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अफ़ग़ानिस्तान: गम्भीर भूख का संकट, WFP बना सहारा

 - World News in Hindi

अफ़ग़ानिस्तान के दूरदराज़ पहाड़ी इलाक़ों में, सर्दियों के आगमन के साथ गम्भीर भूख का संकट गहराता जा रहा है. इन संकटग्रस्त क्षेत्रों में, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा मुहैया कराई जा रही सहायता ही, लोगों के लिए एकमात्र सहारा बनी हुई है, क्योंकि भारी बर्फ़बारी के बाद गाँवों का, बाहरी दुनिया से सम्पर्क पूरी तरह कट जाता है. अफ़ग़ानिस्तान की दुर्गम पामीर और वखान घाटियों में, सर्दी केवल एक मौसम नहीं, बल्कि ज़िन्दगी और मौत की जंग बन जाती है. साल के लगभग नौ महीनों तक चलने वाली इस कठोर सर्दी में, पहाड़ों में रहने वाले ग़रीब परिवारों के लिए अलगाव, भूख और कड़ाके की ठंड ही जीवन की सच्चाई होती है.बर्फ़बारी शुरू होते ही सड़कें बर्फ़ की मोटी चादर में ढक जाती हैं, और उन्हीं सड़कों के साथ वे जीवनरेखाएँ भी ग़ायब हो जाती हैं, जिनके सहारे हज़ारों लोग जीवित रहते हैं.एक भेड़ के बदले, आटे के 2 पैकेटहाजी रसूल, अफ़ग़ानिस्तान के बिग पामीर क्षेत्र में रहने वाले एक बुज़ुर्ग हैं. वह बताते हैं कि इस संघर्ष के साथ जीवन जीना उनकी मजबूरी बन चुकी है. उन्हें, WFP के वितरण केन्द्र तक पहुँचने के लिए, सात दिनों तक पैदल चलना पड़ा.हाजी रसूल कहते हैं, “हमारे यहाँ केवल 3 महीने की गर्मी होती है और 9 महीने बर्फ़ जमी रहती है. यहाँ न सड़कें हैं, न पेड़, न फ़सलें - सिर्फ़ कुछ पशुधन और एक नाज़ुक-सी उम्मीद…”उन्होंने बताया कि, “अगर हमें WFP की सहायता नहीं मिली, तो हम नहीं जानते कि हमारा भोजन कहाँ से आएगा.”हाजी रसूल बताते हैं कि उनकी पीढ़ियाँ बिना किसी पक्की सड़क के जीवन जीती आई हैं और जीविका के लिए पशुधन और व्यापार पर निर्भर रही हैं. लेकिन अब यह काफ़ी नहीं है.“एक भेड़ के बदले हमें गेहूँ के आटे के सिर्फ़ दो पैकेट मिलते हैं. बड़े परिवारों के लिए यह कुछ भी नहीं है.” © UNOCHA/Christophe Verhellen अफ़ग़ानिस्तान में विस्थापितों के लिए बनाए गए एक शिविर में एक बच्ची. मीलों पैदल चलने को मजबूरहालात बेहद ख़राब हैं. समुदाय के लोग विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) से, 3 महीने की खाद्य सहायता प्राप्त करने के लिए, मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं.कुपोषण से बचाव के लिए गेहूँ का आटा, दालें, भोजन पकाने का तेल, नमक और महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष पौष्टिक आहार को, सावधानी से वितरित किया जाता है, ताकि यह सीमित खाद्य आपूर्ति अधिक से अधिक समय तक चल सके.अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता लगातार घटती जा रही है, जिससे सबसे ज़्यादा प्रभावित, हाजी रसूल जैसे परिवार हो रहे हैं.ग़ौरतलब है कि इस क्षेत्र में पिछली सर्दी विनाशकारी साबित हुई थी. भोजन और दवाइयाँ समय पर नहीं पहुँच पाने के कारण, 40 लोगों की मौत हो गई, जिनमें युवा माताएँ और बच्चे शामिल थे. ये पहले से ही बीमार और कमज़ोर थे.यहाँ कुपोषण व्यापक रूप से फैला हुआ है और कई परिवार उधार के आटे पर गुज़ारा करने को मजबूर हैं.हाजी रसूल बताते हैं, “कुछ लोग दिन में सिर्फ़ एक बार ही भोजन खा पाते हैं.” © WFP/Isheeta Sumra अफ़ग़ानिस्तान के वखान में, 22 वर्षीय गुलनुमा भी कठिनाइयों में जीवन बिताने को विवश हैं. देश में भूख चिन्ताजनक गति से बढ़ रही है, और खाद्य असुरक्षा के स्तर में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है. चाय के सहारे जीवन यापनवखान में, 22 वर्षीय गुलनुमा भी कठिनाइयों में जीवन बिताने को विवश हैं. उन्हें गर्भावस्था के दौरान एक जाँच में कुपोषित पाया गया.गुलनुमा बताती हैं, “मुझे WFP के पोषण कार्यक्रम में शामिल किया गया और हर महीने पौष्टिक आहार मिलता रहा.”गुलनुमा और उनके परिवार के सदस्य अकसर दिन में, केवल 3 बार दूध वाली चाय पर ही जीवन यापन करते हैं.वह बताती हैं, “मेरे पति बेरोज़गार हैं. काम नहीं है, भोजन नहीं है और सर्दियाँ बहुत कड़ाके की हैं. हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है, बस दूध वाली चाय पर ही जीना पड़ता है.”पर्याप्त प्रतिक्रिया देने में असमर्थ WFP रसूल और गुलनुमा जैसे परिवारों के लिए, विशेषकर कठोर सर्दियों के महीनों में, WFP की खाद्य और पोषण सहायता जीवनरेखा की तरह है.अफ़ग़ानिस्तान में, WFP के समर्थन के बिना, इन परिवारों और लाखों अन्य लोगों की स्थिति और भी गम्भीर हो सकती है.इस यूएन सहायता संस्था ने, हमेशा सर्दियों के महीनों में अपनी सहायता बढ़ाकर, भूख और कुपोषण को रोकने की कोशिश की है.मगर, इस सर्दी में स्थिति अलग है. दशकों में पहली बार, जब ज़रूरतें चरम पर हैं, WFP पर्याप्त सहायता करने में असमर्थ है. © UNICEF/Mark Naftalin अफ़ग़ानिस्तान के एक दूर-दराज़ के इलाक़े में महिलाओं व बच्चों का एक समूह. तत्काल खाद्य सहायता की ज़रूरतअफ़ग़ानिस्तान में भूख का स्तर चिन्ताजनक गति से बढ़ रहा है, और खाद्य असुरक्षा के पैमाने में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है.अफ़ग़ानिस्तान, इस समय बच्चों में गम्भीर कुपोषण के मामलों में दुनिया में चौथे स्थान पर है, और यह दुनिया के सबसे गम्भीर भूख संकटों में से एक बना हुआ है.यहाँ हर 3 में से 1 अफ़ग़ान, यानि लगभग 1.74 करोड़ लोग, तत्काल खाद्य सहायता के लिए ज़रूरतमन्द हैं.इन सर्दियों के बीच, महिलाओं और बच्चों में कुपोषण के स्तर में इतनी वृद्धि होने की सम्भावना है जो हाल के वर्षों में नहीं देखी गई.

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