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सीरिया: नाज़ुक परिस्थितियों के बीच प्रगति के संकेत, मगर विशाल आवश्यकताएँ बरक़रार

 - World News in Hindi

राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन की शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि सीरिया ने पिछले एक वर्ष के दौरान, संस्थाओं की बहाली और शरणार्थियों व विस्थापितों की वापसी समेत अन्य मोर्चों पर प्रगति दर्ज की है. मगर, आर्थिक चुनौतियों, सीमित सेवाओं और सामुदायिक तनाव के कारण वहाँ हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं. यूएन अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने गुरूवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को सीरिया में वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराते हुए कहा कि उसे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के सतत समर्थन की आवश्यकता है.साथ ही, वहाँ सुरक्षा सैक्टर में सुधार के अलावा विभिन्न पक्षों के बीच समावेशी सम्वाद को सुनिश्चित किया जाना होगा. Tweet URL

सीरिया में, एक दशक से अधिक समय से जारी गृहयुद्ध के बाद, दिसम्बर 2024 में, हयात तहरीर अल-शम के नेतृत्व में हथियारबन्द लड़ाकों ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का अन्त कर दिया था.इसके बाद, देश राजनैतिक संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है और राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में अन्तरिम सरकार ने सत्ता सम्भाली हैराजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों की प्रमुख ने कहा कि सीरिया में सरकारी संस्थाओं को बहाल किया गया है, एक नए कैबिनेट का गठन किया गया है, संविधान से जुड़ी घोषणाएं की गई हैं और अक्टूबर में विधायी चुनाव भी कराए गए.हिंसा के स्तर में कमी आई है, लेकिन पिछले कई वर्षों के टकराव और दमन की वजह से अन्तर-सामुदायिक तनाव अब भी चरम पर है.“यह त्रासदीपूर्ण है कि पिछले वर्ष के दौरान यह तनाव उबल उठा.” मार्च में तटीय इलाक़ों में घातक हिंसा हुई,, जून में राजधानी दमिश्क के एक चर्च में आतंकी हमला किया गया और जुलाई में अल्पसंख्यक समुदाय, द्रूज़ -बहुल इलाक़े में झड़पें हुईं, जिसमें 1.5 लाख लोग विस्थापित हुए हैं.इसराइली हवाई हमलों और दक्षिणी सीरिया में अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं से सुरक्षा स्थिति गम्भीर हुई है.अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने यूएन प्रमुख की अपील को दोहराते हुए इसराइल से सीरिया की सम्प्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया है.विशाल आवश्यकताएँआपात राहत मामलों के लिए यूएन की उप समन्वयक जॉयस म्सूया ने तुर्कीये से अपने दो बच्चों के साथ सीरिया वापिस लौटने वाली एक माँ का उदाहरण दिया, जो एक नया व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं.उनके अनुसार, सीरिया को इस स्थिति से उबारने के लिए यह एक दुर्लभ क्षण है, और “यह हमारा दायित्व है कि हम उन्हें एक अवसर प्रदान करें.”उप समन्वयक म्सूया ने कहा कि सीरिया में बड़े पैमाने पर विस्थापित नागरिकों की वापसी हुई है, और देश में 20 लाख से अधिक विस्थापित अपने मूल स्थानों पर लौट चुके हैं. 13 लाख शरणार्थी, पड़ोसी देशों से वापिस आए हैं.मगर, वापिस लौटने वाले अनेक लोग क्षतिग्रस्त, बर्बाद घरों में लौट रहे हैं और उनके पास बिजली, जल, स्वास्थ्य देखभाल व रोज़गार तक सीमित पहुँच है.जॉयस म्सूया ने बताया कि मानवीय सहायता से सीरिया को पुनर्बहाली व पुनर्निर्माण की दिशा में ले जाने के लिए यह ज़रूरी है कि सरकार की अगुवाई में किए जा रहे प्रयासों को समर्थन दिया जाए.मगर, फ़िलहाल, 2025 के लिए सहायता अपील में केवल 30 प्रतिशत धनराशि जुटा पाना सम्भव हुआ है और लाखों लोग अब भी मदद से वंचित हैं, और अगले वर्ष भी आवश्यकताएँ इसी स्तर पर बने रहने की सम्भावना है.

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