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यूक्रेन: ड्रोन हमलों के बीच भोजन पहुँचाते WFP राहतकर्मी

 - World News in Hindi

यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले को लगभग 4 साल होने वाले हैं, लेकिन युद्ध की भयावहता आज भी उतनी ही विनाशकारी है. युद्धक्षेत्र में काम कर रही मानवीय सहायता एजेंसियों के लिए, हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है, ख़ासकर उन राहतकर्मियों के लिए, जो अग्रिम मोर्चों पर ज़रूरतमन्द लोगों तक भोजन और अन्य जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सुरक्षा अधिकारी ओलेग केमिन ऐसे ही एक राहतकर्मी हैं, जो अग्रिम मोर्चे पर युद्ध की मार झेल रहे लोगों तक लगातार मानवीय सहायता पहुँचा रहे हैं. Tweet URL

ओलेग केमिन, यूक्रेन और रूस को अलग करने वाली लगभग 1 हज़ार किलोमीटर लम्बी सम्पर्क रेखा के पास कार्यरत हैं. इस क्षेत्र में रिमोट-कंट्रोल से चलने वाले ड्रोन विमान एक घातक ख़तरा बने हुए हैं.ओलेग केमिन ने, यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि राजधानी कीव समेत यूक्रेन के अनेक शहर लगातार हमलों की चपेट में हैं. लगातार हमले, अँधेरे में डूबे शहर और बढ़ता तनावओलेग के अनुसार, “हर ऐसी रात, जब गोलाबारी होती है, हमारे लिए हालात बेहद कठिन हो जाते हैं. ऊर्जा ढाँचे को निशाना बनाए जाने से पूरे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है. हर हमला नए पीड़ित छोड़ जाता है और पहले से जारी तनाव को और बढ़ा देता है.”इसके अलावा, लगातार हवाई हमलों के सायरन और बंकरों में ली गई शरण, लोगों की मानसिक और शारीरिक क्षमता पर गहरा असर डाल रहे हैं.एक सुरक्षा अधिकारी के रूप में ओलेग की ज़िम्मेदारी है कि वह हर हवाई रैड ऐलर्ट पर नज़र रखें, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को समय रहते चेतावनी दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें.क्या डर की आदत पड़ जाती है?ओलेग कहते हैं कि “प्रथम हवाई हमले और प्रथम सायरन, मुझे आज भी याद हैं. वह अनुभव बेहद डरावना था. जब आप विनाश को अपनी आँखों से देखते हैं, तो ऐसे हालात के लिए अभ्यस्त होना असम्भव हो जाता है.”ओलेग बताते हैं कि कभी-कभी थकान इतनी अधिक होती है कि मोबाइल ऐप पर जारी ऐलर्ट सुनाई नहीं देता, और अनेक बार लोग विस्फोट की आवाज़ से ही जाग जाते हैं. ऐसे क्षणों में आश्रय स्थल तक पहुँचना भी सम्भव नहीं होता.ऐसे हालात में, राहतकर्मी तय आपात प्रक्रियाओं पर निर्भर रहते हैं, जैसे हमला समाप्त हुआ या नहीं, कर्मचारियों की गिनती करनी है या तत्काल ज़रूरतों का आकलन करना है.जहाँ जीवन धीमा पड़ रहा है...आज यूक्रेन में सबसे ज़्यादा ज़रूरतमन्द समुदाय पोक्रोव्स्क, कुप्यांस्क, कोन्स्टेंटिनिव्का और डोब्रोपिल्या जैसे शहरों में हैं. ये वही इलाके़ हैं, जहाँ कभी WFP के क़ाफ़िले नियमित रूप से जाते थे.ओलेग बताते हैं, “पहली बार जब आप वहाँ जाते हैं, तो वह एक सामान्य शहर होता है. फिर दुकानें बन्द होने लगती हैं, इमारतें ध्वस्त होती जाती हैं और सड़कें ख़ाली हो जाती हैं. आख़िर में, सिर्फ़ एक बन्द शहर और वे लोग बचते हैं, जिनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं होती.”ड्रोन हमलों से बचाव...यूएन खाद्य एजेंसी (WFP) के क़ाफ़िले, यूक्रेन और रूस के विवादित क्षेत्रों में खाद्य सहायता पहुँचाते समय ‘फर्स्ट-पर्सन-व्यू’ (FPV) ड्रोन से सबसे बड़ा ख़तरा झेलते हैं.सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों को, क़ाफ़िले की GPS स्थिति साझा की जाती है, लेकिन यह सुरक्षा केवल यूएन के वाहनों तक ही सीमित रहती है.ग़ौरतलब है कि FPV ड्रोन सिर्फ़ “उड़ता कैमरा” नहीं हैं, बल्कि यह संचालक को ड्रोन की आँखों से देखने का अनुभव देते हैं, जिससे वे छोटे क्षेत्रों में भी बहुत जल्दी और सटीक कार्रवाई कर सकते हैं. ©WFP/Sayed Asif Mahmud राजधानी कीव समेत यूक्रेन के अनेक शहर लगातार हमलों की चपेट में हैं. यूक्रेनी सैन्य बल, ड्रोन से बचाव के लिए सड़कों के दोनों ओर ऊँचे स्तम्भों पर जाल बिछाते हैं, जिन्हें 10-15 किलोमीटर लम्बे ‘नैट कॉरिडोर’ के रूप में तैयार किया जाता है. छोटे ड्रोन अकसर इन जालों में फँस जाते हैं.ओलेग कहते हैं, “यह आख़िरी उम्मीद जैसी है, लेकिन कम से कम एक स्तर की सुरक्षा तो मिलती है.”हालाँकि, तेज़ हवाओं या समय के साथ इन जालों में छेद हो जाते हैं, जिससे सहायता क़ाफ़िलों के लिए जोखिम दोगुना हो जाता है."यहाँ मेरे अपने दफ़न हैं, मैं कहीं नहीं जाऊँगी"यूक्रेन के ख़ारकीव क्षेत्र के दूरदराज़ गाँवों में आज भी लोग रह रहे हैं. ये गाँव रूस की सीमा से महज़ 4.5 किलोमीटर दूर हैं, जहाँ ड्रोन गतिविधि काफ़ी ज़्यादा रहती है.WFP के अधिकारी ओलेग एक बुज़ुर्ग महिला के बारे में बताते हैं, जिन्होंने गाँव छोड़ने से मना कर दिया.महिला ने कहा, “यहाँ मेरे पति और बच्चों की क़ब्रें हैं. मेरे पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं है.”ऐसे क्षेत्रों में, ट्रक से पहुँचना असम्भव होता है. WFP के वाहनों की पिछली सीटें निकालकर उन्हें भोजन किट से भर दिया जाता है और कीचड़ भरे रास्तों से राहत सामग्री पहुँचाई जाती है.इस दौरान, कई बार एक साथ दोगुना राशन वितरित किया जाता है, क्योंकि यह तय नहीं होता कि अगले महीने मदद पहुँच पाएगी या नहीं.बुज़ुर्ग, पेंशनभोगी और मजबूरी में लौटे लोगओलेग के अनुसार, सबसे अधिक मदद पाने वालों में बुज़ुर्ग और पेंशनभोगी शामिल हैं. अनेक लोग कहते हैं, “यह हमारी ज़मीन है, हमारा घर है, जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया. हम इसे छोड़कर नहीं जाएँगे.”कुछ लोग पश्चिमी यूक्रेन या योरोप गए, लेकिन उम्र और रोज़गार के अभाव के कारण किराया नहीं चुका पाए और मजबूर होकर वापस लौट आए. जबकि, विकलांग लोगों के लिए भी पलायन आसान नहीं है.जहाँ बाज़ार बन्द पड़े हैं, वहाँ WFP भोजन किट प्रदान करता है. अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में नक़दी सहायता दी जाती है, ताकि लोग अपनी ज़रूरत के अनुसार भोजन ख़रीद सकें.कृषि भूमि की सुरक्षा अहमWFP का एक अहम कार्य यूक्रेन की कृषि भूमि को फिर से सुरक्षित बनाना भी है. ओलेग बताते हैं कि यूक्रेन की 25-30 प्रतिशत कृषि भूमि अब भी बारूदी सुरंगों और विस्फोटक अवशेषों से दूषित है.उन्होंने बताया कि, “यूक्रेन एक बड़ा कृषि देश है. यहाँ का अनाज अफ़्रीका और दुनिया के अनेक हिस्सों में लोगों को भोजन देता है. इस ज़मीन को फिर से उपयोगी बनाना सिर्फ़ यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक भूख से लड़ने के लिए भी ज़रूरी है.”चार साल बाद भी यूक्रेन में युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि भूख, डर और मानवीय संकट के विरुद्ध भी लड़ा जा रहा है.

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