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संक्षेप में: सूडान में भूख संकट गहराने की आशंका, म्याँमार में विकलांगजन के अधिकारों का हनन

 - World News in Hindi

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आगाह किया है कि परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच टकराव से जूझ रहे सूडान में, देश की 45 फ़ीसदी आबादी, यानि 2 करोड़ से अधिक लोगों को पेट भरने के लिए भोजन नहीं मिल पा रहा है. सूडान में नागरिक शासन की बहाली के मुद्दे पर व्याप्त मतभेदों की वजह से सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में भीषण लड़ाई भड़क उठी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर समुदाय तबाह हुए हैं, लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं और देश एक गहरे मानवीय संकट का सामना कर रहा है. RSF लड़ाकों ने 500 दिनों से अधिक समय की घेराबन्दी के बाद अल फ़शर को अपने क़ब्ज़े में ले लिया, जिसके बाद वहाँ यौन हिंसा, अत्याचारों, बिना सुनवाई के ही लोगों को जान से मार दिए जाने के आरोप सामने आए हैं. यूएन खाद्य कार्यक्रम ने अपने एक ट्वीट में बताया कि परिवार अब भी शहर छोड़कर भाग रहे हैं, और उन तक मदद पहुँचाने के लिए मानवीय सहायताकर्मी मुस्तैद हैं.
“अकल्पनीय हिंसा और भूख से किसी तरह बचकर भागने वाले लाखों लोगों तक हम जल्द आपात भोजन व पोषण आपूर्ति की व्यवस्था कर रहे हैं.”
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने गुरूवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त के अल फ़शर और साउथ कोर्दोफ़ान प्रान्त के काडुगली में अकाल की पहले ही पुष्टि की जा चुकी है, जोकि मानवीय सहायता से कटे हुए हैं.
“मगर, 9 अन्य स्थानों पर, जहाँ WFP के लिए सहायता मार्ग उपलब्ध है, वहाँ अकाल जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिली है, जिसकी वजह सहायता को लगातार मुहैया कराया जाना है.”
WFP द्वारा सूडान में हर महीने 40 लाख से अधिक लोगों के लिए दारफ़ूर, कोर्दोफ़ान, ख़ारतूम और जज़ीरा में आपात खाद्य सहायता, नक़दी व पोषक आहार सुनिश्चित किया जा रहा है.
यूएन एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा कि जहाँ हिंसक टकराव में कमी आई है और मानवीय सहायता अभियान का दायरा फैला है, वहाँ भूख संकट में कमी आई है. यह दर्शाता है कि भुखमरी और खाद्य संकट में बेहतरी के बीच अन्तर यह है कि निरन्तर सहायता मार्ग मुहैया कराया जाना होगा.म्याँमार में विकलांगजन के अधिकारों का हननम्याँमार में सैन्य नेतृत्व के वफ़ादार सैनिकों ने विकलांग व्यक्तियों को यातनाएँ दी हैं, बिना सुनवाई के ही उनकी हत्याओं को अंजाम दिया है और उन पर यौन हमले भी किए हैं. म्याँमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ टॉम ऐंड्रयूज़ ने अपनी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. Tweet URL

वर्ष 2021 में, म्याँमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदख़ल करते हुए सेना ने देश का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था, जिसके बाद, व्यापक स्तर पर बल प्रयोग किया गया है.
विरोधी दलों, प्रदर्शनकारियों, जातीय अल्पसंख्यकों, विकलांगजन को हिंसा का निशाना बनाया गया है. विशेष रैपोर्टेयर टॉम ऐंड्रयूज़ ने बताया कि बड़ी संख्या में विकलांग व्यक्तियों को उनके घरों में ज़िन्दा जला देने की घटनाएँ हुई हैं.
म्याँमार में गहराई तक समाए धार्मिक व सांस्कृतिक आस्थाओं की वजह से विकलांग व्यक्ति अक्सर अलग-थलग जीवन गुज़ारते हैं, वो अपने अधिकारों का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं और दमन व भेदभाव की छाया में जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर होते हैं.
स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा कि म्याँमार में व्यापक रूप से यह माना जाता है कि पूर्व जन्म में किए गए ‘कुकर्मों’ की वजह से विकलांगता की स्थिति उपजती है. इससे विकलांगजन के साथ भेदभाव को बढ़ावा मिलता है और अनेक लोग कथित शर्मिंदगी की वजह से सामुदायिक जीवन से पाँव पीछे खींच लेते हैं.
इसके बावजूद, अनेक संगठन उन तक अति-आवश्यक सेवाओं को पहुँचाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरन्तर प्रयासरत हैं.
विशेष रैपोर्टेयर ने ध्यान दिलाया कि ऐसे समय में जब दुनिया का ध्यान अन्य संकटों व हिंसक संघर्षों पर लगा है, म्याँमार में विकलांगजन की स्थिति एक छिपा हुआ संकट बन गई है. इसलिए दुनिया को यहाँ ध्यान देना ज़रूरी है.स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ और विशेष रैपोर्टेयर मानवाधिकार परिषद के एक अधिदेश के तहत स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, वे संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं, और उनके कामकाज के लिए, संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है.

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