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UNIDO: विनाश के बिना औद्योगीकरण -भविष्य के लिए यूएन ब्लूप्रिंट

 - World News in Hindi

औद्योगीकरण ने, 19वीं सदी से, दुनिया पर रूपान्तरकारी प्रभाव डाले हैं जिनमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह के प्रभाव शामिल हैं. इसने रोज़गार उपलब्ध कराए हैं, और लाखों लोगों को निर्धनता से बाहर निकाला है. लेकिन इसके बहुत बुरे परिणाम भी हुए हैं जिनमें कुछ प्रमुख हैं; पारिस्थितिकी को हानि, हवा में प्रदूषण, और जलवायु संकट को बढ़ाना, जिससे पृथ्वी के बड़े हिस्से के, रहने योग्य नहीं बचने के जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं. लेकिन यह भी ज़रूरी नहीं है कि ऐसा ही होगा... संयुक्त राष्ट्र का औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO), यह सुनिश्चित करने के लिए संकल्पबद्ध है कि सभी देश इस तरह से प्रगति करें जिससे सभी लोगों को और पृथ्वी को फ़ायदा हो.UNIDO अपने स्वरूप में एक तकनीकी एजेंसी है जिसे, वैश्विक दक्षिण के देशों में विकास और औद्योगीकरण को आगे बढ़ाने के लिए 1966 में बनाया गया था. UNIDO UNIDO में वैश्विक साझेदारियाँ और बाहरी सम्बन्धों की प्रबन्ध निदेशक फ़तौ हैदरा ने, सऊदी अरब के रियाद में हाल में सम्पन्न हुए वैश्विक औद्योगिक सम्मेलन में, UN न्यूज़ के कॉनर लेनन के साथ विशेष बातचीत की और इस एजेंसी की बदलती प्राथमिकताओं पर नज़र डाली. उन्होंने साथ ही यह भी बताया कि अपने 60वें साल में इस संगठन की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक क्यों है.फ़तौ हैदरा याद करती हैं कि जब UNIDO बनाया गया था, तो उद्योगों को प्रदूषक माना जाता था. औद्योगिक नीति कोई अच्छा शब्द नहीं था और पर्यावरण उतनी बड़ी चिन्ता की बात नहीं थी. इस बीच हमने देखा है कि औद्योगीकरण, केवल निर्माण या उत्पादन भर नहीं है; यह नीति से आरम्भ होकर, संस्थानों को मज़बूत करने और छोटे व मध्य आकार की औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी बनाने तक की एक पूरा प्रक्रिया है. जब इन तत्वों को एक साथ रखा जाए है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी व्यक्ति, संगठन या सरकारें, इन सभी से अकेले नहीं निपट सकते. UNIDO के लिए, सबसे ज़रूरी तत्व, सरकारों के साथ साझेदारी है, और इस प्रक्रिया में दूसरा ज़रूरी साझीदार निजी क्षेत्र है.हर देश के लिए समर्पित रणनीति व समाधानUNIDO सरकारों को समर्थन देने पर ज़ोर देता है ताकि वो उद्योगों या निजी सैक्टर को आज ज़रूरी प्रौद्योगिकी में संसाधन निवेश करने के लिए सही जगह तैयार कर सकें. इसका सबसे बड़ा मक़सद अधिक से अधिक लोगों को निर्धनता से बाहर निकालते हुए, पृथ्वी की रक्षा करना है – यह लक्ष्य ही, UNIDO के काम के पीछे एक प्रेरक शक्ति है.UNIDO झगड़ों के दौरान भी देशों को समर्थन देने के लिए संकल्पबद्ध रहता है. जब सूडान जैसा कोई सदस्य देश, युद्ध में होता है, तो UNIDO अपनी गतिविधियाँ जारी रखना चाहता है. इस संगठन का मानना ​​है कि कठिन हालात में ही समर्थन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है. UNIDO अपनी गतिविधियाँ जारी रखने में सावधानी बरतते हुए, सरकार को समर्थन देने के लिए उनके साथ बना रहता है, जैसा कि सूडान और टकरावों और संघर्षों वाले अन्य क्षेत्रों में हुआ है.इन गतिविधियों में सरकार के साथ मिलकर औद्योगिकी रणनीतियाँ विकसित की जाती हैं, और ऐसा, टकरावों या युद्धों वाले क्षेत्रों में संगठन की ज़मीनी मौजूदगी के बिना भी किया जा सकता है.पर्यावरण के बारे में चिन्ताएँ UNIDO के काम का केन्द्र हैं. यह संगठन अलग-अलग श्रेणियों वाले सदस्य देशों के साथ मिलकर काम काम करता है और उन सभी के लिए, उनकी परिस्थितियों और और आवश्यकताओं के अनुसार भिन्न समर्पित रणनीतियाँ विकसित करता है. कुछ देशों के लिए ध्यान ऊर्जा तक पहुँच पर होता है; अन्य के लिए, यह ध्यान अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को, कम कार्बन उत्सर्जन वाले बनाना, या ऊर्जा कुशल बनाने के लिए सुधार करने पर होता है. इन रणनीतियों में जलवायु से जुड़ी बातें मौजूद हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी देशों के लिए कोई एक रणनीति या उपाय सटीक हो, यानि सभी की ज़रूरतें भिन्न होती हैं और उन्हें के अनुसार रणनीतियाँ व समाधान तैयार किए जाते हैं. © ADB/Ariel Javellana लाओस की एक फ़ैक्ट्री में कामगार, निर्यात के लिए इलैक्ट्रॉनिक उत्पाद तैयार कर रहे हैं. क्या दुनिया को UNIDO और UN की अब भी ज़रूरत है, फ़तौ हैदरा इस सवाल का जवाब हाँ में देते हुए कहती हैं कि अनेक संकटों का सामना कर रही और तेज़ी से बदलती दुनिया में UN की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है. संयुक्त राष्ट्र एक तटस्थ और बहुपक्षीय वार्ताकार के तौर पर काम करता है जो पक्षों को एक मंच पर लाता है. UNIDO, विकास के लिए अधिक समावेशी तरीक़े को बढ़ावा देता है और सामाजिक सोशल, पर्यावरणीय व आर्थिक पहलुओं को समाहित करने के लिए बहुत सारी विशेषज्ञताओं का प्रयोग इस्तेमाल करता है. UNIDO ने 60 साल के अनुभव के साथ, दुनिया के हर हिस्से से बेहतरीन उपायों और तरीक़ों को इकट्ठा किया है और उन्हें देशों के लाभ के लिए प्रयोग किया है. यह कोई मानवीय (सहायता) संस्था नहीं है, मगर इसका कामकाज लोगों के पक्ष में है.

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