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ग़ाज़ा: फ़लस्तीनियों के अधिकारों के 'व्यवस्थित हनन' की चेतावनी

 - World News in Hindi

संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल अपने क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र - पश्चिमी तट में, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें नस्लीय भेदभाव और रंगभेद (apartheid) जैसे मामलों पर रोक लगाता है. इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2022 के अन्त से बढ़ती हिंसा, दमन और अपराधों के लिए सज़ा नहीं दिए दाने (दंडमुक्ति) की स्थिति के बीच, भेदभावपूर्ण प्रवृत्तियों के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की इस रिपोर्ट में भेदभाव प्रणाली का आलेखन किया गया है जिसे दशकों से चली आ रही व्यवस्था बताया गया है, और दिसम्बर 2022 से इन मामलों में तेज़ वृद्धि देखी गई है. Tweet URL

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों के अधिकारों का व्यवस्थित रूप से दम घोंटा (systematic asphyxiation) जा रहा है या हनन किया जा रहा हैं.उन्होंने कहा कि पानी लेने, स्कूल जाने, अस्पताल पहुँचने, परिवार और मित्रों से मिलने या ज़ैतून की फ़सल काटने जैसे हर पहलू में, फ़लस्तीनियों के जीवन को, इसराइल के भेदभावपूर्ण क़ानून, नीतियों और तरीक़ों द्वारा नियंत्रित और सीमित किया गया है.मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि यह नस्लीय भेदभाव और अलगाव की एक विशेष रूप से गम्भीर अवस्था है, जो उस प्रकार की एक रंगभेद (apartheid) प्रणाली के समान है जिसे हम पहले देख चुके हैं.असमान व्यवहार रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली अधिकारी, पश्चिमी तट में बसने वाले इसराइली लोगों और फ़लस्तीनियों के लिए अलग-अलग क़ानून और नीतियाँ लागू करते हैं, जिससे ज़मीन और पानी जैसे संसाधनों तक पहुँच और आवाजाही समेत अनेक महत्वपूर्ण मामलों में असमान व्यवहार होता है.रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि ऐसा अलगाव, भेदभाव और आधीनता को स्थाई बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है, ताकि दमन जारी रखा जा सके.रिपोर्ट में कहा गया है कि, “ऐसे क़दम जो इस नीति को बनाए रखने के इरादे से उठाए जाते हैं, वे सभी प्रकार के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर अन्तरराष्ट्रीय सन्धि के अनुच्छेद-3 का उल्लंघन हैं, जिसमें नस्लीय भेदभाव और रंगभेद प्रणाली पर रोक लगाई गई है.”बिगड़ते हालातरिपोर्ट में कहा गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद स्थिति और बिगड़ी है, जब ग़ाज़ा से हमास और अन्य फ़लस्तीनी सशस्त्र समूहों ने, दक्षिणी इसराइल के समुदायों पर हमला किया था. उस हमले में, 1200 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई और 250 से ज़्यादा लोगों को बन्धक बना लिया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध बल का बढ़ता प्रयोग, मनमानी गिरफ़्तारियाँ, यातना, आवाजाही पर कड़े प्रतिबन्ध, नागरिक समाज और मीडिया पर दमन, और यहूदी बस्तियों का विस्तार जैसी घटनाएँ बढ़ी हैं.रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इन परिस्थितियों को यहूदी बस्तियों में इसराइली निवासियों की हिंसा के जारी रहने और तेज़ी ने और भी जटिल बना दिया है, जो अनेक मामलों में इसराइली सुरक्षा बलों की सहमति, समर्थन और भागेदारी के साथ हुआ.इसके अलावा, रिपोर्ट में अवैध हत्याओं और इसराइल व बस्ती में इसराइली निवासियों द्वारा की गई हिंसा के रुझानों का विवरण भी दर्ज किया गया है. UNOCHA/ Olga Cherevko ग़ाज़ा में दो वर्ष के युद्ध ने भीषण विनाश किया है और 67 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं. आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान होरिपोर्ट में बताया गया है कि अपराधों के लिए सज़ा नहीं दिए जाने की स्थिति यानि दंडमुक्ति व्यापक रूप से क़ायम है. जनवरी 2017 से सितम्बर 2025 तक दर्ज, 1 हज़ार 500 से अधिक फ़लस्तीनी लोगों की हत्याओं में, इसराइली अधिकारियों ने केवल 112 मामलों में जाँच शुरू की, और केवल एक ही मामले में दोष साबित हुआ है.मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने इसराइल से अपील की है कि वह व्यवस्थागत भेदभाव को बढ़ावा देने वाले क़ानून और नीतियाँ को समाप्त करें, अवैध बस्तियों को तोड़े, अपना क़ब्ज़ा समाप्त करें और फ़लस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान करें.

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