 लाख से अधिक लोग देश की सीमाओं के भीतर और अन्य देशों में विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. खाद्य असुरक्षा, आर्थिक उथलपुथल, म्याँमार की सेना के हवाई हमलों और बढ़ती हिंसा की वजह से आम नागरिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे हैं. Tweet URL

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सभी प्रकार की हिंसा की निन्दा करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार व मानवतावादी क़ानून को पालन करने, मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए बेरोकटोक रास्ता मुहैया कराए जाने की अपील की है. यूएन प्रमुख ने म्याँमार की जनता, और एक समावेशी, शान्तिपूर्ण व न्यायसंगत समाज की लोकतांत्रिक आकाँक्षाओं के लिए उनके साथ एकजुटता व्यक्त की. उन्होंने दोहराया कि रोहिंग्या समुदाय समेत देश में सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी.1 फ़रवरी 2021 को, म्याँमार की सेना ने लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था और राष्ट्रपति, स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची समेत सैकड़ों अधिकारियों, राजनैतिक नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था.इसके बाद से ही देश, मानवीय व मानवाधिकारों के संकट से जूझ रहा है, जोकि समय बीतने के साथ और अधिक गहरा हुआ है. वर्ष 2025 में, म्याँमार अनेक मोर्चों पर संकट से जूझता रहा. हिंसक टकराव, भूकम्प और बाढ़ के कारण परिवार बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. 1.2 करोड़ लोग भूखे हैं. बारूदी सुरंगों की वजह से हर दिन औसतन 2 लोगों की जान जा रही है.नागरिक शासन की वापसी पर बलमहासचिव के अनुसार, नागरिक शासन की ओर लौटने के लिए यह ज़रूरी है कि हिंसा पर तत्काल विराम लगाया जाएगा और नागरिक समाज की भागेदारी में समावेशी सम्वाद की प्रतिबद्धता दर्शाई जाए. इसमें महिलाओं, युवाओं, जातीय व अल्पसंख्यक समुदायों को शामिल किया जाना होगा.यूएन प्रमुख ने म्याँमार में सभी हितधारकों व अन्तरराष्ट्रीय पक्षों से ऐसा माहौल तैयार करने का आग्रह किया है, जिसमें देश की जनता स्वतंत्रता व शान्ति के साथ अपने राजनैतिक अधिकारों का उपयोग कर सके.उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिन्त और स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची समेत मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को जल्द से जल्द रिहा किए जाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि म्याँमार की जनता के नेतृत्व में मौजूदा संकट का समाधान निकालने के लिए क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय एकता की आवश्यकता है, ताकि हिंसक टकराव की बुनियादी वजहों से निपटा जा सके, जवाबदेही तय की जाए, और मानवीय व विकास आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. मानवाधिकारों के प्रति बेपरवाहीम्याँमार में सैन्य तख़्तापलट के 5 वर्ष ऐसे समय में पूरे हो रहे हैं, जब सैन्य नेतृत्व द्वारा तीन चरणों में कराए गए चुनाव सम्पन्न हुए हैं. यूएन अधिकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से समाज ध्रुवीकरण का शिकार हुए है और राजनैतिक मार्ग की बजाय हिंसा में तेज़ी आई है.यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में आम लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान नहीं किया गया.म्याँमार की 330 टाउनशिप में से 263 में मतदान हुआ, जोकि मोटे तौर पर सेना के नियंत्रण वाले शहरी इलाक़ों तक ही केन्द्रित था. हिंसा प्रभावित बड़े इलाक़ों में चुनाव नहीं कराए गए और न ही विस्थापित समुदायों व अल्पसंख्यक समुदायों की इसमें भागेदारी थी. म्याँमार की लगभग 25 फ़ीसदी आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है और एक-तिहाई से अधिक आबादी को जल्द मानवीय सहायता की आवश्यकता है. मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए मार्ग में अवरोध हैं और राख़ीन प्रान्त में भूख संकट की चपेट में आए समुदायों को राहत मुहैया कराने का रास्ता ठप कर दिया गया है.विश्व अदालत में न्याय की आसइस बीच, म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर विशेष रैपोर्टेयर टॉम ऐंड्रयूज़ ने कहा है कि रोहिंग्या पीड़ितों द्वारा अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में अपनी व्यथा को बयाँ करना, भयावह अपराधों के समक्ष उनके असाधारण साहस को परिलक्षित करता है.हाल के दिनों में, संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च न्यायालय (ICJ) में गाम्बिया की उस याचिका सुनवाई हुई है, जिसमें म्याँमार पर, रोहिंग्या समुदाय के विरुद्ध जनसंहार करने का आरोप लगाया गया है. विशेष रैपोर्टेयर ने जीवित बचे रोहिंग्या व्यक्तियों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनकी गवाही से, सबसे भयावह अपराधों के मामलों की सच्चाई के प्रकाश में ला पाना सम्भव हुआ है.स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने ज़ोर देकर कहा कि न्याय, कोई अमूर्त अवधारणा नहीं है, बल्कि यह उन व्यक्तियों की हिम्मत की बुनियाद पर बना है, जो ताक़त के सामने सच बोलने की इच्छा रखते हैं.

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