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म्याँमार: एक ‘अभूतपूर्व’ मानवीय संकट, सहायता धनराशि की कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें

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वर्ष 2025 में, म्याँमार अनेक मोर्चों पर संकट से जूझता रहा. हिंसक टकराव, भूकम्प और बाढ़ के कारण परिवार बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. 1.2 करोड़ लोग भूखे हैं. बारूदी सुरंगों की वजह से हर दिन औसतन 2 लोगों की जान जा रही है. म्याँमार में यूएन की मानवतावादी समन्वयक ग्वेन लुईस का कहना है कि सहायता धनराशि में कटौती की वजह से हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए हैं और इसके मद्देनज़र, 2026 में बड़े स्तर पर समर्थन मुहैया कराए जाने की आवश्यकता है. 1 फ़रवरी 2021 को, म्याँमार की सेना ने लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था और राष्ट्रपति, स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची समेत सैकड़ों अधिकारियों, राजनैतिक नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था.इसके बाद से ही देश, मानवीय व मानवाधिकारों के संकट से जूझ रहा है, जोकि समय बीतने के साथ और अधिक गहरा हुआ है. Tweet URL

म्याँमार के लिए यूएन की कार्यवाहक रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर व मानवतावादी समन्वयक ग्वेन लुईस ने बताया कि म्याँमार फ़िलहाल एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहा है. “हिंसक टकराव जारी रहने, हवाई हमलों, गोलाबारी और बमबारी की वजह से अनगिनत परिवार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं और जनजीवन पर गहरा असर हुआ है. मार्च 2025 में आए भूकम्प और मॉनसून के दौरान बाढ़ की वजह से हालात और जटिल हो गए हैं.” बारूदी सुरंगों में विस्फोट होने की घटनाओं में पिछले वर्ष 357 लोगों का जान गई, यानि प्रति दिन औसतन दो मौतें. महिलाओं, लड़कियों और एलजीबीटीक्यू समुदाय पर अन्य की तुलना में कहीं अधिक असर हुआ है.उन्होंने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुँच सीमित है और कठिन हालात में किसी तरह गुज़र-बसर करने के लिए मजबूरन मानव तस्करी व बाल विवाह के मामले बढ़े हैं.देश में 1.2 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं, जिनमें से 10 लाख लोग आपात स्तर पर भूख से जूझ रहे हैं. पिछले वर्ष, 30 हज़ार बच्चे पोषण सम्बन्धी समर्थन से वंचित रह गए. इनमें से कईं बच्चों की या तो मौत हो गई या फिर वे गम्भीर रूप से बीमार पड़ गए. यह वास्तव में एक विकट स्थिति है. धन कटौती की चुनौतीयूएन की वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, म्याँमार में मानवतावादी अपील के तहत जितनी रक़म की आवश्यकता थी, उससे कम स्तर पर ही यह मिल पाई. इस वजह से कुछ सहायता अभियान जारी रखे गए, लेकिन पर्याप्त स्तर पर राहत नहीं मिल पाई. “खाद्य पैकेट को पहुँचाया गया, मगर स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सम्बन्धी सेवाएँ कई लोगों की पहुँच से दूर हो गईं. 8 लाख बच्चे इन सेवाओं से वंचित हैं.” ग्वेन लुईस ने कहा कि लाखों लोगों को भोजन व अन्य बुनियादी सेवाएँ नहीं मिल पा रही हैं. दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं. बेहाल, बेघर परिवारमानवतावादी समन्वयक ने कहा कि बार-बार होने वाले विस्थापन का शिकार होना, आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. स्थानीय परिवार हिंसक टकराव, भूकम्प, और बाढ के कारण बेघर होने के लिए मजबूर हो रहे हैं.“महिलाएँ मुझे बताती हैं कि जीवन फिर से पटरी पर लाना कितना कठिन है. पहली बार विस्थापित होने के बाद, वे अपनी जमापूँजी स्कूली पढ़ाई और स्वास्थ्य देखभाल में ख़र्च कर देते हैं.” “फिर यह जब दोबारा होता है, तो उनके लिए परिवहन की व्यवस्था कर पाना भी कठिन हो जाता है. हम जो कुछ भी मानवीय सहायता प्रदान कर सकते हैं, वे उस पर बहुत निर्भर हैं.” © UNICEF/Nyan Zay Htet म्याँमार के दूसरे सबसे बड़े शहर, मैंडाले में भूकम्प से बड़ी तबाही हुई है. सहायता के लिए नई प्राथमिकताएँयूएन अधिकारी ग्वेन लुईस के अनुसार, मानवीय सहायता प्रयासों में नए बदलाव अमल में लाने से हमें सर्वाधिक निर्बलों के लिए प्राथमिकताएँ तय करने में मदद मिली है.साथ ही, यह पुर्नविचार करने में भी कि हम लोगों तक किस तरह से पहुँचे, और इससे स्थानीय स्तर पर प्रयासों को मज़बूती मिली है. “नागरिक समाज संगठन, सहायता के लिए अग्रिम पंक्ति में जुटे हैं और हम उनके इर्दगिर्द समन्वय के लिए तंत्र को खड़ा कर रहे हैं.” © WFP/Aung Khaing Moe म्याँमार में चक्रवात मोका से प्रभावित लोगों को WFP खाद्य सहायता. अपील के लिए समर्थनमानवतावादी समन्वयक ने उम्मीद जताई है कि दानदाताओं द्वारा स्थानीय स्तर पर और निवेश किया जाएगा, जैसेकि म्याँमार मानवतावादी कोष में. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सहायता अपील के लिए 100 प्रतिशत रक़म मुहैया कराए जाने की आवश्यकता है, चूँकि यह न्यूनतम ज़रूरतों को ही दर्शाती है. ग्वेन लुईस ने आशा व्यक्त की है कि 2026 के लिए उनकी अपील के तहत पूर्ण रूप से धनराशि जुटा पाने में सफलता मिलेगी. “हमारा लक्ष्य 1.6 करोड़ ज़रूरतमन्दों तक पहुँचने का है, लेकिन योजना में 45-49 लाख सर्वाधिक ज़रूरतमन्दों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है. मुझे पारस्परिक समन्वय में बेहतर प्रवाह और स्थानीय संगठनों के लिए मज़बूत समर्थन की उम्मीद है.”

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